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Jammu News: श्रद्धालुओं ने बाबा चमलियाल की मजार पर माथा टेक मांगीं मन्नतें
Fri, 27 Jun 2025 02:40 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Fri, 27 Jun 2025 02:40 AM IST
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बीएसएफ के अधिकारियों ने प्रबंधकों के साथ चढ़ाई चादर
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट बाबा दलीप सिंह मन्हास की मजार पर वीरवार को मेला लगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा की मजार पर माथा टेक कर मन्नतें मांगीं। मेले में जम्मू कश्मीर के अतिरिक्त बाहरी राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे थे।
बीएसएफ के अधिकारियों ने स्थानीय प्रबंधकों के साथ चादर चढ़ाई। मजार पर माथा टेकने वालों की लंबी लाइन लगी। पंजाब के गुरदास पुर से पहुंचीं रजनी ने कहा कि उन्हें चंबल रोग हो गया था। किसी ने बताया कि बाबा की मजार के पास शक्कर शरबत से चंबल का रोग ठीक हो जाता है। तीन वर्ष पहले आए थे। अब बिलकुल स्वस्थ हैं और मन्नत चढ़ाने आए हैं। साथ में दो परिवार और भी आए हैं, जिन्हें उक्त रोग है। वह भी शक्कर शरबत लेने आए हैं। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश प्रधान सत शर्मा, विधायक डॉ. देवेंद्र मन्याल, हीरानगर के विधायक विजय शर्मा, बाबा चमलियाल प्रबंधक कमेटी के बिल्लू चौधरी ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने रस्म की।
बाक्स
बाबा दलीप सिंह मन्हास हिंदू संत थे। पहले दग क्षेत्र में मुसलमानों की आबादी अधिक थी। इस कारण बाबा की मजार बना दी गई। पहले पाकिस्तान से भी श्रद्धालु बाबा की मजार पर आकर चादर चढ़ाते थे। दोनों देशों के बीच युद्ध के बाद पाकिस्तानी श्रद्धालुओं का मजार पर आना बंद हो गया। बाद में पाक रेंजर्स अधिकारियों व बीएसएफ के अधिकारियों के मध्य जीरो लाइन पर बैठक होती थी। पाकिस्तान के श्रद्धालु पाकिस्तानी रेंजर्स को चादर देते थे व रेंजर्स बीएसएफ अधिकारियों को चादर सौंपते थे। वर्ष 2018 में पाकिस्तानी रेंजर्स ने बीएसएफ के जवानों को शहीद कर दिया था। उसके बाद पाकिस्तान के श्रद्धालुओं को शक्कर शरबत देना बंद कर दिया गया।
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बाक्स
पाकिस्तानी श्रद्धालु साल भर करते थे इंतजार
कहते हैं कि बाबा की दरगाह से शक्कर शरबत को मिलाकर उसे 21 दिनों तक शरीर पर लगाने से पुराने से पुराने चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। इसमें परहेज जरूरी होता है। दूरदराज के लोग मजार पर पहुंच कर शक्कर शरबत अपने साथ ले जाते हैं। इसी को देखते हुए पाकिस्तानी श्रद्धालु भी साल भर शक्कर शरबत के लिए इंतजार करते थे।
बाक्स
मजार परिसर में कलाकारों ने जमाया रंग
वीरवार को बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। दग गांव से ही दुकानें सजाई गई थीं। लोगों के मनोरंजन के लिए झूले व अन्य सामान उपलब्ध थे। मार्ग के दोनों ओर विभिन्न प्रकार की दुकानें थीं। माथा टेकने के बाद लोगों ने मनपसंद खरीदारी की। जिला प्रशासन की ओर से भी विभिन्न प्रकार स्टाल लगाए गए थे। मजार परिसर में कलाकारों ने भी रंग जमाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट बाबा दलीप सिंह मन्हास की मजार पर वीरवार को मेला लगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा की मजार पर माथा टेक कर मन्नतें मांगीं। मेले में जम्मू कश्मीर के अतिरिक्त बाहरी राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे थे।
बीएसएफ के अधिकारियों ने स्थानीय प्रबंधकों के साथ चादर चढ़ाई। मजार पर माथा टेकने वालों की लंबी लाइन लगी। पंजाब के गुरदास पुर से पहुंचीं रजनी ने कहा कि उन्हें चंबल रोग हो गया था। किसी ने बताया कि बाबा की मजार के पास शक्कर शरबत से चंबल का रोग ठीक हो जाता है। तीन वर्ष पहले आए थे। अब बिलकुल स्वस्थ हैं और मन्नत चढ़ाने आए हैं। साथ में दो परिवार और भी आए हैं, जिन्हें उक्त रोग है। वह भी शक्कर शरबत लेने आए हैं। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश प्रधान सत शर्मा, विधायक डॉ. देवेंद्र मन्याल, हीरानगर के विधायक विजय शर्मा, बाबा चमलियाल प्रबंधक कमेटी के बिल्लू चौधरी ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने रस्म की।
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बाबा दलीप सिंह मन्हास हिंदू संत थे। पहले दग क्षेत्र में मुसलमानों की आबादी अधिक थी। इस कारण बाबा की मजार बना दी गई। पहले पाकिस्तान से भी श्रद्धालु बाबा की मजार पर आकर चादर चढ़ाते थे। दोनों देशों के बीच युद्ध के बाद पाकिस्तानी श्रद्धालुओं का मजार पर आना बंद हो गया। बाद में पाक रेंजर्स अधिकारियों व बीएसएफ के अधिकारियों के मध्य जीरो लाइन पर बैठक होती थी। पाकिस्तान के श्रद्धालु पाकिस्तानी रेंजर्स को चादर देते थे व रेंजर्स बीएसएफ अधिकारियों को चादर सौंपते थे। वर्ष 2018 में पाकिस्तानी रेंजर्स ने बीएसएफ के जवानों को शहीद कर दिया था। उसके बाद पाकिस्तान के श्रद्धालुओं को शक्कर शरबत देना बंद कर दिया गया।
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पाकिस्तानी श्रद्धालु साल भर करते थे इंतजार
कहते हैं कि बाबा की दरगाह से शक्कर शरबत को मिलाकर उसे 21 दिनों तक शरीर पर लगाने से पुराने से पुराने चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। इसमें परहेज जरूरी होता है। दूरदराज के लोग मजार पर पहुंच कर शक्कर शरबत अपने साथ ले जाते हैं। इसी को देखते हुए पाकिस्तानी श्रद्धालु भी साल भर शक्कर शरबत के लिए इंतजार करते थे।
बाक्स
मजार परिसर में कलाकारों ने जमाया रंग
वीरवार को बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई। दग गांव से ही दुकानें सजाई गई थीं। लोगों के मनोरंजन के लिए झूले व अन्य सामान उपलब्ध थे। मार्ग के दोनों ओर विभिन्न प्रकार की दुकानें थीं। माथा टेकने के बाद लोगों ने मनपसंद खरीदारी की। जिला प्रशासन की ओर से भी विभिन्न प्रकार स्टाल लगाए गए थे। मजार परिसर में कलाकारों ने भी रंग जमाया।