खुलासा: कश्मीर में फर्जी पहचान पत्र से सुरक्षाबलों को चकमा दे रहे हैं आतंकी
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घाटी में सक्रिय आतंकी फर्जी पहचान पत्र के जरिये सुरक्षा बलों को चकमा दे रहे हैं। तलाशी अभियान के दौरान धूल झोंकने के लिए फर्जी पहचान पत्र का सहारा लिया जा रहा है, ताकि सुरक्षा बलों से आसानी से निपटा जा सके, लेकिन यह सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई है।
कुलगाम में शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए लश्कर आतंकी फैयाज अहमद अशवर उर्फ सेठा के पास भी तलाशी के दौरान फर्जी पहचान पत्र मिला है। घाटी में सक्रिय विदेशी आतंकियों के पास से आधार कार्ड तथा वोटर कार्ड भी बरामद हो चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि कुलगाम में मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकी के पास साकिब गनेई के नाम का परिचय पत्र बरामद हुआ था। काफी देर तक पुलिस आतंकी के परिचय को लेकर ही उलझी रही। बाद में वांछित लश्कर आतंकी सेठा के रूप में शिनाख्त होने पर देर रात पुलिस ने इसका खुलासा किया।
परिचय पत्र से ही होती है शिनाख्त
छह अगस्त 2015 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर उधमपुर के नरसू नाले इलाके में बीएसएफ की कानवाई पर हमले मामले में एनआईए को इसकी तलाश थी। एनआईए ने इसे भगोड़ा घोषित करते हुए दो लाख रुपये का इनाम रखा था।
सुरक्षा बलों का कहना है कि तलाशी अभियान के दौरान परिचय पत्र के आधार पर ही शिनाख्त की जाती है। ऐसे में फर्जी पहचान पत्र होने से पहचान करने में दिक्कतें आती हैं। वर्ष 2016 में बारामुला से जैश का पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल रहमान आधार कार्ड के साथ पकड़ा जा चुका है।
आधार कार्ड मिलने से सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आई थीं। वह जैश में युवाओं की भर्ती के लिए काम कर रहा था। आतंकियों को फर्जी वोटर कार्ड उपलब्ध कराने की मिलीभगत का 2008 में भी पर्दाफाश हो चुका है। तब फर्जी वोटर कार्ड बनाने वाले कर्मचारी को निलंबित किया गया था।
फर्जी पहचान पत्र रखने की हिदायत
सुरक्षा बलों के पास इस बात के इनपुट हैं कि आतंकी तंजीमों के आका तथा आईएसआई की ओर से आतंकियों को इस बात की खास हिदायत दी जाती है कि वे अपने पास फर्जी पहचान पत्र ही रखें, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे और आसानी से शिनाख्त न हो सके। कई बार आतंकी फर्जी परिचय पत्र से ही मौके से चकमा देकर भाग निकलते रहे हैं।