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आतंकवादी सिर्फ जम्मू में ही नहीं, बारामुला भी संवेदनशील: एसएसपी
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जिले के 100 परिवार एलओसी पार रहने वाले रिश्तेदारों के जरिये नशा तस्करी या घुसपैठियों की मदद करने में पाए गए शामिल
कहा- पांच परिवार प्रतिबंधित पदार्थ, हथियारों की तस्करी या घुसपैठ में मदद करने में सक्रिय रूप से शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। आतंकी सिर्फ जम्मू में ही हैं, ऐसा नहीं है। बारामुला जिला भी संवेदनशील है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) से निकटता के कारण यहां भी आतंकी गतिविधियों के बारे में सूचनाएं मिलती रहती हैं। सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ये बातें उत्तरी कश्मीर के बारामुला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गुरिंदरपाल सिंह ने वीरवार को कहीं। उन्होंने कहा कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि सुरक्षा बल सतर्क हैं।
एसएसपी सिंह ने कहा कि हमने चौकसी कम नहीं की है। न ही मौजूद आतंकियों को पकड़ने के प्रयासों में कमी की है। सुरक्षा एजेंसियां समन्वय से काम कर रही हैं। आतंकवादियों को पकड़ने और किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए 100 प्रतिशत तालमेल और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। सुरक्षा बलों ने मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। उन्होंने खुलासा किया कि जिले में करीब 1,600 परिवार हैं, जिनके रिश्तेदार एलओसी के पार रहते हैं। उनमें से करीब 100 परिवार नशा तस्करी या घुसपैठियों की मदद करने में किसी न किसी स्तर पर शामिल पाए गए हैं।
एसएसपी ने कहा, हम इन परिवारों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। 100 में से पांच की पहचान प्रतिबंधित पदार्थ, हथियारों की तस्करी या घुसपैठ में मदद करने में सक्रिय रूप से शामिल होने के रूप में की गई है। हमने उनके खिलाफ मामले दर्ज कर लिए हैं। उनकी संपत्तियां जब्त की जा रही हैं। उन्होंने उक्त लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, एलओसी के पार रिश्तेदारों के साथ संबंध और बातचीत करना ठीक है। लेकिन अवैध गतिविधियों में शामिल होने या मदद करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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एसएसपी ने कहा कि शुरुआती चरण में ड्रग्स की आमद को रोकने के लिए इनपुट के आधार पर जरूरी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस आतंकवाद और नार्को-आतंकवाद दोनों से निपटने के लिए जीरो-टॉलरेंस के दृष्टिकोण के साथ प्रतिबद्ध है।
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कहा- पांच परिवार प्रतिबंधित पदार्थ, हथियारों की तस्करी या घुसपैठ में मदद करने में सक्रिय रूप से शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। आतंकी सिर्फ जम्मू में ही हैं, ऐसा नहीं है। बारामुला जिला भी संवेदनशील है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) से निकटता के कारण यहां भी आतंकी गतिविधियों के बारे में सूचनाएं मिलती रहती हैं। सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ये बातें उत्तरी कश्मीर के बारामुला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गुरिंदरपाल सिंह ने वीरवार को कहीं। उन्होंने कहा कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि सुरक्षा बल सतर्क हैं।
एसएसपी सिंह ने कहा कि हमने चौकसी कम नहीं की है। न ही मौजूद आतंकियों को पकड़ने के प्रयासों में कमी की है। सुरक्षा एजेंसियां समन्वय से काम कर रही हैं। आतंकवादियों को पकड़ने और किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए 100 प्रतिशत तालमेल और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। सुरक्षा बलों ने मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। उन्होंने खुलासा किया कि जिले में करीब 1,600 परिवार हैं, जिनके रिश्तेदार एलओसी के पार रहते हैं। उनमें से करीब 100 परिवार नशा तस्करी या घुसपैठियों की मदद करने में किसी न किसी स्तर पर शामिल पाए गए हैं।
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एसएसपी ने कहा, हम इन परिवारों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। 100 में से पांच की पहचान प्रतिबंधित पदार्थ, हथियारों की तस्करी या घुसपैठ में मदद करने में सक्रिय रूप से शामिल होने के रूप में की गई है। हमने उनके खिलाफ मामले दर्ज कर लिए हैं। उनकी संपत्तियां जब्त की जा रही हैं। उन्होंने उक्त लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, एलओसी के पार रिश्तेदारों के साथ संबंध और बातचीत करना ठीक है। लेकिन अवैध गतिविधियों में शामिल होने या मदद करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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एसएसपी ने कहा कि शुरुआती चरण में ड्रग्स की आमद को रोकने के लिए इनपुट के आधार पर जरूरी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला पुलिस आतंकवाद और नार्को-आतंकवाद दोनों से निपटने के लिए जीरो-टॉलरेंस के दृष्टिकोण के साथ प्रतिबद्ध है।