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Terrorist Attack : कत्लेआम से पर्यटक सहमे, आंसुओं का सैलाब; घाटी का हर बाशिंदा 'फिर लंबी सजा' से आशंकित
Thu, 24 Apr 2025 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
महेंद्र तिवारी
महेंद्र तिवारी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Apr 2025 05:42 AM IST
सार
घाटी से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार (2003 में नदिमार्ग में आतंकियों ने 24 कश्मीरी पंडितों को लाइन में खड़ाकर गोलियां मार दी थीं) और पुलवामा में सुरक्षाबलों पर हमले (40 सीआरपीएफ जवान बलिदान हुए थे) से लेकर आए दिन होने वाली अनेक आतंकी दुस्साहस लोगों ने देखे हैं।
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फाजिलनगर में पहलगाम घटना के विरोध में जनाक्रोश रैली निकालते लोग। संवाद
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में आतंकी नरसंहार नया नहीं है। घाटी से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार (2003 में नदिमार्ग में आतंकियों ने 24 कश्मीरी पंडितों को लाइन में खड़ाकर गोलियां मार दी थीं) और पुलवामा में सुरक्षाबलों पर हमले (40 सीआरपीएफ जवान बलिदान हुए थे) से लेकर आए दिन होने वाली अनेक आतंकी दुस्साहस लोगों ने देखे हैं।
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चुन-चुनकर हिंदुओं को गोलियों का शिकार बनाते देखा है। आतंकी घटनाओं की कीमत स्थानीय हिंदुओं से लेकर तमाम मुस्लिम परिवारों ने चुकाई है। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार शपथ के दिन शिवखोड़ी से लौट रहे श्रद्धालुओं के बस पर आतंकी हमले के जख्म आज तक लोगों के जेहन में हैं।
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लेकिन, पहलगाम में आतंकियों ने देश-दुनिया के पर्यटकों के साथ जो हैवानियत भरा कृत्य (26 पर्यटकों की हत्या) किया है, उससे पूरा जम्मू-कश्मीर रो रहा है। ऐसा रो रहा है, जैसा पहले शायद ही कभी रोया हो। इसकी कीमत घाटी को सालों तक चुकानी पड़ेगी। इसकी भरपाई आसान नहीं है।
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घटना के दूसरे दिन जम्मू से पहलगाम की ओर बढ़ने पर सूनी सड़कों और सांय-सांय करतीं सुरम्य वादियों के बीच कहीं कोई नजर आता है, तो काफी अंतराल के बीच फर्राटा भरता कोई वाहन। ज्यादातर वाहन मिलिट्री अथवा पुलिस के हैं या स्थानीय लोगों के। कस्बों के आसपास गुस्से व गमजदा लोगों का समूह पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाता, निंदा करता, आक्रोश जताता दिख जाता है। लेकिन, किसी से भी कोई सवाल करता है, तो अजनबी होने पर मुंह फेर कर चल देते हैं।
चहकने लगी थीं वादियां, पढ़ने लगे थे बच्चे...आने लगा था पैसा
कटड़ा से पहले एनएच पर करीब 60 साल के बुजुर्ग रिजवान से मुलाकात हुई। चिनैनी से अपने रिश्तेदारी में जा रहे रिजवान कहते हैं कि पाकिस्तान कश्मीरियों की वकालत का राग अलापता रहता है। उसे पूरी शिद्दत के साथ पता है कि आम कश्मीरियों की रोजी-रोटी दुनिया भर से आने वाले सैलानियों से होने वाली कमाई से चलती है। एक वक्त था जब अलगाववादियों के हुक्म पर घाटी में 10-10,15-15 दिन दुकानें बंद रहती थीं।
घाटी के ज्यादातर इलाकों में अक्सर बाहर बवाल रहता था तो घरों के भीतर मरघटी सन्नाटा। एक पीढ़ी बिना अच्छी पढ़ाई के निकल गई। पिछले पांच-छह सालों में जो सबसे बढ़िया हुआ था, वह यही कि यहां सैलानियों ने आना शुरू कर दिया था। रिकॉर्ड सैलानी आ रहे थे। छोटे-छोटे स्पॉट सैलानियों से भर गए थे। इधर सब गुलजार हो गया था। घरों में पैसा आने लगा था।
घाटी के कोने-कोने में वादियां चहकने लगी थीं। बच्चे स्कूल जाने लगे थे। पढ़ने लगे थे। पाकिस्तान ने इस कायराना हरकत से कश्मीरियों के पेट पर लात मारने का काम किया है। अब घाटी में सैलानी नहीं आएंगे। सैलानी नहीं आए तो फिर दुर्दिन के दिन शुरू हो जाएंगे। हमने हर तरह के दिन देखे हैं। अब इस तरह के दिन नहीं देखना चाहता था।
पर्यटक बोले...स्थानीय लोगों के समर्थन के बिना संभव नहीं हमला
इसी एनएच पर वैष्णो देवी आधार शिविर की ओर मुड़ने से पहले एक पर्यटक पंकज सलाथिया मिल गए। करीब 29 साल के पंकज बहुत गुस्से में हैं। कहते हैं कि केंद्र में जो भी सरकार आती है, सिर्फ घाटी पर कृपा बरसाती है। सारे जतन कि दुनिया के सैलानी कश्मीर की घाटियों में जाएं। वे वहां खर्च करें और कश्मीरियों की हालत बदले। लेकिन, हुआ क्या?
घाटी के तमाम लोग सैलानियों के पैसों पर पलते हैं और जब पैसा हो जाता है तब उन्हीं में से कई सैलानियों का कत्ल कराते हैं। उनका धर्म पूछकर, नंगा करके, जबरन कलमा पढ़ाने की हरकत करके उन्हें मौत के घाट उतारते हैं। पंकज यह मानने को तैयार नहीं हैं कि इस घटना से स्थानीय लोगों को कोई लेना-देना नहीं है। वह कहते हैं कि ऐसी घटना तब तक हो ही नहीं सकती जब तक स्थानीय लोगों की मुखबिरी न हो। ओवर ग्राउंड वर्कर का समर्थन न मिलता हो।
पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा
जम्मू से पहलगाम की ओर बढ़ने पर सैलानियों व श्रद्धालुओं का बड़ा जमघट वैष्णो देवी कटड़ा में रहता है। यहां हर वक्त हजारों की संख्या में श्रद्धालु रहते हैं। आज कटड़ा में गिनती के लोग नजर आ रहे हैं। दुकानें बंद हैं और स्थानीय लोग पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। माता के दर्शन के लिए आए विपिन कुमार कहते हैं कि पहलगाम की घटना ने रोंगटे खड़े कर दिए हैं।
Pahalgam Terror Attack: खामोश पहलगाम... सड़कों पर सन्नाटा, वादियों की रौनक गायब; हमले के बाद कैसे हैं हालात?
सैलानी सदमे में, स्थानीय लोग जीविका छिनने की आशंका से बेचैन : पहलगाम की घटना के खिलाफ जम्मू से श्रीनगर तक और अनंतनाग से पुलवामा, पांपोर, रियासी, डोडा, किश्तवाड़ तक एक जैसा माहौल नजर आ रहा है। साथी बताते हैं कि सैलानी सदमे में हैं तो स्थानीय लोग अपनी जीविका छिनने की आशंका में बेचैन नजर आ रहे हैं। लेकिन, सबकी चाह एक ही है कि इस बार हिसाब कुछ ऐसा होना चाहिए आगे पाकिस्तान व आतंकी कभी ऐसा दुस्साहस न कर पाएं।
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