जम्मू। आतंकी हमले में मारे गए शिक्षक दीपक चंद पिछले कुछ दिन से कश्मीर में होने वाले आतंकी हमलों को लेकर परेशान थे। दीपक ने अपनी मां से बात करते हुए कहा था कि जिस तरह से कश्मीरी पंडितों को मारा जा रहा है, वह उससे दुखी है। दीपक की मौत से उसका पूरा परिवार आंसुओं के सैलाब में डूब चुका है। परिवार ने यहां तक कहा है कि कश्मीर हमारे लिए जन्नत नहीं, नर्क बन गया है।
दीपक का परिवार मूल रूप से कश्मीर का रहने वाला है। 1990 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद ने पैर जमाए तो दीपक का परिवार विस्थापित होकर जम्मू आ गया। 2019 में केंद्र सरकार ने पीएम पैकेज के तहत कश्मीरी विस्थापितों के लिए शिक्षकों के पद की भर्ती की। इसी में दीपक की नियुक्ति भी हुई और उसकी पोस्टिंग कश्मीर हो गई। उसकी पत्नी और तीन साल की बच्ची भी उसके साथ रहती थीं। एक हफ्ता पहले ही दीपक अपने जम्मू के रिहाड़ी स्थित घर आया था। पिता की पहली बरसी पर घर आए दीपक ने पत्नी और बच्ची को घर पर ही छोड़ दिया था। कहा कि अब कश्मीर में काफी ठंड बढ़ जाएगी, इसलिए वह अब जम्मू में ही रहें। दीपक की मां का कहना है कि तीन दिन पहले दीपक ने फोन किया था। मैंने पूछा कि कुछ परेशान लग रहा है, तो उसने कहा था कि वह कश्मीर में होने वाली हत्याओं को लेकर परेशान है। दीपक की पत्नी अराधना ने बताया कि हत्या से पहले उनसे वीडियो कॉल पर बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि करवा चौथ पर घर आएंगे। दीपक की मौत की सूचना मिलते ही भाई कमल शव लेने कश्मीर रवाना हो गए। शुक्रवार को दीपक का अंतिम संस्कार किया जाएगा।