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अदालत का समय बर्बाद करने पर लगाया दस हजार रुपये का जुर्माना

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Ten thousand rupees fine for wasting court time
जम्मू। हाईकोर्ट ने एक अपीलकर्ता को ओछा मुकदमा करने के आरोप में दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। बुधवार को प्रोफेसर अब्दुल गनी भट्ट की अर्जी को खारिज करते हुए जस्टिस संजीव कुमार और विनोद चटर्जी कौल वाली खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। साथ ही कहा कि जुर्माना जमा न करने पर इसे अवमानना माना जाएगा।
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कोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता से कहा गया था कि वे प्रतिवादी को मामले के संबंध में सूचित करे। वर्ष 2017 में इस बाबत नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद इस मामले को कई मौकों पर सूचीबद्ध किया गया, लेकिन अपीलकर्ता ने कोर्ट के निर्देश पर अमल नहीं किया। नवंबर 2018 को अपीलकर्ता को एक और समय दिया गया था। बुधवार को पेश हुए अपीलकर्ता ने कोर्ट में कहा कि प्रतिवादी तक सूचना पहुंचाना अदालत का काम है, अपीलकर्ता का नहीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि पढ़े लिखे अपीलकर्ता का यह आचरण आपत्तिजनक है। इसके अलावा सीआरपीसी की धारा 476 के तहत की गई अपील का कोई औचित्य भी नहीं है। सारे तथ्य सही भी मान लिए जाएं तो भी यह अपील ओछी और अदालत का वक्त बर्बाद करने वाली है। लिहाजा अपील खारिज कर अपीलकर्ता को 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। खंडपीठ ने इस मामले में रिट कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। जेएनएफ
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