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दस महीने बाद राजकाज का नया रोडमैप
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जम्मू। नए जम्मू-कश्मीर के लिए केंद्र सरकार ने राज्य पुनर्गठन के करीब 10 महीने बाद राजकाज का नया रोडमैप दिखाया है। इसके लिए नियम जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन का पारदर्शी तरीके से किस प्रकार संचालन किया जाएगा। कौन से काम किसके अधिकार क्षेत्र में होंगे। नई व्यवस्था से प्रदेश में कामकाज का नया रास्ता दिखा है। इससे सभी काम सुचारु तरीके से संपादित हो सकेंगे।
नए नियमों में सरकार गठन के बाद का भी रोडमैप तय किया गया है। इसके तहत बताया गया है कि मंत्रि परिषद किस तरह से काम करेगी। नए नियम के अनुसार मुख्य सचिव मंत्रि परिषद का सचिव होगा। उप राज्यपाल के प्रधान सचिव या सचिव परिषद का संयुक्त सचिव होगा। यदि सचिव अनुपस्थित हो तो संयुक्त सचिव उसके दायित्वों का निवर्हन करेगा। यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री किसी भी प्रस्ताव को परिचालित (बाई सर्कुलेशन) करने को कह सकते हैं। इसके लिए सभी मंत्रियों की सर्वसम्मति तथा मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी है। जिस विभाग से संबंधित प्रस्ताव होगा वह विभाग प्रस्ताव के तथ्यों, निर्णयों के बिंदु व प्रभारी मंत्री की सिफारिश के साथ नोट तैयार कर उसे परिषद के सचिव के पास भेजेगा। वह मंत्रियों से इसे परिचालित कराने के साथ उसकी प्रति उप राज्यपाल को भेजेगा। मंत्रि परिषद का एजेंडा दो दिन पहले मंत्रियों को भेजा जाएगा। किसी विशेष स्थिति में इस अवधि को कम किया जा सकता है।
प्रदेश में होंगे 39 विभाग
मंत्रालय की ओर से जारी गजट के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में 39 विभाग होंगे। इनमें सामान्य प्रशासन, गृह, स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा, ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, परिवहन, कृषि उत्पादन व किसान कल्याण, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खनन, हार्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर, चुनाव, प्रशासनिक सुधार व शिकायत, जनजातीय कार्य, पशु-भेड़पालन व मत्स्य पालन, नागर विमानन, संस्कृति, सहकारिता, युवा सेवाएं व खेल, कौशल विकास, खाद्य सिविल आपूर्ति व सार्वजनिक मामले, आतिथ्य एवं प्रोटोकॉल, वन-पारिस्थितकीय एवं पर्यावरण, आवास व शहरी विकास, उद्योग व वाणिज्य, सूचना, सूचना प्रौद्योगिकी, श्रम व रोजगार, विधि न्याय व संसदीय कार्य, योजना विकास, जल शक्ति, राजस्व, ग्रामीण विकास व पंचायती राज, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, समाज कल्याण, पर्यटन, आपदा प्रबंधन-राहत पुनर्वास व पुनर्निर्माण शामिल हैं।
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नए नियमों में सरकार गठन के बाद का भी रोडमैप तय किया गया है। इसके तहत बताया गया है कि मंत्रि परिषद किस तरह से काम करेगी। नए नियम के अनुसार मुख्य सचिव मंत्रि परिषद का सचिव होगा। उप राज्यपाल के प्रधान सचिव या सचिव परिषद का संयुक्त सचिव होगा। यदि सचिव अनुपस्थित हो तो संयुक्त सचिव उसके दायित्वों का निवर्हन करेगा। यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री किसी भी प्रस्ताव को परिचालित (बाई सर्कुलेशन) करने को कह सकते हैं। इसके लिए सभी मंत्रियों की सर्वसम्मति तथा मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी है। जिस विभाग से संबंधित प्रस्ताव होगा वह विभाग प्रस्ताव के तथ्यों, निर्णयों के बिंदु व प्रभारी मंत्री की सिफारिश के साथ नोट तैयार कर उसे परिषद के सचिव के पास भेजेगा। वह मंत्रियों से इसे परिचालित कराने के साथ उसकी प्रति उप राज्यपाल को भेजेगा। मंत्रि परिषद का एजेंडा दो दिन पहले मंत्रियों को भेजा जाएगा। किसी विशेष स्थिति में इस अवधि को कम किया जा सकता है।
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प्रदेश में होंगे 39 विभाग
मंत्रालय की ओर से जारी गजट के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में 39 विभाग होंगे। इनमें सामान्य प्रशासन, गृह, स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा, ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, परिवहन, कृषि उत्पादन व किसान कल्याण, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खनन, हार्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर, चुनाव, प्रशासनिक सुधार व शिकायत, जनजातीय कार्य, पशु-भेड़पालन व मत्स्य पालन, नागर विमानन, संस्कृति, सहकारिता, युवा सेवाएं व खेल, कौशल विकास, खाद्य सिविल आपूर्ति व सार्वजनिक मामले, आतिथ्य एवं प्रोटोकॉल, वन-पारिस्थितकीय एवं पर्यावरण, आवास व शहरी विकास, उद्योग व वाणिज्य, सूचना, सूचना प्रौद्योगिकी, श्रम व रोजगार, विधि न्याय व संसदीय कार्य, योजना विकास, जल शक्ति, राजस्व, ग्रामीण विकास व पंचायती राज, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, समाज कल्याण, पर्यटन, आपदा प्रबंधन-राहत पुनर्वास व पुनर्निर्माण शामिल हैं।
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