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पांच माह बाद खुले मंदिर, सामाजिक दूरी का पालन कर भक्तों ने किए दर्शन
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जम्मू। शहर में पांच महीने बाद रविवार से मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल आम लोगों के लिए खोल दिए गए। जम्मू शहर में वीकेंड लॉकडाउन होने के कारण पहले दिन धार्मिक स्थलों पर कम संख्या में ही लोग पहुंचे, हालांकि सोमवार से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के आसार हैं।
शहर में प्रसिद्ध बावे वाली माता मंदिर, रघुनाथ मंदिर, रणवीरेश्वर मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, आप शंभू, इस्कॉन सहित अन्य मंदिरों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भक्तों ने माथा टेका और सुख-समृद्धि की कामना की। सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन करते हुए मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग और 10 साल से कम आयु के बच्चों को प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई।
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मंदिरों में थर्मल स्क्रीनिग के साथ सैनिटाइजिंग की व्यवस्था
शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में एक बावे वाली माता मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुल गए थे। सुबह दस बजे के बाद मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, हालांकि लॉकडाउन के कारण पहले दिन इक्का-दुक्का श्रद्धालु ही पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उनकी यात्रा हिस्ट्री दर्ज करने के साथ थर्मल स्क्रीनिंग और हाथों को सैनिटाइज करने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करवाने के लिए सर्कल बनाए गए हैं। महंत बिट्टा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन किया जा रहा है। बिना मास्क वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है।
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शहर के रणवीरेश्वर, रघुनाथ और पक्का डंगा महालक्ष्मी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के लिए हाथ साफ करने को सैनिटाइजर और सामाजिक दूरी बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। धर्मार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष मुबारक सिंह ने कहा कि ट्रस्ट की तरफ से अपने सभी मंदिरों में एसओपी का पालन किया जा रहा है। पहले दिन कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं, लेकिन अब सोमवार से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के आसार हैं।
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नहीं दिया जा रहा प्रसाद
कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए मंदिर में प्रसाद नहीं दिया जा रहा है। न ही फूल, चुनरी इत्यादि चढ़ा सकते हैं। मंदिरों में लगी घंटियों पर कपड़ा बांधा गया है ताकि श्रद्धालु इसे छू न सकें। इस दौरान मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।
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इन नियमों का करना होगा पालन
मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था है। प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के बीच कम से कम 6 फुट की दूरी बनाए रखने के लिए सर्कल बनाए हैं। मास्क लगाना और चेहरे को ढकना अनिवार्य है। साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोने के 20 सेकेंड बाद ही आगे बढ़ने दिया जा रहा है। मोबाइल पर अयोग्य सेतु एप डाउनलोड करना जरूरी है। मंदिर की मूर्तियों और ग्रंथों समेत किसी भी चीज को छूने की इजाजत नहीं है।
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दिन की अंतिम नमाज के बाद सैनिटाजि हो रही मस्जिद
शहर में चर्च और मस्जिदों में भी कम लोग पहुंचे। मस्जिदों में सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए टीम गठित की गई है। साथ ही मस्जिदों के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। बावे वाली गली में मौजूद जामिया मस्जिद के इमाम कारी मोहम्मद अकरम ने कहा कि पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। एसओपी का सख्ती से पालन किया जाएगा। नमाज पढ़ने वाले के बीच छह फुट की दूरी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिन की अंतिम नमाज के बाद मस्जिद और परिसर को सैनिटाइज किया जा रहा है।
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शहर में प्रसिद्ध बावे वाली माता मंदिर, रघुनाथ मंदिर, रणवीरेश्वर मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, आप शंभू, इस्कॉन सहित अन्य मंदिरों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भक्तों ने माथा टेका और सुख-समृद्धि की कामना की। सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन करते हुए मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग और 10 साल से कम आयु के बच्चों को प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई।
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मंदिरों में थर्मल स्क्रीनिग के साथ सैनिटाइजिंग की व्यवस्था
शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में एक बावे वाली माता मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुल गए थे। सुबह दस बजे के बाद मंदिर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, हालांकि लॉकडाउन के कारण पहले दिन इक्का-दुक्का श्रद्धालु ही पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उनकी यात्रा हिस्ट्री दर्ज करने के साथ थर्मल स्क्रीनिंग और हाथों को सैनिटाइज करने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करवाने के लिए सर्कल बनाए गए हैं। महंत बिट्टा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन किया जा रहा है। बिना मास्क वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है।
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शहर के रणवीरेश्वर, रघुनाथ और पक्का डंगा महालक्ष्मी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के लिए हाथ साफ करने को सैनिटाइजर और सामाजिक दूरी बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। धर्मार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष मुबारक सिंह ने कहा कि ट्रस्ट की तरफ से अपने सभी मंदिरों में एसओपी का पालन किया जा रहा है। पहले दिन कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं, लेकिन अब सोमवार से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के आसार हैं।
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नहीं दिया जा रहा प्रसाद
कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए मंदिर में प्रसाद नहीं दिया जा रहा है। न ही फूल, चुनरी इत्यादि चढ़ा सकते हैं। मंदिरों में लगी घंटियों पर कपड़ा बांधा गया है ताकि श्रद्धालु इसे छू न सकें। इस दौरान मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है।
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इन नियमों का करना होगा पालन
मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था है। प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के बीच कम से कम 6 फुट की दूरी बनाए रखने के लिए सर्कल बनाए हैं। मास्क लगाना और चेहरे को ढकना अनिवार्य है। साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोने के 20 सेकेंड बाद ही आगे बढ़ने दिया जा रहा है। मोबाइल पर अयोग्य सेतु एप डाउनलोड करना जरूरी है। मंदिर की मूर्तियों और ग्रंथों समेत किसी भी चीज को छूने की इजाजत नहीं है।
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दिन की अंतिम नमाज के बाद सैनिटाजि हो रही मस्जिद
शहर में चर्च और मस्जिदों में भी कम लोग पहुंचे। मस्जिदों में सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए टीम गठित की गई है। साथ ही मस्जिदों के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। बावे वाली गली में मौजूद जामिया मस्जिद के इमाम कारी मोहम्मद अकरम ने कहा कि पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। एसओपी का सख्ती से पालन किया जाएगा। नमाज पढ़ने वाले के बीच छह फुट की दूरी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिन की अंतिम नमाज के बाद मस्जिद और परिसर को सैनिटाइज किया जा रहा है।