शिक्षक चयन सूची निरस्त होने पर भी करते रहे नौकरी
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टीचर्स सेलेक्शन लिस्ट हाईकोर्ट द्वारा निरस्त करने के बाद भी तीन शिक्षकों को करीब दो वर्षों से भी अधिक समय तक वेतन देते रहने के मामले में संबंधित अधिकारी नपेंगे। वेतन के मद में जारी की गई लाखों रूपए की राशि को इन अधिकारियों से वसूला जाएगा।
मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय राजोरी ने इस बाबत तैयारी कर ली है। बाकायदा ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग आफिसरों की पहचान की गई है और सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई के लिए इन्हीं अफसरों का वेतन काटा जाएगा।
सीईओ राजोरी के अनुसार तीनों शिक्षकों को अवैध रुप से वेतन प्रदान करने के पीछे जेडईओ व स्कूल हेड मास्टर का ही हाथ है। दोनों अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर तीन शिक्षकों को अवैध रूप से नौकरी पर रखा और उन्हें अवैध रूप से वेतन भी देते रहे।
सीईओ ने कहा कि तीनों शिक्षकों को प्रदान किया गया वेतन अब जेडईओ व हेड मास्टर के वेतन से काटकर सरकारी खजाने में जमा किया जाएगा। इसके अलावा दोनों अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
नौ लाख रुपये का सरकारी खजाने को चूना
गौरतलब है कि नवंबर 2015 में मामला सीईओ राजोरी के नोटिस में आते ही उन्होंने जांच शुरू की गई। सीईओ राजोरी अल्ताफ हुसैन ने जांच के दौरान पाया था कि शिक्षा जोन लोवर हथल के तीन शिक्षक अशोक कुमार प्राइमरी स्कूल करमा, कस्तूरी लाल प्राइमरी स्कूल देवक और मोहम्मद अशरफ हाई स्कूल चल्लास सेलेक्शन लिस्ट निरस्त होने के बाद भी काम करते रहे।
इतना ही नहीं वे वेतन प्राप्त कर सरकारी खजाने को चूना भी लगाते रहे थे। सीईओ ने अपनी रिपोर्ट डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन को भेजी थी। जांच के दौरान पाया कि दो शिक्षकों अशोक कुमार और कस्तूरी लाल को अवैध रूप से वेतन देने के पीछे जेडईओ लोअर हथल रविंद्र शर्मा का हाथ है।
जबकि मोहम्मद अशरफ को वेतन प्रदान करने के पीछे हेड मास्टर हाई स्कूल चल्लास अखतर हुसैन का हाथ है। दोनों ही अधिकारी अपने अपने स्तर पर डीडीओ हैं। तीनों शिक्षकों ने करीब नौ लाख रुपये का सरकारी खजाने को चूना लगाया है।