Wonderland: ताजमहल से एफिल टॉवर तक, कबाड़ से गढ़ी गई दुनिया की खूबसूरत तस्वीर, जम्मू में खुला तवी वंडरलैंड
जम्मू में तवी वंडरलैंड के रूप में नया पर्यटन आकर्षण तैयार हुआ है, जहां कबाड़ और वेस्ट मटेरियल से दुनिया की मशहूर ऐतिहासिक इमारतों के लघु रूप बनाए गए हैं।
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कहा जाता है कि इतिहास सिर्फ पुरानी किताबों के पन्नों में दफ्न किस्से नहीं होता, बल्कि वह हमारी रूह में बहने वाली एक ऐसी धारा है जो हर दौर में हमें जीने का नया सलीका सिखाती है। मंदिरों की घंटियों की गूंज और आस्था की पावन पुनीत माटी से महकने वाला हमारा यह जम्मू, अब एक ऐसी अनूठी दास्तान लिखने जा रहा है जो सदियों तक आने वाली पीढ़ियों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ेगी। महानगर की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी से कोसों दूर, प्रकृति की गोद में पलता यह नया पर्यटन हब, मानो आसमान से उतरकर जमीन पर किसी खूबसूरत ख्वाब सा बिखर गया हो।
यह महज एक सैरगाह भर नहीं है, बल्कि इंसानी कल्पना और हुनर का वह जीवंत दस्तावेज है जो देखने वाले की पलकें झपकने नहीं देता। इस अद्भुत परिकल्पना की सबसे बड़ी और दिल को छू लेने वाली खूबी यह है कि यहां सजने वाले दुनिया भर के अजूबे किसी महंगे संगमरमर या सोने-चांदी से नहीं, बल्कि उस कबाड़ से गढ़े गए हैं जिसे दुनिया ने बेकार समझकर ठुकरा दिया था। जी हां, इंसानी हाथों के जादू और फनकारों की बेजोड़ कारीगरी ने लोहे के जंग लगे टुकड़ों और बेजान वेस्ट मटेरियल को एक ऐसी धड़कन दे दी है जो दिल और दिमाग दोनों को भीतर तक तरोताजा कर देती है।
जब आप इन कलाकृतियों के साए में कदम रखते हैं और इनके पीछे छिपे इतिहास को महसूस करते हैं, तो अतीत के वे सुनहरे झरोखे खुद-ब-खुद जीवंत हो उठते हैं। उस दौर के बेजोड़ शिल्प और दूरदर्शी सोच को देखकर आंखें फटी की फटी रह जाती हैं, और हर सांस के साथ अपने प्राचीन गौरव का अहसास शिद्दत से दिल को भिगो जाता है।
महज नौ महीनों के अल्पकाल में लगभग पांच एकड़ यानी दो लाख सत्रह हजार आठ सौ वर्ग फीट के विशाल भूभाग पर आकार लेने वाला यह तवी वंडरलैंड, नगर आयुक्त देवांश यादव के एक स्वप्निल और सृजनात्मक विजन का सजीव परिणाम है। ग्यारह करोड़ रुपए की लागत से संवारे गए इस कल्पनालोक को उत्तर प्रदेश के माटी से जुड़े कुशल शिल्पियों ने अपनी उंगलियों के हुनर से वह रूप दिया है कि देखने वाला देखता ही रह जाए। यहां कदम रखते ही दुनिया भर के महान स्थापत्य एक छत के नीचे मुस्कुराते नजर आते हैं।
महाराजा सवाई जय सिंह की गणितीय दृष्टि को बयां करता जंतर-मंतर हो, गुजरात के केवड़िया में आसमान छूती दुनिया की सबसे ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा यानी 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' हो, या फिर हवा के झोंकों से बातें करता मधुमक्खी के छत्ते के आकार का सत्रह सौ निन्यानवे का पांच मंजिला हवामहल हर कृति अपनी दास्तान खुद कहती है।
इस जादुई दायरे में कदम बढ़ाते ही सफर सरहदों की सीमाओं को लांघकर दुनिया के दूसरे कोनों तक पहुंच जाता है। सोलह सौ बानवे में खड़ी चट्टान पर तराशा गया भूटान का वह रहस्यमयी ताकसांग बौद्ध मठ हो, या बारहवीं सदी में खमेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन द्वारा निर्मित कंबोडिया का वह महाप्रतापशाली अंकोरवाट मंदिर जहां भगवान विष्णु के चरणों में पूरी कायनात झुकती सी प्रतीत होती है।
इसके अलावा पहली सदी की इंजीनियरिंग का नायाब नमूना रोम का एम्फीथिएटर, प्यार की अमर निशानी ताजमहल, कुतुब मीनार, एफिल टॉवर और व्हाइट हाउस जैसी विश्व प्रसिद्ध इमारतों के लघु रूप यहां के आबोहवा को पूरी तरह जादुई बना देते हैं। यहां की हर एक रचना बच्चों से लेकर बड़ों तक के भीतर छिपे खोजी मन को झकझोर देती है और रोमांच की एक अंतहीन दुनिया से रूबरू कराती है।
यदि आप आने वाले सप्ताहांत पर अपने परिवार और प्रियजनों के साथ किसी सुकून भरे सफर की तलाश में हैं, तो जम्मू का यह नया नंदनवन आपकी झोली में खुशियों के अनगिनत पल डालने के लिए तैयार है। जेब पर भी यह सैर बेहद हल्की और सुगम है। व्यस्कों के लिए मात्र अस्सी रुपये और बच्चों के लिए इसका आधा यानी चालीस रुपये का प्रवेश शुल्क रखा गया है, ताकि हर तबका इस खूबसूरती का दीदार कर सके। इसके साथ ही, सैर-सपाटे के दौरान आपके सफर को और भी जायकेदार बनाने के लिए परिसर के भीतर ही एक बेहतरीन कैंटीन की व्यवस्था भी मौजूद है, जहां आप लजीज व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।
जिंदगी की ऊब और थकान को अलविदा कहकर यदि आपके भीतर भी किसी अनजान रास्ते पर निकल पड़ने का शगल जिंदा है, तो जम्मू का यह नवीनतम डेस्टिनेशन आपको बाहें फैलाकर बुला रहा है। एक ही छत के नीचे इतिहास, कला और प्रकृति का ऐसा संगम शायद ही कहीं और देखने को मिले। आइए, इस खूबसूरत सफर का हिस्सा बनिए और अपनी यादों के पन्नों पर सुनहरे रंगों की एक ऐसी इबारत लिख जाइए जो बरसों-बरस आपकी रूह को गर्माहट देती रहे।