Jammu Kashmir: सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू का आरओ प्लांट खराब, डायलिसिस सेवा अचानक हो गई बंद..मरीज दरबदर
जम्मू के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में डायलिसिस सेवा बंद होने से मरीजों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। सरकारी अस्पताल में दिक्कत होने के कारण मरीजों को निजी अस्पताल में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
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जम्मू के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के नेफरोलाजी विभाग में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्लांट के खराब होने से डायलिसिस सेवा बंद है। मरीजों को एसएमजीएस अस्पताल और जीएमसी में भेजा जा रहा है। वहां भी सीमित मशीनें होने के कारण अधिकांश मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
हालांकि आयुष्मान सेहत योजना के तहत निजी अस्पतालों में डायलिसिस सेवा का प्रावधान है, लेकिन सभी मरीजों को फायदा नहीं मिल पा रहा। भीषण गर्मी में चक्कर काटने पर तीमारदारों के भी पसीने छूट रहे हैं। बताया जाता है कि 15 दिन से प्लांट खराब है।
विभाग में संभाग स्तर पर सबसे अधिक 18 मशीनें स्थापित हैं, जिसमें रोजाना तीन शिफ्ट में 35 से 40 मरीजों के डायलिसिस किए जाते हैं जबकि जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में सिर्फ दो-दो ही मशीनें हैं और यहां मुश्किल से 6 से 7 डायलिसिस होते हैं।
जिन मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में डायलिसिस सेवा बंद होने की जानकारी नहीं है, उनकी हालत और खराब हो रही है। सरकारी अस्पताल में सिर्फ डायलिसिस किट लानी पड़ती है जबकि निजी अस्पतालों में डायलिसिस के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
निजी अस्पताल से मजबूरी में करवाएंगे इलाज
नेफरोलॉजी विभाग में आए मरीज अवतार सिंह (60) निवासी विजयपुर ने बताया कि वह पहले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से डायलिसिस करवाते रहे। अब सेवा बंद है, इसलिए बुधवार को कर्णबाग स्थित निजी अस्पताल से डायलिसिस करवाएंगे। उन्होंने कहा - हैरानी की बात है कि डायलिसिस यूनिट में लंबे समय से आरओ खराब पड़ा है।
जमीनी स्तर पर चिकित्सा सेवाओं को सुनिश्चित बनाए सरकार
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीज को दिखाने पहुंचे इंद्रजीत सिंह ने कहा कि सरकारी अस्पताल में डायलिसिस सेवा बंद होने से खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर मरीज परेशान हैं। उन्हें सरकारी चिकित्सा सेवाओं का ही सहारा होता है, लेकिन यहां आकर ऐसी असुविधा मिलने पर दर्द और बढ़ जाता है। सरकार को जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण सेवाओं को सुनिश्चित बनाना चाहिए।
डायलिसिस सेवा चालू रहे
मरीज ने नाम न छापने पर बताया कि वह बिलावर में रेहड़ी लगाते हैं। किडनियां खराब होने के कारण डायलिसिस करवाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने उनके आग्रह को गंभीरता से लिया है। एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल में दोपहर को डायलिसिस के लिए भेजा है, लेकिन इस सेवा को बंद नहीं करना चाहिए।
जीएमसी में दोपहर को गए, रात को हुआ डायलिसिस
तीमारदार मूलराज ने बताया कि मरीज (जीजा) ज्ञान चंद निवासी मानसर को डायलिसिस करवाने के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लेकर गए, लेकिन जीएमसी में भेज दिया। वहां दोपहर दो बजे पहुंचे और रात 11ः30 बजे डायलिसिस हुआ। जम्मू में रहने का साधन भी नहीं था और आर्थिक कमजोर होने के कारण होटल में रहने के लिए सक्षम नहीं थे। किसी तरह दोस्त के यहां रात गुजारी।
ओवरलोड से व्यवस्था ने जवाब दिया
लंबे समय से आरओ प्लांट को ठीक न करवाने पर सवाल उठते हैं। सूत्रों ने बताया कि जिस आरओ प्लांट को लगाया था उसमें सामान्य तौर पर 12 से 14 डायलिसिस मशीनों को ही चलाया जा सकता है। इसके बावजूद 18 से 20 मशीनें तीन शिफ्ट में चलाई जा रही थीं, जिससे ओवरलोड होने के कारण उसने जवाब दे दिया।
नए आरओ प्लांट की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। मरीजों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर निजी क्लीनिकों में जाने को मजबूर किया जा रहा है।
आरओ प्लांट को दुरुस्त करने के लिए काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द चालू हो जाएगा। नया आरओ प्लांट खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है। फिलहाल मरीजों की सहूलियत के लिए उन्हें एसोसिएटेड अस्पतालों में भेजा जा रहा है।-
डॉ. मनोज चलोत्रा, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल