फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   story of hanumanthappa rescue operation

पायलट की जुबानी, हनुमंथप्पा के रेस्क्यू की कहानी

Thu, 11 Feb 2016 01:27 PM IST
Updated Thu, 11 Feb 2016 01:27 PM IST
विज्ञापन
story of hanumanthappa rescue operation

जीवन का एक चुनौती भरा अनुभव मिला। लेह से हेलीकाप्टर ने सियाचिन के लिए उड़ान भरी। उसमें में दो पायलट और मैं था। वहां हिमस्खलन वाले क्षेत्र से एकमात्र जिंदा मिले सैनिक को लेकर लौटना था।

विज्ञापन


हनुमंथप्पा को हेलीकाप्टर में नूबरा एयरपोर्ट लाया गया था। वहां से उन्हें एयर एंबुलेंस से सैन्य अस्पताल ले जाया गया। आरएमओ घटनास्थल पर ही लगातार हनुमंथप्पा पर रातभर नजर रख रहे थे। बचाव टीम रात के समय लगातार लापता सैनिकों को बचाने की हर कोशिश कर रही थी। लेकिन वीरवार को दोपहर हनुमंथप्पा की मौत हो गई।
विज्ञापन


बर्फीले तूफान और अंधेरे में हेलीकाप्टर के पायलट लगातार संकीर्ण पहाड़ों के बीच से उड़ान भर अपने साहस का परिचय देते रहे। कम रोशनी पायलटों के लिए चुनौती बनी हुई थी। अंतत: पायलट बर्फ के बीच छोटे से हेलीपैड में सफलतापूर्वक हेलीकाप्टर उतारने में कामयाब रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


चारों ओर बर्फ की चादर थी। सेना के जवान अपने कुत्तों के साथ बर्फ के गहरे गड्ढों में बार-बार तलाशी के लिए जा रहे थे। लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लग रही थी। अंतत: बर्फ के नीचे माइनस 50 डिग्री से नीचे तापमान में जमा देने वाले स्थल पर हनुमंथप्पा मिले।

झपकती आंखों को देखा तो एक आशा की किरण जगी

story of hanumanthappa rescue operation

एकबारगी तो उनकी पहचान मानव के रूप में नहीं हो रही थी। लेकिन उन्हें जब हेलीकाप्टर में डाला गया और मैंने उन्हें करीब से उनकी झपकती आंखों को देखा तो एक आशा की किरण जगी थी।

जैसे ही हमने नूबरा एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी, वहां पहले से एक अन्य एयर एंबुलेंस हमारा इंतजार कर रही थी, जिसमें दूसरी मेडिकल टीम जवान को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने के लिए तैयार बैठी थी।

सबसे कम तापमान के बीच विश्व की सबसे ऊंची चोटियों को पार करते समय हनुमंथप्पा मेरे सामने पड़े थे और मैं उन्हें बार-बार उम्मीद के साथ देख रहा था। हम सभी उन्हें किसी भी हाल में बचाना चाहते थे।

इसमें कोई संदेह नहीं कि उनमें अपने को बचाने के लिए संघर्ष की जो क्षमता नजर आई, वह अनोखी थी। इसके अलावा बचाव कार्य में लगे जवानों का हौसला बर्फीली चोटियों से भी ऊंचा था। सेना की वर्दी में बर्फ के बीच जुटे जवानों को मेरा सैल्यूट।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed