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Jammu News: आठ नए विदेशी परिदों को भाई जन्नत, वेटलैंड में कर रहे अठखेलियां
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सबसे ज्यादा प्रजातियां देखने को मिलीं वुलर झील में
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आर्द्रभूमि में प्रवासी पक्षियों का आगमन बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। एक प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ रेयान सोफी के अनुसार इस साल आठ नई प्रजातियां घाटी की शोभा बढ़ा रही हैं। होकरसर वेटलैंड में फाल्केटेड डक, वुलर झील में स्मू डक, हॉर्नड ग्रीब, वेस्टर्न रीफ-हेरॉन, लंबी पूंछ वाली बत्तख और वुलर झील में ब्रॉड-बिल्ड सैंडपाइपर व पहलगाम में नॉर्थेर्न व्हीटियर को देखा गया है।
ज्यादातर नई पक्षी प्रजातियां एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील में देखी गईं। कश्मीर में वन्यजीव संरक्षण कोष में वेटलैंड रिसर्च सेंटर के निदेशक परवेज यूसुफ ने बताया कि प्रवासी पक्षी मुख्य रूप से कश्मीर तक पहुंचने और अत्यधिक ठंड से बचने के लिए मध्य एशियाई फ्लाईवे का उपयोग करते हैं। अत्यधिक ठंडे से बर्फ की एक मोटी परत बन जाती है, जिससे पक्षियों को भोजन उपलब्ध नहीं होता है। इस कारण यह पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर कश्मीर जैसे स्थानों पर पहुंचते हैं।
पर्यटन विभाग की उप निदेशक दीबा खालिद ने बताया कि उपमहाद्वीप में पक्षियों की 1300 प्रजातियां हैं, जिनमें से 600 कश्मीर में पाई जाती हैं। उनमें से कई प्रवासी हैं। इनके संरक्षण के लिए जागरूकता की जरूरत है। गौरतलब रहे कि दुनिया में पक्षी पालन करोड़ों डॉलर का उद्योग है। पक्षी प्रेमी उन्हें निहारने के लिए दूसरे देशों से भी पहुंचते हैं। हमें उस क्षमता का भी दोहन करना होगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
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अक्तूबर के अंत से घाटी आना शुरू करते हैं पक्षी
यूसुफ ने बताया कि पक्षी अक्टूबर के अंत में कश्मीर में आना शुरू कर देते हैं और मई की शुरुआत में उसी मार्ग का उपयोग करके घाटी से रिवर्स माइग्रेशन शुरू कर देते हैं। मैलार्ड जैसी कुछ प्रजातियां साल भर कश्मीर में रहती हैं।
ये पक्षी सर्दी में साइबेरिया, उत्तरी यूरोप और मध्य एशियाई देशों से कश्मीर आते हैं, जहां तापमान कम होता है। आर्द्रभूमि इन पक्षियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यदि जल निकाय जम जाता है, तो कृत्रिम चारा उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन ये पक्षी मुख्य रूप से प्राकृतिक भोजन पर निर्भर हैं। इन पक्षियों को मेहमान रूप में जानने और आर्द्रभूमि में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। बर्ड फेस्टिवल 2022 में पहलगाम में पहली बार मनाया गया था और इस साल यह छतलाम वेटलैंड रिजर्व पांपोर में आयोजित हुआ था।
- इफशान दीवान, वन्यजीव वार्डन, वेटलैंड्स कश्मीर
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आर्द्रभूमि में प्रवासी पक्षियों का आगमन बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। एक प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ रेयान सोफी के अनुसार इस साल आठ नई प्रजातियां घाटी की शोभा बढ़ा रही हैं। होकरसर वेटलैंड में फाल्केटेड डक, वुलर झील में स्मू डक, हॉर्नड ग्रीब, वेस्टर्न रीफ-हेरॉन, लंबी पूंछ वाली बत्तख और वुलर झील में ब्रॉड-बिल्ड सैंडपाइपर व पहलगाम में नॉर्थेर्न व्हीटियर को देखा गया है।
ज्यादातर नई पक्षी प्रजातियां एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील वुलर झील में देखी गईं। कश्मीर में वन्यजीव संरक्षण कोष में वेटलैंड रिसर्च सेंटर के निदेशक परवेज यूसुफ ने बताया कि प्रवासी पक्षी मुख्य रूप से कश्मीर तक पहुंचने और अत्यधिक ठंड से बचने के लिए मध्य एशियाई फ्लाईवे का उपयोग करते हैं। अत्यधिक ठंडे से बर्फ की एक मोटी परत बन जाती है, जिससे पक्षियों को भोजन उपलब्ध नहीं होता है। इस कारण यह पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर कश्मीर जैसे स्थानों पर पहुंचते हैं।
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पर्यटन विभाग की उप निदेशक दीबा खालिद ने बताया कि उपमहाद्वीप में पक्षियों की 1300 प्रजातियां हैं, जिनमें से 600 कश्मीर में पाई जाती हैं। उनमें से कई प्रवासी हैं। इनके संरक्षण के लिए जागरूकता की जरूरत है। गौरतलब रहे कि दुनिया में पक्षी पालन करोड़ों डॉलर का उद्योग है। पक्षी प्रेमी उन्हें निहारने के लिए दूसरे देशों से भी पहुंचते हैं। हमें उस क्षमता का भी दोहन करना होगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
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अक्तूबर के अंत से घाटी आना शुरू करते हैं पक्षी
यूसुफ ने बताया कि पक्षी अक्टूबर के अंत में कश्मीर में आना शुरू कर देते हैं और मई की शुरुआत में उसी मार्ग का उपयोग करके घाटी से रिवर्स माइग्रेशन शुरू कर देते हैं। मैलार्ड जैसी कुछ प्रजातियां साल भर कश्मीर में रहती हैं।
ये पक्षी सर्दी में साइबेरिया, उत्तरी यूरोप और मध्य एशियाई देशों से कश्मीर आते हैं, जहां तापमान कम होता है। आर्द्रभूमि इन पक्षियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यदि जल निकाय जम जाता है, तो कृत्रिम चारा उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन ये पक्षी मुख्य रूप से प्राकृतिक भोजन पर निर्भर हैं। इन पक्षियों को मेहमान रूप में जानने और आर्द्रभूमि में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। बर्ड फेस्टिवल 2022 में पहलगाम में पहली बार मनाया गया था और इस साल यह छतलाम वेटलैंड रिजर्व पांपोर में आयोजित हुआ था।
- इफशान दीवान, वन्यजीव वार्डन, वेटलैंड्स कश्मीर