कई इलाकों में अभी भी पहली मंजिल तक पानी
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बाढ़ की त्रासदी को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी भी रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी के कई इलाकों में पहली मंजिल तक पानी जमा है। सेना, सीआरपीएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी हैं, लेकिन पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
खासकर सचिवालय, बटमालू, टीआरसी, लाल चौक, राजबाग क्षेत्र में पानी निकासी न होना बड़ी समस्या बना हुआ है। इस मुख्य कारण राजबाग क्षेत्र में झेलम का बांध तीन जगह से टूटा होना है।
हालांकि, झेलम में जलस्तर कम होने के बाद दो स्थानों से पानी घुसना बंद हुआ है, लेकिन तीसरे क्षतिग्रस्त स्थान से अभी भी झेलम का पानी लगातार घुस रहा है। राजबाग, जवाहर नगर, खुरसू, इखराजपोरा पानी भरा है।
कश्मीर में छह दिन बाद भी नहीं दिख रही सरकार
बचाव अभियान के छठे दिन भी सेना, एनडीआरएफ और सीआरपीएफ के जवान समस्या से जूझते रहे, लेकिन इस दौरान सिविल प्रशासन और सरकार की नाम की चीज नजर नहीं आ रही है। सिर्फ वायुसेना, सेना और अर्द्धसैनिक बल के जवान ही नजर बचाव करते देखे गए। सिखों की आबादी वाले श्रीनगर के महजूर नगर क्षेत्र में बचाव अभियान ने अभी तक तवज्जो नहीं दी।
कुछ सिखों ने एनडीआरएफ और सेना से संपर्क किया। तब एनडीआरएफ की टीम इलाके में पहुंची। अपने घरों को छोड़ बाहरी इलाके में शरण लेने वाले लोगों ने एनडीआरएफ की नावों में जाकर अपने घर का जायजा लिया। साथ ही घर का सामान की जांच की। उल्लेखनीय है कि आपदा की इस घड़ी में बड़ी संख्या में शरारती तत्व खाली घरों में घुसकर सामान पर हाथ साफ कर रहे हैं।
10-20 रुपये किलो कश्मीरी सेब
कश्मीर घाटी में आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर फल उत्पादकों को हो रहा है। नेशनल हाईवे बंद होने से कश्मीरी सेब घाटी से बाहर नहीं जा पा रहा है। साथ ही बाढ़ के कारण उसका रखरखाव भी सही तरीके से नहीं हो रहा है। ऐसे में उत्पादक माल सड़ने से पहले उसे सस्ते में बेचने को मजबूर हैं।
सेब उत्पादक मोहम्मद अयूब का कहना है कि उनके जीवन में यह पहला मौका है, जब उसके सेब को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। बाहरी राज्यों से उनका आर्डर है, लेकिन रास्ते बंद होने के कारण वे मजबूर हैं।
आपदा की इस घड़ी में सेब को रखने में समस्या आ रही है, इसलिए उसे खराब होने से पहले कम कीमत में बेच रहे हैं। ताकि नुकसान की कुछ भरपाई हो सके। हालांकि संकट के समय 10 से 20 रुपये किलो पर भी सेब लेने वाले नहीं हैं।