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Jammu News: सरकार से मिली जमीन का 17 साल में हदबंदी नहीं कर पाया एसडीए
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। सोनमर्ग विकास प्राधिकरण (एसडीए) के काम में बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक आरटीआई के जवाब से एसडीए ने यह जानकारी साझा की है। इसमें बताया गया कि वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार ने एसडीए को सोनमर्ग में 7674 कनाल और 17 मरला से ज्यादा जमीन दी थी ताकि वहां का विकास हो सके लेकिन 17 साल बाद भी इस जमीन की ठीक से हदबंदी तक नहीं हो पाई है।
आरटीआई कार्यकर्ता एमएम शुजा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कई बिंदुओं पर एसडीए से जानकारी मांगी थी। इसमें सामने आया है कि एसडीए में कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। एसडीए के पास सिर्फ पांच पक्के कर्मचारी हैं जबकि 67 कर्मचारी ठेके पर या दिहाड़ी मजदूर हैं। पांच स्थायी कर्मचारियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, लेखा अधिकारी, वरिष्ठ सहायक और दो मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) हैं। इन गिने-चुने कर्मचारियों के भरोसे इतने बड़े पर्यटन स्थल का काम चल रहा है।
प्राधिकरण ने स्वीकार किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कोई नई पार्किंग परियोजना शुरू नहीं की गई। आरटीआई के जवाब से पता चलता है कि जून 2020 से जून 2025 के बीच सोनमर्ग में पर्यटन को बढ़ावा देने, रोड शो या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है। इस अवधि के दौरान कोई पौधारोपण अभियान नहीं चलाया गया है और न ही किसी नए होटल या गेस्ट हाउस को अनुमति दी गई है।
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अवैध कब्जों का बढ़ रहा खतरा : हदबंदी न होने के कारण सोनमर्ग जैसी संवेदनशील जगह पर अवैध कब्जे और निर्माण का खतरा बढ़ रहा है। अधिकारियों ने हाल ही में कुछ अवैध ढांचों को गिराया था। इस तरह के उल्लंघनों पर एक रिपोर्ट पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। हालांकि, एसडीए के खिलाफ चल रहे अदालती मामले के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
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श्रीनगर। सोनमर्ग विकास प्राधिकरण (एसडीए) के काम में बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक आरटीआई के जवाब से एसडीए ने यह जानकारी साझा की है। इसमें बताया गया कि वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार ने एसडीए को सोनमर्ग में 7674 कनाल और 17 मरला से ज्यादा जमीन दी थी ताकि वहां का विकास हो सके लेकिन 17 साल बाद भी इस जमीन की ठीक से हदबंदी तक नहीं हो पाई है।
आरटीआई कार्यकर्ता एमएम शुजा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कई बिंदुओं पर एसडीए से जानकारी मांगी थी। इसमें सामने आया है कि एसडीए में कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। एसडीए के पास सिर्फ पांच पक्के कर्मचारी हैं जबकि 67 कर्मचारी ठेके पर या दिहाड़ी मजदूर हैं। पांच स्थायी कर्मचारियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, लेखा अधिकारी, वरिष्ठ सहायक और दो मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) हैं। इन गिने-चुने कर्मचारियों के भरोसे इतने बड़े पर्यटन स्थल का काम चल रहा है।
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प्राधिकरण ने स्वीकार किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कोई नई पार्किंग परियोजना शुरू नहीं की गई। आरटीआई के जवाब से पता चलता है कि जून 2020 से जून 2025 के बीच सोनमर्ग में पर्यटन को बढ़ावा देने, रोड शो या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है। इस अवधि के दौरान कोई पौधारोपण अभियान नहीं चलाया गया है और न ही किसी नए होटल या गेस्ट हाउस को अनुमति दी गई है।
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अवैध कब्जों का बढ़ रहा खतरा : हदबंदी न होने के कारण सोनमर्ग जैसी संवेदनशील जगह पर अवैध कब्जे और निर्माण का खतरा बढ़ रहा है। अधिकारियों ने हाल ही में कुछ अवैध ढांचों को गिराया था। इस तरह के उल्लंघनों पर एक रिपोर्ट पर्यटन विभाग को सौंपी गई है। हालांकि, एसडीए के खिलाफ चल रहे अदालती मामले के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।