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Jammu News: नरसंहार की मान्यता से अलग मातृभूमि तक, पनुन कश्मीर ने जम्मू में भरी हुंकार
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डोगरा चौक में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे पन्नों कश्मीर के सदस्य। संवाद
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- प्रेस क्लब में 108 कार्यकर्ताओं ने रखा सांकेतिक उपवास, कहा - विस्थापन को केवल राहत व पुनर्वास का मुद्दा मानना नाइंसाफी
- नरसंहार कानून, झेलम के उत्तर-पूर्व में अलग केंद्र शासित प्रदेश, 15 हजार नौकरियां और बढ़ी राहत राशि देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उससे जुड़े राजनीतिक समाधान की मांग को लेकर पनुन कश्मीर ने शनिवार को जम्मू में आवाज बुलंद की। संगठन ने न्याय संकल्प अभियान के तहत प्रेस क्लब में 108 कार्यकर्ताओं के सांकेतिक उपवास के साथ पांच सूत्रीय मांगों को दोहराया। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह महज एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए न्याय, राजनीतिक सुरक्षा और स्थायी समाधान की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन की अगली कड़ी है।
पनुन कश्मीर संगठन के संयोजक अग्निशेखर ने अलग मातृभूमि को समुदाय की राजनीतिक सुरक्षा और सम्मानजनक वापसी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश में सांविधानिक सुरक्षा और राजनीतिक अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन गोजा ने नरसंहार और सामूहिक अत्याचारों से निपटने के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था की जरूरत बताई।
पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टीटो गंजू ने कहा कि नरसंहार की आधिकारिक मान्यता ऐतिहासिक सच्चाई और न्याय की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को महज पलायन, संपत्ति नुकसान या राहत के आंकड़ों तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार इसके साथ समुदाय की सामाजिक संरचना, पहचान और ऐतिहासिक संबंधों का भी बड़ा नुकसान जुड़ा है। कार्यक्रम में बीएल कौल, कुंदन कश्मीरी, भूषण लाल भट, वीरेंद्र रैना, पूर्व कर्नल अजय रैना, एमके धर समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे। कश्मीरी पंडित कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष कुंदन कश्मीरी ने दिल्ली से पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। वक्ताओं ने रोजगार और राहत को तत्काल जरूरत बताते हुए कहा कि ये कदम समुदाय की राजनीतिक सुरक्षा के स्थायी समाधान का विकल्प नहीं हो सकते। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं।
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14 को पलौड़ा में मनाएंगे बलिदान
दिवस, 24 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
कार्यक्रम के समापन पर पनुन कश्मीर ने आंदोलन की अगली कड़ी की घोषणा की। 14 सितंबर को पलौड़ा के मन्हास ग्राउंड में बलिदान दिवस कार्यक्रम और 24 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने कहा कि पांच सूत्रीय चार्ट पर ठोस प्रतिक्रिया मिलने तक अभियान लोकतांत्रिक और सांविधानिक तरीके से जारी रहेगा।
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विस्थापित कश्मीरी पंडितों की प्रमुख मांगें
पनुन कश्मीर ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को आधिकारिक मान्यता देने, विशेष नरसंहार कानून बनाने, झेलम नदी के उत्तर और पूर्व में अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में सुरक्षित मातृभूमि स्थापित करने की मांग की। इसके साथ ही बेरोजगार और ओवरएज युवाओं के लिए केंद्र सरकार के विभागों में 15 हजार पद सृजित करने तथा विस्थापित परिवारों के लिए अनुग्रह राशि और मासिक राहत बढ़ाने की मांग रखी। संगठन ने कहा कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस राजनीतिक और कानूनी पहल नहीं होती, उनका अभियान जारी रहेगा।
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- नरसंहार कानून, झेलम के उत्तर-पूर्व में अलग केंद्र शासित प्रदेश, 15 हजार नौकरियां और बढ़ी राहत राशि देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उससे जुड़े राजनीतिक समाधान की मांग को लेकर पनुन कश्मीर ने शनिवार को जम्मू में आवाज बुलंद की। संगठन ने न्याय संकल्प अभियान के तहत प्रेस क्लब में 108 कार्यकर्ताओं के सांकेतिक उपवास के साथ पांच सूत्रीय मांगों को दोहराया। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह महज एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए न्याय, राजनीतिक सुरक्षा और स्थायी समाधान की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन की अगली कड़ी है।
पनुन कश्मीर संगठन के संयोजक अग्निशेखर ने अलग मातृभूमि को समुदाय की राजनीतिक सुरक्षा और सम्मानजनक वापसी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश में सांविधानिक सुरक्षा और राजनीतिक अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन गोजा ने नरसंहार और सामूहिक अत्याचारों से निपटने के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था की जरूरत बताई।
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पनुन कश्मीर के अध्यक्ष टीटो गंजू ने कहा कि नरसंहार की आधिकारिक मान्यता ऐतिहासिक सच्चाई और न्याय की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को महज पलायन, संपत्ति नुकसान या राहत के आंकड़ों तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार इसके साथ समुदाय की सामाजिक संरचना, पहचान और ऐतिहासिक संबंधों का भी बड़ा नुकसान जुड़ा है। कार्यक्रम में बीएल कौल, कुंदन कश्मीरी, भूषण लाल भट, वीरेंद्र रैना, पूर्व कर्नल अजय रैना, एमके धर समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे। कश्मीरी पंडित कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष कुंदन कश्मीरी ने दिल्ली से पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। वक्ताओं ने रोजगार और राहत को तत्काल जरूरत बताते हुए कहा कि ये कदम समुदाय की राजनीतिक सुरक्षा के स्थायी समाधान का विकल्प नहीं हो सकते। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रहीं।
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14 को पलौड़ा में मनाएंगे बलिदान
दिवस, 24 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
कार्यक्रम के समापन पर पनुन कश्मीर ने आंदोलन की अगली कड़ी की घोषणा की। 14 सितंबर को पलौड़ा के मन्हास ग्राउंड में बलिदान दिवस कार्यक्रम और 24 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने कहा कि पांच सूत्रीय चार्ट पर ठोस प्रतिक्रिया मिलने तक अभियान लोकतांत्रिक और सांविधानिक तरीके से जारी रहेगा।
विस्थापित कश्मीरी पंडितों की प्रमुख मांगें
पनुन कश्मीर ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को आधिकारिक मान्यता देने, विशेष नरसंहार कानून बनाने, झेलम नदी के उत्तर और पूर्व में अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में सुरक्षित मातृभूमि स्थापित करने की मांग की। इसके साथ ही बेरोजगार और ओवरएज युवाओं के लिए केंद्र सरकार के विभागों में 15 हजार पद सृजित करने तथा विस्थापित परिवारों के लिए अनुग्रह राशि और मासिक राहत बढ़ाने की मांग रखी। संगठन ने कहा कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस राजनीतिक और कानूनी पहल नहीं होती, उनका अभियान जारी रहेगा।

डोगरा चौक में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे पन्नों कश्मीर के सदस्य। संवाद