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Jammu News: अंगदान से बच सकता है अमूल्य जीवन, भ्रांतियां दूर करना जरूरी
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अंगदान जीवन प्रवाह विषय पर कार्यशाला में अतिथि को स्मृत चिन्ह देते हुए। सोत्र : पीआरओ
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- स्वास्थ्य पेशेवरों को अंगदान की तकनीकी, कानूनी और नैतिक प्रक्रियाओं का दिया प्रशिक्षण
- ब्रेन-स्टेम डेथ के मामलों में परिजन की सही काउंसलिंग से बढ़ सकती है अंगदान की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय अभियान अंगदान करो, जुग-जुग जियो के तहत शनिवार को एक दिवसीय कार्यशाला हुई। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन की कार्यशाला में स्वास्थ्य पेशेवरों को अंगदान की तकनीकी, कानूनी और नैतिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां दूर करना जरूरी है। समय पर अंग उपलब्ध नहीं होने से हर साल बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों की जान चली जाती है। ब्रेन-स्टेम डेथ के मामलों में परिजन को उचित परामर्श देकर अंगदान के लिए प्रेरित किया जाए तो कई जीवन बचाए जा सकते हैं। कार्यशाला में कॉर्निया दान, ब्रेन-स्टेम डेथ प्रमाणीकरण, संभावित अंगदाताओं के शारीरिक रखरखाव और मेडिको-लीगल पहलुओं पर जानकारी दी गई। चिकित्सा कर्मियों को अंगदान की प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी और कानूनी चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के निदेशक डॉ. अनिल कुमार और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. पूनम सेठी समेत कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में भाग लिया। समापन पर जम्मू-कश्मीर में अंगदान की संस्कृति को मजबूत करने और जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया।
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- ब्रेन-स्टेम डेथ के मामलों में परिजन की सही काउंसलिंग से बढ़ सकती है अंगदान की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय अभियान अंगदान करो, जुग-जुग जियो के तहत शनिवार को एक दिवसीय कार्यशाला हुई। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन की कार्यशाला में स्वास्थ्य पेशेवरों को अंगदान की तकनीकी, कानूनी और नैतिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां दूर करना जरूरी है। समय पर अंग उपलब्ध नहीं होने से हर साल बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों की जान चली जाती है। ब्रेन-स्टेम डेथ के मामलों में परिजन को उचित परामर्श देकर अंगदान के लिए प्रेरित किया जाए तो कई जीवन बचाए जा सकते हैं। कार्यशाला में कॉर्निया दान, ब्रेन-स्टेम डेथ प्रमाणीकरण, संभावित अंगदाताओं के शारीरिक रखरखाव और मेडिको-लीगल पहलुओं पर जानकारी दी गई। चिकित्सा कर्मियों को अंगदान की प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी और कानूनी चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के निदेशक डॉ. अनिल कुमार और स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. पूनम सेठी समेत कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में भाग लिया। समापन पर जम्मू-कश्मीर में अंगदान की संस्कृति को मजबूत करने और जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया।
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