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शोध संस्थान की सतत प्रतिबद्धता : निदेशक
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एनआईटी के सदस्य जिन्हें शोध के लिए अनुदान मिला है। स्रोत एनआईटी
- फोटो : bhadrawah news
- एनआईटी के दो सदस्यों को अभिनव जैव-उपचार परियोजना के लिए खान मंत्रालय से 73.6 लाख रुपये का अनुदान मिला
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। अंतः विषय अनुसंधान और सतत इंजीनियरिंग नवाचार को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर के दो संकाय सदस्यों को भारत सरकार के खान मंत्रालय की ओर से 73,60,921.5 रुपये का प्रतिष्ठित शोध अनुदान प्रदान किया गया है।
यह अनुदान ''''भूमिगत मिट्टी से विषाक्त तत्वों को हटाने के लिए जैव-उपचार-संवर्धित फुटपाथ प्रणाली'''' नामक एक अभूतपूर्व परियोजना के लिए स्वीकृत किया गया है।
इस परियोजना का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विवेक, प्रधान अन्वेषक (पीआई) के रूप में और धातुकर्म एवं सामग्री इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंशुल गुप्ता, सह-प्रधान अन्वेषक (को-पीआई) के रूप में करेंगे।
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इस शोध का मुख्य उद्देश्य ऐसी टिकाऊ फुटपाथ प्रणालियों का विकास और प्रदर्शन करना है जिनमें भूमिगत मिट्टी से विषाक्त और हानिकारक तत्वों को हटाने के लिए जैव-उपचार तकनीकों का उपयोग किया गया हो। यह दोहरे उद्देश्य वाली प्रणाली न केवल पर्यावरणीय उपचार में मदद करेगी बल्कि फुटपाथ के स्थायित्व और प्रदर्शन को बनाए रखने और बढ़ाने में भी मदद करेगी।
एनआईटी श्रीनगर के निदेशक, प्रो. बिनोद कुमार कनौजिया ने अपने संदेश में अन्वेषकों को बधाई दी और इस महत्वपूर्ण शोध में सहयोग के लिए खान मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय प्रभाव वाली स्थायी प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के प्रति एनआईटी श्रीनगर की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंजीनियरिंग नवाचार का उपयोग करके पर्यावरण पुनर्स्थापन समय की आवश्यकता है और यह अनुदान इस उद्देश्य में हमारे योगदान को और मजबूत करेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। अंतः विषय अनुसंधान और सतत इंजीनियरिंग नवाचार को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर के दो संकाय सदस्यों को भारत सरकार के खान मंत्रालय की ओर से 73,60,921.5 रुपये का प्रतिष्ठित शोध अनुदान प्रदान किया गया है।
यह अनुदान ''''भूमिगत मिट्टी से विषाक्त तत्वों को हटाने के लिए जैव-उपचार-संवर्धित फुटपाथ प्रणाली'''' नामक एक अभूतपूर्व परियोजना के लिए स्वीकृत किया गया है।
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इस परियोजना का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विवेक, प्रधान अन्वेषक (पीआई) के रूप में और धातुकर्म एवं सामग्री इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंशुल गुप्ता, सह-प्रधान अन्वेषक (को-पीआई) के रूप में करेंगे।
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इस शोध का मुख्य उद्देश्य ऐसी टिकाऊ फुटपाथ प्रणालियों का विकास और प्रदर्शन करना है जिनमें भूमिगत मिट्टी से विषाक्त और हानिकारक तत्वों को हटाने के लिए जैव-उपचार तकनीकों का उपयोग किया गया हो। यह दोहरे उद्देश्य वाली प्रणाली न केवल पर्यावरणीय उपचार में मदद करेगी बल्कि फुटपाथ के स्थायित्व और प्रदर्शन को बनाए रखने और बढ़ाने में भी मदद करेगी।
एनआईटी श्रीनगर के निदेशक, प्रो. बिनोद कुमार कनौजिया ने अपने संदेश में अन्वेषकों को बधाई दी और इस महत्वपूर्ण शोध में सहयोग के लिए खान मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय प्रभाव वाली स्थायी प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के प्रति एनआईटी श्रीनगर की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंजीनियरिंग नवाचार का उपयोग करके पर्यावरण पुनर्स्थापन समय की आवश्यकता है और यह अनुदान इस उद्देश्य में हमारे योगदान को और मजबूत करेगा।