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जम्मू-कश्मीर की प्रगति सीधे तौर पर युवाओं के विकास से जुड़ी है : उपराज्यपाल
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कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा। स्रोत राज भवन
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एलजी मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में अलोहा राज्य स्तरीय अंकगणितीय संक्रिया प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की प्रगति सीधे तौर पर युवाओं के विकास से जुड़ी है। उनका लक्ष्य प्रदेश और देश को बदलना है। दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ वे इस मिशन को पूरा कर सकते हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें सबसे प्रतिभाशाली विद्वान, वैज्ञानिक व नवप्रवर्तक बनने के लिए सही वातावरण मिले।
एलजी ने श्रीनगर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय में एबैकस लर्निंग ऑफ हायर अर्थमेटिक- अलोहा राज्य स्तरीय अंकगणितीय संक्रिया प्रतियोगिता के शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं और विजेताओं को सम्मानित किया। इस प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर से 1500 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। मानव बुद्धि की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि जो बच्चा बचपन से ही जोड़, घटाव और गुणा जैसी सरल गणनाएं सीख लेता है उसके जीवन में कौशल और निर्णय लेने की क्षमताएं बेहतर होती हैं। ये बुनियादी कौशल युवा दिमाग को विश्लेषणात्मक रूप से सोचने और त्वरित प्रभावी निर्णय लेने में मदद करते हैं।
उपराज्यपाल ने तकनीक जगत का एक दिलचस्प उदाहरण दिया जिसमें दुनिया भर के पुस्तकालयों में पुस्तकों की गिनती करने की गूगल की पहल का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि गूगल ने पुस्तकालयों में पुस्तकों की गिनती शुरू की और पाया कि दुनिया में लगभग 13 करोड़ अनूठी पुस्तकें हैं। इन 13 करोड़ पुस्तकों में निहित ज्ञान एक इंसान के मस्तिष्क में समा सकता है। उन्होंने मानव मस्तिष्क की असीम क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने दिमाग का पूरा इस्तेमाल करना सीख ले तो पूरी दुनिया का ज्ञान उसके मस्तिष्क में समा सकता है। इस मानसिक क्षमता का दोहन नवाचार, ज्ञान और प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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युवाओं से सीमाओं से परे सोचने और राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जिज्ञासा, ज्ञान और अनुशासन से युवा मस्तिष्कों को सशक्त बनाना प्रदेश के समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर होने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने असभी प्रतिभागी बच्चों को उनके असाधारण अंकगणितीय कौशल के लिए बधाई दी। उन्होंने बच्चों को अपनी वास्तविक क्षमता को उजागर करने का एक रोमांचक अवसर प्रदान करने के लिए अलोहा की सराहना की।
उन्होंने कहा कि अंकगणितीय संक्रियाएं केवल संख्यात्मक गणनाएं नहीं हैं। ये समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच और तर्क जैसे कौशल की नींव हैं। इसके दूरगामी प्रभाव हैं और यह युवा मस्तिष्क को नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर प्रेरित करता है। यह शिक्षकों को यह भी याद दिलाता है कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य अंक, प्रमाण पत्र या प्रशंसा प्राप्त करना नहीं है बल्कि राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी है। कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलोफर खान, अलोहा इंटरनेशनल के संस्थापक लोह मुन सुंग, अलोहा इंटरनेशनल की निदेशक किरण मोटवानी, अलोहा जम्मू-कश्मीर के निदेशक मुबाशिर असलम वफाई, प्रशासनिक अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख, शिक्षक और छात्र सम्मान समारोह में मौजूद है।
नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपना रास्ता खुद बनाएं युवा
उपराज्यपाल ने युवा पीढ़ी से नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपना रास्ता खुद बनाने और सचेत विकल्प चुनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक अप्रत्याशित दुनिया में प्रचलित रास्तों पर चलकर नवाचार हासिल नहीं किया जा सकता। युवा पीढ़ी को अधिक उद्यमशील, साहसी, रचनात्मक होना चाहिए और लीक से हटकर काम करना चाहिए। एलजी ने स्कूल परिसरों को जिज्ञासा और नवाचार के केंद्र के रूप में बदलने के लिए सामूहिक प्रयासों का भी आह्वान किया। शिक्षा स्वतंत्र अनुसंधान और विचारों का माध्यम होनी चाहिए और कक्षाएं सपनों और आकांक्षाओं के लिए लांच पैड के रूप में काम करें।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की प्रगति सीधे तौर पर युवाओं के विकास से जुड़ी है। उनका लक्ष्य प्रदेश और देश को बदलना है। दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ वे इस मिशन को पूरा कर सकते हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें सबसे प्रतिभाशाली विद्वान, वैज्ञानिक व नवप्रवर्तक बनने के लिए सही वातावरण मिले।
एलजी ने श्रीनगर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय में एबैकस लर्निंग ऑफ हायर अर्थमेटिक- अलोहा राज्य स्तरीय अंकगणितीय संक्रिया प्रतियोगिता के शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं और विजेताओं को सम्मानित किया। इस प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर से 1500 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। मानव बुद्धि की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि जो बच्चा बचपन से ही जोड़, घटाव और गुणा जैसी सरल गणनाएं सीख लेता है उसके जीवन में कौशल और निर्णय लेने की क्षमताएं बेहतर होती हैं। ये बुनियादी कौशल युवा दिमाग को विश्लेषणात्मक रूप से सोचने और त्वरित प्रभावी निर्णय लेने में मदद करते हैं।
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उपराज्यपाल ने तकनीक जगत का एक दिलचस्प उदाहरण दिया जिसमें दुनिया भर के पुस्तकालयों में पुस्तकों की गिनती करने की गूगल की पहल का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि गूगल ने पुस्तकालयों में पुस्तकों की गिनती शुरू की और पाया कि दुनिया में लगभग 13 करोड़ अनूठी पुस्तकें हैं। इन 13 करोड़ पुस्तकों में निहित ज्ञान एक इंसान के मस्तिष्क में समा सकता है। उन्होंने मानव मस्तिष्क की असीम क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने दिमाग का पूरा इस्तेमाल करना सीख ले तो पूरी दुनिया का ज्ञान उसके मस्तिष्क में समा सकता है। इस मानसिक क्षमता का दोहन नवाचार, ज्ञान और प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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युवाओं से सीमाओं से परे सोचने और राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जिज्ञासा, ज्ञान और अनुशासन से युवा मस्तिष्कों को सशक्त बनाना प्रदेश के समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर होने का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने असभी प्रतिभागी बच्चों को उनके असाधारण अंकगणितीय कौशल के लिए बधाई दी। उन्होंने बच्चों को अपनी वास्तविक क्षमता को उजागर करने का एक रोमांचक अवसर प्रदान करने के लिए अलोहा की सराहना की।
उन्होंने कहा कि अंकगणितीय संक्रियाएं केवल संख्यात्मक गणनाएं नहीं हैं। ये समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच और तर्क जैसे कौशल की नींव हैं। इसके दूरगामी प्रभाव हैं और यह युवा मस्तिष्क को नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर प्रेरित करता है। यह शिक्षकों को यह भी याद दिलाता है कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य अंक, प्रमाण पत्र या प्रशंसा प्राप्त करना नहीं है बल्कि राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की जिम्मेदारी है। कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलोफर खान, अलोहा इंटरनेशनल के संस्थापक लोह मुन सुंग, अलोहा इंटरनेशनल की निदेशक किरण मोटवानी, अलोहा जम्मू-कश्मीर के निदेशक मुबाशिर असलम वफाई, प्रशासनिक अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख, शिक्षक और छात्र सम्मान समारोह में मौजूद है।
नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपना रास्ता खुद बनाएं युवा
उपराज्यपाल ने युवा पीढ़ी से नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपना रास्ता खुद बनाने और सचेत विकल्प चुनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक अप्रत्याशित दुनिया में प्रचलित रास्तों पर चलकर नवाचार हासिल नहीं किया जा सकता। युवा पीढ़ी को अधिक उद्यमशील, साहसी, रचनात्मक होना चाहिए और लीक से हटकर काम करना चाहिए। एलजी ने स्कूल परिसरों को जिज्ञासा और नवाचार के केंद्र के रूप में बदलने के लिए सामूहिक प्रयासों का भी आह्वान किया। शिक्षा स्वतंत्र अनुसंधान और विचारों का माध्यम होनी चाहिए और कक्षाएं सपनों और आकांक्षाओं के लिए लांच पैड के रूप में काम करें।