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Jammu News: कार्यशाला में वन्यजीव संरक्षण कानूनों के प्रति किया जागरूक
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी श्रीनगर ने वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से शनिवार को कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के न्यायिक अधिकारियों के लिए वन्यजीव संरक्षण कानूनों पर कार्यशाला का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम अकादमी के मोमिनाबाद परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी के निदेशक नसीर अहमद डार ने स्वागत संबोधन से किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 48ए और 51ए(जी) के तहत राज्य और नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को रेखांकित करते हुए क्षेत्र में बढ़ते वन्यजीव अपराधों और पारिस्थितिक खतरों के मद्देनजर न्यायिक जागरूकता को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
अपने प्रारंभिक उद्बोधन में डब्ल्यूटीआई जम्मू-कश्मीर की वरिष्ठ प्रबंधक एवं प्रमुख डॉ. तनुश्री श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्तव्य जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश सेखरी ने दिया।
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उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र बढ़ते वन्यजीव अपराधों के खतरे से अछूता नहीं है। उन्होंने न्यायपालिका से आग्रह किया कि वह नाजुक पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा के लिए वन्यजीव कानूनों को सख्ती, संवेदनशीलता और निरंतरता के साथ लागू करने में सक्रिय रहे। संवाद
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यह कार्यक्रम अकादमी के मोमिनाबाद परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी के निदेशक नसीर अहमद डार ने स्वागत संबोधन से किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 48ए और 51ए(जी) के तहत राज्य और नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को रेखांकित करते हुए क्षेत्र में बढ़ते वन्यजीव अपराधों और पारिस्थितिक खतरों के मद्देनजर न्यायिक जागरूकता को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
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अपने प्रारंभिक उद्बोधन में डब्ल्यूटीआई जम्मू-कश्मीर की वरिष्ठ प्रबंधक एवं प्रमुख डॉ. तनुश्री श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्तव्य जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश सेखरी ने दिया।
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उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र बढ़ते वन्यजीव अपराधों के खतरे से अछूता नहीं है। उन्होंने न्यायपालिका से आग्रह किया कि वह नाजुक पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा के लिए वन्यजीव कानूनों को सख्ती, संवेदनशीलता और निरंतरता के साथ लागू करने में सक्रिय रहे। संवाद