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Jammu News: प्रमुख सचिव वित्त बताएं क्यों नहीं उन्हें कोर्ट की अवमानना के लिए दंडित किया जाए
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- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव वित्त डी वैध पर की तल्ख टिप्पणी
- कोर्ट नेे कहा प्रमुख सचिव वित्त कई निर्देश के बाद भी हाजिर नहीं हुए, आदेश नहीं मानते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को दो सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके आदेशों की अवहेलना करने पर उन्हें दंडित क्यों न किया जाए।
अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की पीठ ने न्यायालय की रजिस्ट्री को वित्त विभाग के प्रमुख सचिव संतोष डी वैद्य, जो अवमानना के आरोपी हैं, के खिलाफ रोबकार/ नियम बनाने का निर्देश दिया है। उनसे दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करके यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्यवाही क्यों न की जाए और उन्हें दंडित क्यों न किया जाए।
अपनी अवमानना याचिका में, याचिकाकर्ता ने बताया है कि न्यायालय ने पिछले 28 मई 2024 को अपने फैसले में अधिकारियों को आदेश की प्रति उपलब्ध कराए जाने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि के भीतर उनके पक्ष में 68.50 लाख रुपये जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि यदि निर्धारित समय में याचिकाकर्ता के पक्ष में धनराशि जारी नहीं की जाती है, तो बकाया राशि 9% की दर से ब्याज सहित याचिका दायर करने की तिथि यानी 30 सितंबर 2021 से उसे देय होगी। इसके अलावा, अदालत ने कहा कि ब्याज का भुगतान प्रतिवादी/ अधिकारी/ अधिकारियों द्वारा किया जाएगा जिनके कारण यह देरी हुई है।
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अदालत ने पाया कि अगस्त 2021 को जिला विकास आयुक्त राजौरी की ओर से दायर तथ्यों के विवरण में कहा गया है कि उन्होंने इस मामले को पहले प्रशासनिक विभाग यानी ग्रामीण विकास विभाग और 5 मार्च 2020 को वित्त विभाग के समक्ष भी उठाया था। फिर भी उन्हें धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। अदालत ने यह भी दलील दी है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा धनराशि स्वीकृत और जारी नहीं की जाती, तब तक उनके पास इस तरह के भुगतान करने का कोई बजटीय प्रावधान या अधिकार नहीं है।
न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय से किसी स्थगन आदेश के अभाव में, प्रतिवादियों का यह कानूनी दायित्व है कि वे न्यायालय द्वारा पारित निर्णय का अक्षरशः पालन करें।
चूंकि प्रतिवादियों ने एकल न्यायाधीश द्वारा पारित दिनांक 18 अगस्त 2025 के निर्णय का पालन नहीं किया है, इसलिए न्यायालय ने सरकार के प्रधान सचिव वित्त विभाग और जिला विकास आयुक्त राजौरी को अगली सुनवाई की तिथि पर वर्चुअल/ फिजिकल माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। आदेश के क्रम में उपायुक्त राजौरी 26 सितंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, लेकिन न्यायालय के आदेश, जो अंतिम हो गया है, का पालन न करने का कोई उचित या न्यायोचित कारण नहीं बताया गया।
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दो बार बुलाने पर कोर्ट में हाजिर नही हुए प्रमुख सचिव वित्त
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 2 (संतोष डी वैद्य) ने न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों का बहुत कम सम्मान किया है। 18 अगस्त 2025 और 26 सितंबर 2025 को इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। बिना किसी उचित आधार के छूट के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने कहा कि न तो उन्होंने इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुसार इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने की कोशिश की और न ही उन्होंने न्यायालय के आदेशों का पालन किया है और धनराशि जारी नहीं की है।
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- कोर्ट नेे कहा प्रमुख सचिव वित्त कई निर्देश के बाद भी हाजिर नहीं हुए, आदेश नहीं मानते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को दो सप्ताह के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके आदेशों की अवहेलना करने पर उन्हें दंडित क्यों न किया जाए।
अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की पीठ ने न्यायालय की रजिस्ट्री को वित्त विभाग के प्रमुख सचिव संतोष डी वैद्य, जो अवमानना के आरोपी हैं, के खिलाफ रोबकार/ नियम बनाने का निर्देश दिया है। उनसे दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करके यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्यवाही क्यों न की जाए और उन्हें दंडित क्यों न किया जाए।
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अपनी अवमानना याचिका में, याचिकाकर्ता ने बताया है कि न्यायालय ने पिछले 28 मई 2024 को अपने फैसले में अधिकारियों को आदेश की प्रति उपलब्ध कराए जाने की तिथि से छह सप्ताह की अवधि के भीतर उनके पक्ष में 68.50 लाख रुपये जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि यदि निर्धारित समय में याचिकाकर्ता के पक्ष में धनराशि जारी नहीं की जाती है, तो बकाया राशि 9% की दर से ब्याज सहित याचिका दायर करने की तिथि यानी 30 सितंबर 2021 से उसे देय होगी। इसके अलावा, अदालत ने कहा कि ब्याज का भुगतान प्रतिवादी/ अधिकारी/ अधिकारियों द्वारा किया जाएगा जिनके कारण यह देरी हुई है।
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अदालत ने पाया कि अगस्त 2021 को जिला विकास आयुक्त राजौरी की ओर से दायर तथ्यों के विवरण में कहा गया है कि उन्होंने इस मामले को पहले प्रशासनिक विभाग यानी ग्रामीण विकास विभाग और 5 मार्च 2020 को वित्त विभाग के समक्ष भी उठाया था। फिर भी उन्हें धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। अदालत ने यह भी दलील दी है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा धनराशि स्वीकृत और जारी नहीं की जाती, तब तक उनके पास इस तरह के भुगतान करने का कोई बजटीय प्रावधान या अधिकार नहीं है।
न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय से किसी स्थगन आदेश के अभाव में, प्रतिवादियों का यह कानूनी दायित्व है कि वे न्यायालय द्वारा पारित निर्णय का अक्षरशः पालन करें।
चूंकि प्रतिवादियों ने एकल न्यायाधीश द्वारा पारित दिनांक 18 अगस्त 2025 के निर्णय का पालन नहीं किया है, इसलिए न्यायालय ने सरकार के प्रधान सचिव वित्त विभाग और जिला विकास आयुक्त राजौरी को अगली सुनवाई की तिथि पर वर्चुअल/ फिजिकल माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। आदेश के क्रम में उपायुक्त राजौरी 26 सितंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, लेकिन न्यायालय के आदेश, जो अंतिम हो गया है, का पालन न करने का कोई उचित या न्यायोचित कारण नहीं बताया गया।
दो बार बुलाने पर कोर्ट में हाजिर नही हुए प्रमुख सचिव वित्त
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 2 (संतोष डी वैद्य) ने न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों का बहुत कम सम्मान किया है। 18 अगस्त 2025 और 26 सितंबर 2025 को इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। बिना किसी उचित आधार के छूट के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने कहा कि न तो उन्होंने इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुसार इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने की कोशिश की और न ही उन्होंने न्यायालय के आदेशों का पालन किया है और धनराशि जारी नहीं की है।