बुरहान वानी की बरसी पर कश्मीर में भारी हिंसा की आशंका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की पहली बरसी पर घाटी में खूनी खेल की साजिश रची गई है। इसके तहत अलगाववादी तथा आतंकी तंजीमें बुरहान के मारे जाने के बाद घाटी में उत्पन्न हालात दोबारा से पैदा करने की फिराक में हैं।
खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि बंद के दौरान सुरक्षा बलों के ठिकाने, प्रतिष्ठान तथा तैनाती स्थल को पत्थरबाज निशाना बना सकते हैं। आतंकी हमले भी किए जा सकते हैं पिछले वर्ष 8 जुलाई को सुरक्षा बलों ने बुरहान का साथियों सहित काम तमाम किया था।
इसके बाद पूरी घाटी में हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें 80 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। कई पैलेट लगने से जख्मी हुए थे। लगभग पांच महीने तक घाटी में बंद रहा। अलगाववादी तंजीमों की ओर से कैलेंडर जारी किया जाता रहा।
पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान की साजिश
सूत्रों का कहना है कि इस बार भी घाटी में बंद का सिलसिला लंबे समय तक चलाने की साजिश रची गई है। बंद के दौरान प्रदर्शनों की आड़ में अवाम को उकसा कर सुरक्षा बलों पर पथराव करने, स्कूल-कालेज फूंकने तथा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई है।
अलगाववादियों की चाल है कि एनआईए छापे तथा डिप्टी एसपी की भीड़ द्वारा हत्या के बाद से दूरी बना रहे कश्मीरियों को फिर से बंद तथा प्रदर्शनों के जरिये एकजुट किया जाए। इस बात के भी इनपुट हैं कि सरकारी मुलाजिमों को भी ढाल बनाया जा सकता है।
खासकर शिक्षकों को विद्यालयों से दूर रहने को कहा जा सकता है, ताकि बंद के दौरान सरकार चाहकर भी स्कूल न खुलवा सके। अलगाववादियों की ओर से इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। पत्थरबाजों से संपर्क किया जा रहा है।
छात्र समुदाय को भी जोड़ने की साजिश
अमरनाथ यात्रा के बीच ही घाटी में फिर से हालात खराब करने के इनपुट के बाद से सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। पत्थरबाजों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है। बंद के दौरान प्रदर्शन में छात्र-छात्राओं को भी पत्थरबाजी में आगे करने की साजिश है।
अलगाववादियों तथा आतंकी संगठनों की ओर से भीड़ में घुसकर छात्र-छात्राओं को पथराव के लिए उकसाने की साजिश रची गई है। अलगाववादियों की मंशा है कि पत्थरबाजी कर रहे छात्र समुदाय से सुरक्षा बल थोड़ी कम सख्ती बरतेंगे, जिससे उनके पत्थरबाजी की साजिश को बल मिल सकेगा।