जम्मू-कश्मीर को जीएसटी में मिल सकते हैं विशेष अधिकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू कश्मीर सरकार को उम्मीद है कि उसे जीएसटी में कुछ विशेष अधिकार मिल जाएंगे। रियासत सरकार ने जीएसटी में दो संशोधनों का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर सरकार के प्रस्ताव को राष्ट्रपति भवन भेज दिया है।
भारतीय संविधान के 101वें संशोधन को जम्मू कश्मीर में लागू करने संबंधी विधानसभा के प्रस्ताव और कैबिनेट की मंजूरी के बाद रियासत सरकार ने केंद्र से रियासत के विशेष दर्जे से छेड़छाड़ किए बगैर जीएसटी लागू करने की मांग की है। वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच इस संबंध में विस्तार से बातचीत हुई है।
विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद से द्राबू की जेटली से तीन बार फोन पर बात हुई। रियासत सरकार को उम्मीद है कि राष्ट्रपति का आदेश शुक्रवार को जारी हो जाएगा। रियासत में सात जुलाई की रात 12 बजे के बाद से जीएसटी लागू होने की संभावना है।
जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने अमर उजाला से कहा कि अब राष्ट्रपति के आदेश की प्रतीक्षा है। विपक्ष ने जीएसटी पर भ्रम फैलाने की कोशिश की। जीएसटी लागू नहीं होने से जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। सिर्फ छह दिन में ही दूसरे राज्यों से व्यापार और इससे होने वाले राजस्व लाभ में साठ फीसदी तक की कमी आई है।
जम्मू कश्मीर को हो रहे नुकसान के मद्देनजर विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के तुरंत बाद कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी और रात में राज्यपाल एनएन वोहरा ने भी इसे अनुमोदित कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी बिना देर किए इसकी अनुशंसा कर दी।
सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर सरकार ने जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 5 के तहत मिले टैक्स लगाने और टैक्स दर की समीक्षा के अधिकार की मांग की है। जीएसटी के वर्तमान स्वरूप में जम्मू कश्मीर को ऐसे अधिकार मिलने की संभावना कम है, लेकिन अनुच्छेद 370 पर यथा स्थिति का संदेश देने के लिए केंद्र कुछ विशेष व्यवस्था कर सकता है। इस विशेष व्यवस्था को राष्ट्रपति के आदेश में शामिल किया जा सकता है।
जेटली के पत्र ने तोड़ी महबूबा सरकार की तंद्रा
जीएसटी पर जम्मू कश्मीर सरकार शुरू से असमंजस के जाल में फंसी रही। सरकार आम सहमति की बात करती रही जो संभव नहीं थी। इस कारण 17 जून को विधानसभा का विशेष सत्र स्थगित करना पड़ा। भ्रम की स्थिति के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को पत्र लिखकर जीएसटी लागू करने के लिए पहल का दबाव बनाया। जेटली के पत्र के बाद रियासत सरकार ज्यादा सक्रिय हुई।