रिपोर्ट: काल्पनिक विकास के ईद-गिर्द रहा बजट
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यह एक अनोखा आम बजट है। जो मूलत: काल्पनिक विकास के बजट के ईद-गिर्द घूम रहा है। रियासत के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे से निकला जिन्न मायूस करने वाला रहा। वर्ष 2018 तक दस फीसदी ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है।
आर्थिक घाटा तीन फीसदी और महंगाई 4 से 6 फीसदी तक लाना है। यह सब काल्पनिक लगता है। यदि ऐसा हो जाता है तो एक चमत्कार होगा। वित्त मंत्री द्वारा रियासत को एम्स और आईआईएम देने की घोषणा करना स्वागत योग्य है, लेकिन यह कब बनेगा।
पिछले बजट में आईआईटी की घोषणा हुई थी, लेकिन अभी तक जमीन की निशानदेही तक नहीं हो पाई। तो नए प्रोजेक्ट कब शुरू होंगे। रियासत को उम्मीद थी कि बाढ़ आपदा के बाद किसी बड़े पैकेज के साथ कारोबारियों को होलीडे पैकेज मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बेरोजगारी मुंह फैलाए रियासत के समक्ष खड़ी है।
मात्र सात फीसदी जनसंख्या पंजीकृत बेरोजगार है, लेकिन उसका निराकरण वित्त मंत्री ने नहीं किया।
रियासत केंद्र से इन्सेंटिव पाने की हकदार
देश की कुल आबादी के एक फीसदी लोग जम्मू-कश्मीर में रहते हैं। कुल जमीन का सिर्फ 1.3 फीसदी हिस्सा हमारा है। हमारी जीडीपी ग्रोथ 1 से 1.39 फीसदी होनी चाहिए थी, लेकिन वर्तमान में यह सिर्फ 0.8 फीसदी है। ऐसे में रियासत केंद्र से इन्सेंटिव पाने की हकदार है।
बाढ़ में रियासत की आर्थिक स्थिति नीचे आ गई। एक लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। उम्मीद थी कि रियासत के कारोबारियों, खासकर पर्यटन उद्योग को वित्त मंत्री जरूर मरहम लगाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
रविवार को रियासत की नई हुकूमत की ताजपोशी है। उसमें पीडीपी के साथ भाजपा भी शामिल है। आशा है कि इन मुद्दों को सरकार नीति आयोग के समक्ष उठाएगी, जिसके चेयरमैन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।