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नशे के खिलाफ एसओपी तैयार : विशेषज्ञ करेंगे व्यावसायिक मात्रा के एनडीपीएस मामलों की जांच
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में व्यावसायिक मात्रा से जुड़े एनडीपीएस मामलों की जांच और पैरवी केवल प्रशिक्षित और विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। इससे तकनीकी गलतियों, कानूनी जानकारी की कमी और विभागों के बीच कमजोर समन्वय की समस्या को कम होगी।
जम्मू-कश्मीर में बढ़ते नशे के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया है। इसका उद्देश्य एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जांच और अभियोजन के दौरान होने वाली प्रक्रियागत कमियों को दूर करना है।
वर्तमान में एसओपी में ऐसे प्रावधान है जिनकी वजह से कई मामलों में आरोपियों को जमानत या बरी होने का लाभ मिल जाता है। नई एसओपी कानून विभाग ने अभियोजन विभाग के साथ मिलकर तैयार की है। इसे गृह विभाग को भेजा गया है। जांच के बाद उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद सभी संबंधित विभागों में लागू किया जाएगा।
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नई एसओपी में जांच प्रक्रिया में एकरूपता, सही दस्तावेजीकरण, समय पर फॉरेंसिक जांच और कानून के अनिवार्य प्रावधान का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की बात है। इन सुधारों से सजा की दर बढ़ेगी और नशे के खिलाफ चल रहे अभियान की विश्वसनीयता मजबूत होगी। अधिकारियों ने यह भी माना है कि वर्तमान में कई एनडीपीएस मामलों में केवल प्रक्रियागत खामियों के कारण आरोपी छूट जाते हैं, जिससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। नई एसओपी से जवाबदेही तय होगी और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में व्यावसायिक मात्रा से जुड़े एनडीपीएस मामलों की जांच और पैरवी केवल प्रशिक्षित और विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। इससे तकनीकी गलतियों, कानूनी जानकारी की कमी और विभागों के बीच कमजोर समन्वय की समस्या को कम होगी।
जम्मू-कश्मीर में बढ़ते नशे के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार किया है। इसका उद्देश्य एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जांच और अभियोजन के दौरान होने वाली प्रक्रियागत कमियों को दूर करना है।
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वर्तमान में एसओपी में ऐसे प्रावधान है जिनकी वजह से कई मामलों में आरोपियों को जमानत या बरी होने का लाभ मिल जाता है। नई एसओपी कानून विभाग ने अभियोजन विभाग के साथ मिलकर तैयार की है। इसे गृह विभाग को भेजा गया है। जांच के बाद उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद सभी संबंधित विभागों में लागू किया जाएगा।
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नई एसओपी में जांच प्रक्रिया में एकरूपता, सही दस्तावेजीकरण, समय पर फॉरेंसिक जांच और कानून के अनिवार्य प्रावधान का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की बात है। इन सुधारों से सजा की दर बढ़ेगी और नशे के खिलाफ चल रहे अभियान की विश्वसनीयता मजबूत होगी। अधिकारियों ने यह भी माना है कि वर्तमान में कई एनडीपीएस मामलों में केवल प्रक्रियागत खामियों के कारण आरोपी छूट जाते हैं, जिससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। नई एसओपी से जवाबदेही तय होगी और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।