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रावी दरिया पर बने स्टेड केबल ब्रिज पर जल्द दौड़ेंगे वाहन
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Tue, 03 Mar 2015 01:32 AM IST
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केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजना के तहत बीआरओ के अधीन राज्य को हिमाचल और पंजाब से जोड़ने वाला रावी पुल का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है।
सिंतबर माह तक दोनों और से पुल जुड जाएगा लेकिन इसपर वाहनों की आवाजाही औपचारिक रूप से दिसंबर में हस्तांतरण के बाद ही शुरू हो पाएगी।
वर्तमान में पुल निर्माण कार्य को तेजी से जारी रखा गया है और पंजाब और जम्मू-कश्मीर की ओर से तीन तीन स्लैब डाले जा चुके हैं।
योजनाबद्ध रूप से सितंबर माह तक दोनों ओर के बारह बारह स्लैब पूरे करने के बाद पंजाब और हिमाचल और जम्मू-कश्मीर को नया रूट मिल जाएगा।
दिसंबर माह तक अंतिम रूप देकर इसे हैंड ओवर करने की योजना पर तेजी से काम जारी है। व्यापार और पर्यटन की अपार संभावनाएं लिए रावी दरिया पर अपनी ही तरह का यह पहला और देश का चौथा पुल है, जिसे केबल स्टेयिंग तकनीक से तैयार किया जा रहा है।
इसमें पिलर और सस्पेंशन के लिए तार के जरिए पुल को बांधा जाएगा। केबल स्टेड इस पुल का निर्माण 145 करोड़ की लागत से किया जा रहा है।
592 मीटर लंबे पुल में लगने वाली तार को जापान से आयात किया गया है। डेक लेवल से 88 मीटर ऊंचे टावर स्थापित किए गए हैं।
इसके साथ साथ पुल पर दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़े फुटपाथ का भी प्रावधान है। इस पुल के निर्माण का काम इरकान-एसपीएस कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समर्पित इस पुल के निर्माण का नींव पत्थर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मई 2011 में रखा था।
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राज्य को पंजाब और हिमाचल से जोड़ने वाले इस पुल को पर्यटन की संभावनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
बसोहली, बनी, भद्रवाह और घाटी के अधिकांश हिस्सों को जोड़ने के साथ ही हिमाचल से राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह पुल लाभदायक साबित होगा। सरथल की खूबसूरती को सामने लाने में भी पुल लाभदायक सिद्ध होगा।
तकनीकी चमत्कार के रूप में बसोहली के रावी दरिया पर बन रहे पुल देश में गिने-चुने ही हैं। जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद का नैनी ब्रिज, कोलकाता का विद्यासागर सेतु और मुंबई में बनाए गए राजीव गांधी सी लिंक ब्रिज को इसी तकनीक के आधार पर बनाया गया है।
एसपीएस के साइट इंजीनियर सुशील थापा ने बताया कि बसोहली में स्टेड केबल ब्रिज का निर्माण तेज गति से चल रहा है। पिलर का काम पूरा हो चुका है, जबकि स्लैब डालने का काम तेजी से जारी है। सितंबर माह तक पुल को दोनों ओर से जोड़ दिया जाएगा और दिसंबर में इसे हैंडओवर करने की योजना है।
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सिंतबर माह तक दोनों और से पुल जुड जाएगा लेकिन इसपर वाहनों की आवाजाही औपचारिक रूप से दिसंबर में हस्तांतरण के बाद ही शुरू हो पाएगी।
वर्तमान में पुल निर्माण कार्य को तेजी से जारी रखा गया है और पंजाब और जम्मू-कश्मीर की ओर से तीन तीन स्लैब डाले जा चुके हैं।
योजनाबद्ध रूप से सितंबर माह तक दोनों ओर के बारह बारह स्लैब पूरे करने के बाद पंजाब और हिमाचल और जम्मू-कश्मीर को नया रूट मिल जाएगा।
दिसंबर माह तक अंतिम रूप देकर इसे हैंड ओवर करने की योजना पर तेजी से काम जारी है। व्यापार और पर्यटन की अपार संभावनाएं लिए रावी दरिया पर अपनी ही तरह का यह पहला और देश का चौथा पुल है, जिसे केबल स्टेयिंग तकनीक से तैयार किया जा रहा है।
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इसमें पिलर और सस्पेंशन के लिए तार के जरिए पुल को बांधा जाएगा। केबल स्टेड इस पुल का निर्माण 145 करोड़ की लागत से किया जा रहा है।
592 मीटर लंबे पुल में लगने वाली तार को जापान से आयात किया गया है। डेक लेवल से 88 मीटर ऊंचे टावर स्थापित किए गए हैं।
इसके साथ साथ पुल पर दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़े फुटपाथ का भी प्रावधान है। इस पुल के निर्माण का काम इरकान-एसपीएस कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समर्पित इस पुल के निर्माण का नींव पत्थर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मई 2011 में रखा था।
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राज्य को पंजाब और हिमाचल से जोड़ने वाले इस पुल को पर्यटन की संभावनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
बसोहली, बनी, भद्रवाह और घाटी के अधिकांश हिस्सों को जोड़ने के साथ ही हिमाचल से राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह पुल लाभदायक साबित होगा। सरथल की खूबसूरती को सामने लाने में भी पुल लाभदायक सिद्ध होगा।
तकनीकी चमत्कार के रूप में बसोहली के रावी दरिया पर बन रहे पुल देश में गिने-चुने ही हैं। जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद का नैनी ब्रिज, कोलकाता का विद्यासागर सेतु और मुंबई में बनाए गए राजीव गांधी सी लिंक ब्रिज को इसी तकनीक के आधार पर बनाया गया है।
एसपीएस के साइट इंजीनियर सुशील थापा ने बताया कि बसोहली में स्टेड केबल ब्रिज का निर्माण तेज गति से चल रहा है। पिलर का काम पूरा हो चुका है, जबकि स्लैब डालने का काम तेजी से जारी है। सितंबर माह तक पुल को दोनों ओर से जोड़ दिया जाएगा और दिसंबर में इसे हैंडओवर करने की योजना है।