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Jammu News: सोनम वांगचुक ने नौवें दिन जलवायु अनशन किया स्थगित, बोले- सरकार जल्द पूरी करें मांगें
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक ने नौवें दिन अनशन को सोमवार को समाप्त कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन को स्थगित कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उनकी मांगों को पूरा करेगी। अनशन के आखिरी दिन लेह और कारगिल जिले से सैकड़ों की तादाद में पहुंचे आम जन और विभिन्न संगठनों के लोग उन्हें अपना समर्थन देने के लिए पहुंचे। सोनम ने कहा, केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद लद्दाख के लोकतांत्रिक अधिकार कमजोर हुए हैं। ब्यूरोक्रेसी लद्दाख के मुद्दों को ठीक से समझ नहीं पा रही। इसी वजह से लोग अब पूर्ण राज्य की मांग कर रहे हैं। लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक संरक्षण के लिए केंद्र सरकार वादा कर चुकी है। इसके बाकायदा प्रावधान भी हैं, लेकिन फिर भी इसमें देरी की जा रही है। इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लद्दाख के संरक्षण से यहां के ग्लेशियर सुरक्षित होंगे। यही ग्लेशियर भारतीय उपमहाद्वीप में 200 करोड़ की आबादी का जीवन निर्धारित करते हैं। सोनम ने उम्मीद जताई कि जलवायु अनशन से लद्दाख की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंची होगी और यहां के प्रतिनिधियों को जल्द सरकार बुलाकर मुद्दों का समाधान करेगी।
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जम्मू। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक ने नौवें दिन अनशन को सोमवार को समाप्त कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन को स्थगित कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उनकी मांगों को पूरा करेगी। अनशन के आखिरी दिन लेह और कारगिल जिले से सैकड़ों की तादाद में पहुंचे आम जन और विभिन्न संगठनों के लोग उन्हें अपना समर्थन देने के लिए पहुंचे। सोनम ने कहा, केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद लद्दाख के लोकतांत्रिक अधिकार कमजोर हुए हैं। ब्यूरोक्रेसी लद्दाख के मुद्दों को ठीक से समझ नहीं पा रही। इसी वजह से लोग अब पूर्ण राज्य की मांग कर रहे हैं। लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक संरक्षण के लिए केंद्र सरकार वादा कर चुकी है। इसके बाकायदा प्रावधान भी हैं, लेकिन फिर भी इसमें देरी की जा रही है। इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लद्दाख के संरक्षण से यहां के ग्लेशियर सुरक्षित होंगे। यही ग्लेशियर भारतीय उपमहाद्वीप में 200 करोड़ की आबादी का जीवन निर्धारित करते हैं। सोनम ने उम्मीद जताई कि जलवायु अनशन से लद्दाख की आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंची होगी और यहां के प्रतिनिधियों को जल्द सरकार बुलाकर मुद्दों का समाधान करेगी।
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