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Jammu News: बदइंतजामी के दर्द में एक ही बेड पर गूंज रहीं दो किलकारियां
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- एसएमजीएस अस्पताल में नया लेबर रूम और मैटरनिटी ब्लॉक कर रहा उद्घाटन का इंतजार
- फायर और एयर लिफ्ट की एनओसी नहीं मिलने के कारण मरीजों के साथ तीमारदार भी परेशान
जम्मू। श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल में 243 बेड का अत्याधुनिक लेबर रूम और मैटरनिटी ब्लॉक तैयार होने के बावजूद एक ही बेड में दो प्रसूताओं का इलाज किया जा रहा है। पिछले साल नवंबर में बना आधुनिक भवन अभी तक उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण पुराना वार्ड बदइंतजामी का शिकार हो चुका है।
हालात ऐसे हैं कि अव्यवस्था के दर्द के बीच एक ही बेड पर दो किलकारियां गूंज रही हैं। भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण न सिर्फ मरीजों को बल्कि तीमारदारों को भी मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागाधिकारी के अनुसार फायर सेफ्टी और एयर लिफ्ट से जुड़ी एनओसी नहीं मिली है। इसके अलावा मंत्री नहीं आए जिनकी ओर से 31 करोड़ रुपये के ब्लॉक का शुभारंभ किया जाना है।
जम्मू संभाग के सबसे बड़े इस सरकारी अस्पताल में रोजाना सैकड़ों गर्भवती महिलाएं पहुंच रही हैं। ऐसे में नया ब्लॉक शुरू न होने से जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। अस्पताल की शुरुआत 1940 को तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह ने की थी। उस समय इसे सदर अस्पताल के नाम से जाना जाता था। शुरुआती दौर में मात्र 150 बेड थे, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए व्यापक बदलाव किए गए। अब करीब 700 हो गए। फिर भी स्थिति बदतर है।
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ऑपरेशन या साधारण डिलीवरी एक ही बेड पर
इन दिनों प्रसूताओं को प्रशासनिक सुस्ती और विभागीय तालमेल की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एक ही बेड पर दो मरीजों की ऑपरेशन या साधारण डिलीवरी की जा रही है जिससे उन्हें और परिवार को अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ब्लॉक को चालू नहीं किया तो हालात और भी खराब हो सकते हैं।
एक बेड पर दो महिलाओं का इलाज किया जा रहा है। इस कारण न तो वे ठीक से करवट ले पा रही हैं और न ही निजता का पालन हो रहा है। ऐसे में मरीज को कितनी तकलीफ होती होगी, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता।
- सुखदेव सिंह, रियासी।
अस्पताल के पीछे नया भवन बनकर तैयार है, पर उसे इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि बैठने तक की जगह नहीं है।
- मोहम्मद शकील, अनंतनाग।
ऑपरेशन के बाद आराम की जरूरत होती है। यहां तो एक ही बेड पर दो मरीजों को लिटाया जा रहा है। इतना ही नहीं, खून का इंतजाम करने की भी डिमांड की गई जिसे पूरा किया गया। लेकिन बाद में मरीज को खून चढ़ाया नहीं गया।
- सुखदेव सिंह, सुंदरबनी
अस्पताल में बेड की कमी है उसी को ध्यान में रखते हुए पुराने वार्ड के पास अत्याधुनिक लेबर रूम व मैटरनिटी ब्लॉक बनाया है। फायर सेफ्टी और एयर लिफ्ट से जुड़ी एनओसी मिलने के बाद नए ब्लॉक को शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. दारा सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जम्मू।
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- फायर और एयर लिफ्ट की एनओसी नहीं मिलने के कारण मरीजों के साथ तीमारदार भी परेशान
जम्मू। श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) अस्पताल में 243 बेड का अत्याधुनिक लेबर रूम और मैटरनिटी ब्लॉक तैयार होने के बावजूद एक ही बेड में दो प्रसूताओं का इलाज किया जा रहा है। पिछले साल नवंबर में बना आधुनिक भवन अभी तक उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण पुराना वार्ड बदइंतजामी का शिकार हो चुका है।
हालात ऐसे हैं कि अव्यवस्था के दर्द के बीच एक ही बेड पर दो किलकारियां गूंज रही हैं। भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण न सिर्फ मरीजों को बल्कि तीमारदारों को भी मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागाधिकारी के अनुसार फायर सेफ्टी और एयर लिफ्ट से जुड़ी एनओसी नहीं मिली है। इसके अलावा मंत्री नहीं आए जिनकी ओर से 31 करोड़ रुपये के ब्लॉक का शुभारंभ किया जाना है।
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जम्मू संभाग के सबसे बड़े इस सरकारी अस्पताल में रोजाना सैकड़ों गर्भवती महिलाएं पहुंच रही हैं। ऐसे में नया ब्लॉक शुरू न होने से जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। अस्पताल की शुरुआत 1940 को तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह ने की थी। उस समय इसे सदर अस्पताल के नाम से जाना जाता था। शुरुआती दौर में मात्र 150 बेड थे, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए व्यापक बदलाव किए गए। अब करीब 700 हो गए। फिर भी स्थिति बदतर है।
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ऑपरेशन या साधारण डिलीवरी एक ही बेड पर
इन दिनों प्रसूताओं को प्रशासनिक सुस्ती और विभागीय तालमेल की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। एक ही बेड पर दो मरीजों की ऑपरेशन या साधारण डिलीवरी की जा रही है जिससे उन्हें और परिवार को अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ब्लॉक को चालू नहीं किया तो हालात और भी खराब हो सकते हैं।
एक बेड पर दो महिलाओं का इलाज किया जा रहा है। इस कारण न तो वे ठीक से करवट ले पा रही हैं और न ही निजता का पालन हो रहा है। ऐसे में मरीज को कितनी तकलीफ होती होगी, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता।
- सुखदेव सिंह, रियासी।
अस्पताल के पीछे नया भवन बनकर तैयार है, पर उसे इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि बैठने तक की जगह नहीं है।
- मोहम्मद शकील, अनंतनाग।
ऑपरेशन के बाद आराम की जरूरत होती है। यहां तो एक ही बेड पर दो मरीजों को लिटाया जा रहा है। इतना ही नहीं, खून का इंतजाम करने की भी डिमांड की गई जिसे पूरा किया गया। लेकिन बाद में मरीज को खून चढ़ाया नहीं गया।
- सुखदेव सिंह, सुंदरबनी
अस्पताल में बेड की कमी है उसी को ध्यान में रखते हुए पुराने वार्ड के पास अत्याधुनिक लेबर रूम व मैटरनिटी ब्लॉक बनाया है। फायर सेफ्टी और एयर लिफ्ट से जुड़ी एनओसी मिलने के बाद नए ब्लॉक को शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. दारा सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जम्मू।