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इंटरव्यू: 'हेलीकॉप्टर बढ़ा नहीं सकते, घोड़े-खच्चर घटाने हैं...रोपवे ही कटड़ा की तरक्की का विकल्प', अंशुल गर्ग

Sat, 18 Jan 2025 02:37 PM IST
निकिता गुप्ता रोली खन्ना अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
रोली खन्ना अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 18 Jan 2025 02:37 PM IST
सार

कटड़ा में रोपवे प्रोजेक्ट के माध्यम से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, और यात्रा के समय में भी कमी आएगी।

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Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board CEO Anshul Garg said - will find appropriate solution after talking to all
अंशुल गर्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

माता वैष्णो देवी का दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेलीकॉप्टर बढ़ा नहीं सकते। पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के कारण ऐसा नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने घोड़ों की संख्या घटाने के भी निर्देश दिए हैं। ऐसे में रोपवे बड़ा और सुरक्षित विकल्प है। यह कहना है श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सीईओ अंशुल गर्ग का। गर्ग रोपवे को लेकर आशंकाओं को खारिज करते हैं। वह कहते हैं, सुविधाएं बढ़ने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी। लोग कहीं ज्यादा समय कटड़ा में रुकेंगे। इस सबसे स्थानीय लोगों की आमदनी तो बढ़ेगी ही, सुरक्षा भी बढ़ेगी। रोली खन्ना से विस्तार से बातचीत में उन्होंने हर मुद्दे पर बेबाकी से अपना पक्ष रखा

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सीईओ अंशुल गर्ग कहते हैं, हम कटड़ा से त्रिकुटा क्षेत्र तक के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए हम सभी हितधारकों के साथ बातचीत करके उचित समाधान तलाशेंगे। देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो यहां आना तो चाहते हैं, लेकिन 13 किमी की दुर्गम चढ़ाई की वजह से हिम्मत नहीं जुटा पाते। नौकरीपेशा लोगों के पास वक्त कम होता है, इसलिए ज्यादातर ऐसे लोग चाहकर भी यात्रा प्लान नहीं कर पाते।रोपवे की जरूरत इसलिए

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अंशुल गर्ग कहते हैं, रोजाना हजारों की संख्या में यहां यात्री आते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए सेफ रूट बेहद जरूरी है। कटड़ा के कारोबारियों व पालकी-पिट्ठू वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए रोपवे प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इससे माता वैष्णो देवी के दर पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी। संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तो बढ़ेंगे। हमारा अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से कटड़ा की अर्थव्यवस्था कई गुना तक बढ़ जाएगी। 

रोपवे से ऐसे बढ़ेगा कारोबार
सीईओ अंशुल गर्ग कहते हैं- देखिए, हम कटड़ा से लेकर त्रिकुटा क्षेत्र तक के विकास पर काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र में बहुत सारे मंदिर हैं। शिवखोड़ी में तो 25 लाख यात्री सालाना आते हैं। 

 बुजुर्ग, दिव्यांग या फिर जो मेडिकली अनफिट हैं, उनकी माता वैष्णो देवी के दर्शन की अभिलाषा अधूरी रह जाती है। वजह साफ है कि वे किन्हीं कारणों से 13 किलोमीटर की चढ़ाई नहीं चढ़ सकते हैं। रोपवे की सुविधा होने पर ऐसे श्रद्धालुओं की भी दर्शन की लालसा पूरी होगी।-नौकरीपेशा लोग छुट्टी के दिनों में यात्रा प्लान इसलिए नहीं कर पाते, क्योंकि आने-जाने में लगने वाले वक्त के साथ ही यहां चढ़ाई में भी काफी समय लगता है। समय घटेगा तो वे भी यहां आना चाहेंगे।

लोग वापसी में कटड़ा में रुकना चाहते हैं। कटड़ा को देखना चाहते हैं, पर समय की कमी के कारण वे ऐसा नहीं कर पाते। 13 किमी की चढ़ाई से होने वाली थकान और समय की कमी के कारण वे यहां नहीं रुकते। श्रद्धालु जल्दी दर्शन करके लौटेंगे तो उनके पास कटड़ा बाजार में घूमने का वक्त होगा। घूमेंगे-फिरेंगे तो लोग खर्च भी करेंगे।- दर्शन करने आने वालों में से 40-50 फीसदी ट्रेन से आने वाले यात्री होते हैं। ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी तो आने वाले यात्री भी बढ़ेंगे। इसका लाभ कटड़ा वालों को मिलेगा।

प्रदेश की आर्थिकी में कटड़ा का योगदानसीईओ के मुताबिक, पिछले साल जम्मू-कश्मीर में करीब दो करोड़ सैलानी आए। इनमें से माता वैष्णो देवी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब 1 करोड़ रही। यानी प्रदेश में 50 फीसदी धार्मिक पर्यटक आते हैं। आज होटल बढ़े हैं, खानपान की दुकानें बढ़ी हैं, तो उनमें इन सैलानियों का बड़ा योगदान है।

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निहारिका होगा सेंटर पाॅइंट, कटड़ा शहर बाईपास नहीं होगाअंशुल गर्ग कहते हैं, लोगों को लगता है कि कटड़ा शहर बाईपास हो रहा है, इससे उनकी आमदनी प्रभावित होगी। आमदनी न प्रभावित हो, इसके लिए स्थानीय लोगों ने निहारिका भवन के पास से ही रोपवे की टिकटिंग व्यवस्था करने का सुझाव दिया था। उनका यह भी सुझाव था कि यहीं पर तीर्थयात्रा का हब डवलप किया जाए। हमने इसी तरह योजना बनाई है।

पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी, बढ़ा नहीं सकते हेलीकाॅप्टरसीईओ अंशुल गर्ग कहते हैं, पिछले 20 साल से हम हेलीकाॅप्टरों की संख्या नहीं बढ़ा पाए हैं। हम पहले भी 1000 लोगों को हेलीकॉप्टरों से यात्रा करवा पाते थे और आज भी संख्या उतनी ही है। इस इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां संवेदनशील हैं। ईकोफ्रेंडली तरीके से ही हमें यहां आगे बढ़ना होगा।

रेस्क्यू में भी मददगार होगा रोपवेरोपवे सिर्फ यात्रा का समय ही नहीं घटाएगा, किसी भी इमरजेंसी रेस्क्यू में भी यह मददगार होगा। किसी को मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो रोपवे की मदद से उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सकेगी।

  •  03 साल में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
  • 91 लाख श्रद्धालु 2022 में माता वैष्णो देवी के दर्शन करने पहुंचे
  • 95 लाख से पार गया 2024 में श्रद्धालुओं का आंकड़ा
  • 45 से ज्यादा काउंटर यात्री रजिस्ट्रेशन के लिए हैं
  • 15-20 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगता पंजीकरण कराने में
  • 5 लाख तक का यात्रा दुर्घटना बीमा
  • 4 जगह निशुल्क लंगर लगाए जाते हैं
  • 10-12 हजार श्रद्धालु हर रोज इन लंगरों का लाभ उठाते हैं
  • 40 डाॅक्टर यात्री मार्ग पर शिविरों में मौजूद रहते हैं
  • 3000 लोगों के लिए दुर्गा भवन में निशुल्क रोकने की व्यवस्था
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