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Jammu News: अधिकमास के कारण इस बार देरी से श्राद्ध, 29 से 14 तक चलेंगे
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पितृपक्ष या श्राद्ध इस बार देरी से शुरू हो रहे हैं। अधिकमास के कारण सावन माह ही दो महीने तक चला। ऐसे में त्योहार व व्रत 12 दिन आगे बढ़ गए। आमतौर पर पितृपक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन अमावस्या तक यानी इसी माह में संपन्न होते थे, लेकिन इस बार 29 सितंबर से शुरू होंगे और 14 अक्तूबर तक चलेंगे। पितरों के निमित्त और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए कर्म किए जाएंगे। ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े, फल और मिठाई सहित दक्षिणा देने और गरीबों को खाना खिलाया जाता है। श्राद्ध करने से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त होता है और पितरों को संतुष्ट कर स्वयं की मुक्ति के मार्ग पर ले जाता है।
श्री मल्ल माता सुकराला देवी धार्मिक ट्रस्ट के प्रधान तृप्त शास्त्री ने बताया कि हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता है। वहीं, महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो उनका श्राद्ध उसी दिन ही किया जाता है। जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो यानी किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण, उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। साधु और संन्यासी का श्राद्ध द्वाद्वशी को किया जाता है। जिन्हें पितरों के देहांत की तिथि याद नहीं हो तो श्राद्ध अमावस्या को करें।
श्राद्ध की तिथियां
प्रतिपदा- पहला श्राद्ध 29 सितंबर दोपहर 3:28 से शाम 4:16 बजे के मध्य कर सकते हैं। दूसरा श्राद्ध 30 सितंबर दोपहर 12:22, तीसरा एक अक्तूबर सुबह 9:42, चौथा श्राद्ध दो अक्तूबर सुबह 7:37 के बाद करें। पांचवां तीन, छठा चार को, सातवां पांच, आठवां छह, नौवां सात, दसवां आठ, 11वां श्राद्ध नौ को करें। 10 को किसी भी तिथि का श्राद्ध नहीं होगा। 12वां 11, 13वां 12, 14वां 13 को और अमावस्या तिथि का श्राद्ध 14 अक्तूबर को समाप्त होगा।
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पूजन सामग्री - पलाश के फूल, कुशा, रोली, सिंदूर, फल, मिठाई, लौंग इलायची, छोटी सुपारी, रक्षासूत्र, चावल, जनेऊ, कपूर, हल्दी, देसी घी, माचिस, शहद, काला तिल, तुलसी पत्ता, पान का पत्ता, जौ, हवन सामग्री, गुड़, मिट्टी का दीया, रुई बत्ती, अगरबत्ती, दही, जौ का आटा, गंगाजल, दक्षिणा, खजूर, केला, सफेद फूल, उड़द, गाय का दूध, खीर, शक्कर, वस्त्र, स्वांक के चावल, मूंग, पुष्प, गन्ना।
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जम्मू। पितृपक्ष या श्राद्ध इस बार देरी से शुरू हो रहे हैं। अधिकमास के कारण सावन माह ही दो महीने तक चला। ऐसे में त्योहार व व्रत 12 दिन आगे बढ़ गए। आमतौर पर पितृपक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर अश्विन अमावस्या तक यानी इसी माह में संपन्न होते थे, लेकिन इस बार 29 सितंबर से शुरू होंगे और 14 अक्तूबर तक चलेंगे। पितरों के निमित्त और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए कर्म किए जाएंगे। ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े, फल और मिठाई सहित दक्षिणा देने और गरीबों को खाना खिलाया जाता है। श्राद्ध करने से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त होता है और पितरों को संतुष्ट कर स्वयं की मुक्ति के मार्ग पर ले जाता है।
श्री मल्ल माता सुकराला देवी धार्मिक ट्रस्ट के प्रधान तृप्त शास्त्री ने बताया कि हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता है। वहीं, महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा को हुई हो तो उनका श्राद्ध उसी दिन ही किया जाता है। जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो यानी किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण, उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। साधु और संन्यासी का श्राद्ध द्वाद्वशी को किया जाता है। जिन्हें पितरों के देहांत की तिथि याद नहीं हो तो श्राद्ध अमावस्या को करें।
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श्राद्ध की तिथियां
प्रतिपदा- पहला श्राद्ध 29 सितंबर दोपहर 3:28 से शाम 4:16 बजे के मध्य कर सकते हैं। दूसरा श्राद्ध 30 सितंबर दोपहर 12:22, तीसरा एक अक्तूबर सुबह 9:42, चौथा श्राद्ध दो अक्तूबर सुबह 7:37 के बाद करें। पांचवां तीन, छठा चार को, सातवां पांच, आठवां छह, नौवां सात, दसवां आठ, 11वां श्राद्ध नौ को करें। 10 को किसी भी तिथि का श्राद्ध नहीं होगा। 12वां 11, 13वां 12, 14वां 13 को और अमावस्या तिथि का श्राद्ध 14 अक्तूबर को समाप्त होगा।
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पूजन सामग्री - पलाश के फूल, कुशा, रोली, सिंदूर, फल, मिठाई, लौंग इलायची, छोटी सुपारी, रक्षासूत्र, चावल, जनेऊ, कपूर, हल्दी, देसी घी, माचिस, शहद, काला तिल, तुलसी पत्ता, पान का पत्ता, जौ, हवन सामग्री, गुड़, मिट्टी का दीया, रुई बत्ती, अगरबत्ती, दही, जौ का आटा, गंगाजल, दक्षिणा, खजूर, केला, सफेद फूल, उड़द, गाय का दूध, खीर, शक्कर, वस्त्र, स्वांक के चावल, मूंग, पुष्प, गन्ना।