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Jammu News: कश्मीर में मटन की किल्लत, शादी वाले घरों में बढ़ी परेशानी
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कश्मीर में शादियों के सीजन में मटन की आपूर्ति में कमी से शादी वाले घरों में परेशानी बढ़ गई है। बता दें कि मटन पारंपरिक कश्मीरी दावतों का एक प्रमुख हिस्सा है। मटन की उपलब्धता में कमी ने कैटरिंग जगत को भी चिंता में डाल दिया है। कारण मटन की किल्लत को देखते हुए तमाम परिवार शादी को स्थगित कर रहे या फिर मेनू को छोटा करने पर विचार कर रहे हैं।
होलसेल मटन डीलर्स एसोसिएशन कश्मीर के महासचिव मेहराजुद्दीन गनई ने पुष्टि की कि कुछ मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होने के कारण मटन की आपूर्ति ठप हो गई है। उन्होंने कहा वीरवार को चंडीगढ़ में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस अध्यक्ष सुखपाल सिंह खेरा से भी मुलाकात की। उन्होंने मुद्दे को उठाया लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री ने मुलाकात का समय नहीं दिया। गनई ने कहा कि हालांकि आधिकारिक तौर पर हड़ताल घोषित नहीं की गई है, लेकिन यह रोक खरीद दरों, अनुचित करों, अंतर-राज्यीय परिवहन बाधाओं और नियामक स्पष्टता की कमी से जुड़ी चिंताओं के कारण है। डीलरों का कहना है कि वे इन मुद्दों को महीनों से उठा रहे हैं।
गनई ने कहा, सरकार का कहना है कि मामला पंजाब का है। लेकिन इसका असर यहां कश्मीर में पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत आने वाले हफ्तों में शादियों की तैयारी कर रहे लोगों को होगी। कश्मीरी संस्कृति में, मटन सिर्फ़ एक आम खाद्य पदार्थ नहीं है। यह वाज़वान का आधार है जो स्थानीय शादियों की पहचान है। उन्होंने बताया कि कश्मीर में करीब एक हज़ार डीलर हैं, जिनके पास घाटी में बाहर से मटन आता है और सप्लाई ठप है। करीब 25 लाख से अधिक नग हर साल बाहरी राज्यों से यहां लाए जाते हैं।
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श्रीनगर के एक इवेंट प्लानर बुरहान नबी ने कहा, मटन के बिना यहां शादी का कोई मतलब नहीं। यही कारण है कि शादीवाले घरों में लोग परेशान हैं। शेफ और वाज़ा तब तक शादी शुरू नहीं करेंगे जब तक मांस थोक में उपलब्ध न हो। वहीं परिवार या तो कार्यक्रमों को स्थगित कर रहे हैं या मेनू को छोटा करने पर विचार कर रहे हैं।
डीलरों के अनुसार कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के मौखिक आश्वासन के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। गनई ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, पर कोई साफ जवाब नहीं मिला। कुछ ने तो इसकी ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार पर डाल दी जो जम्मू-कश्मीर में आने वाले पशुधन का मुख्य आपूर्तिकर्ता राज्य है। उन्होंने कहा, सरकार का दावा है कि वह इस पर काम कर रही है लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है।
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होलसेल मटन डीलर्स एसोसिएशन कश्मीर के महासचिव मेहराजुद्दीन गनई ने पुष्टि की कि कुछ मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होने के कारण मटन की आपूर्ति ठप हो गई है। उन्होंने कहा वीरवार को चंडीगढ़ में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस अध्यक्ष सुखपाल सिंह खेरा से भी मुलाकात की। उन्होंने मुद्दे को उठाया लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री ने मुलाकात का समय नहीं दिया। गनई ने कहा कि हालांकि आधिकारिक तौर पर हड़ताल घोषित नहीं की गई है, लेकिन यह रोक खरीद दरों, अनुचित करों, अंतर-राज्यीय परिवहन बाधाओं और नियामक स्पष्टता की कमी से जुड़ी चिंताओं के कारण है। डीलरों का कहना है कि वे इन मुद्दों को महीनों से उठा रहे हैं।
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गनई ने कहा, सरकार का कहना है कि मामला पंजाब का है। लेकिन इसका असर यहां कश्मीर में पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत आने वाले हफ्तों में शादियों की तैयारी कर रहे लोगों को होगी। कश्मीरी संस्कृति में, मटन सिर्फ़ एक आम खाद्य पदार्थ नहीं है। यह वाज़वान का आधार है जो स्थानीय शादियों की पहचान है। उन्होंने बताया कि कश्मीर में करीब एक हज़ार डीलर हैं, जिनके पास घाटी में बाहर से मटन आता है और सप्लाई ठप है। करीब 25 लाख से अधिक नग हर साल बाहरी राज्यों से यहां लाए जाते हैं।
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श्रीनगर के एक इवेंट प्लानर बुरहान नबी ने कहा, मटन के बिना यहां शादी का कोई मतलब नहीं। यही कारण है कि शादीवाले घरों में लोग परेशान हैं। शेफ और वाज़ा तब तक शादी शुरू नहीं करेंगे जब तक मांस थोक में उपलब्ध न हो। वहीं परिवार या तो कार्यक्रमों को स्थगित कर रहे हैं या मेनू को छोटा करने पर विचार कर रहे हैं।
डीलरों के अनुसार कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के मौखिक आश्वासन के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। गनई ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, पर कोई साफ जवाब नहीं मिला। कुछ ने तो इसकी ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार पर डाल दी जो जम्मू-कश्मीर में आने वाले पशुधन का मुख्य आपूर्तिकर्ता राज्य है। उन्होंने कहा, सरकार का दावा है कि वह इस पर काम कर रही है लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है।