{"_id":"608ebafa8ebc3e864c3d11c9","slug":"short-term-course-started-in-nit-srinagar-more-than-800-participants-are-participating","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआईटी श्रीनगर में एसटीसी शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू, 800 से अधिक प्रतिभागी ले रहे भाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआईटी श्रीनगर में एसटीसी शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू, 800 से अधिक प्रतिभागी ले रहे भाग
Sun, 02 May 2021 08:15 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sun, 02 May 2021 08:15 PM IST
सार
वर्चुअल इवेंट का आयोजन भौतिकी विभाग की ओर से सेमीकंडक्टर सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।
विज्ञापन
एनआईटी श्रीनगर
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) श्रीनगर में शनिवार को सेमीकंडक्टर फिजिक्स टू स्मार्ट डिवाइसेज टू इंटेलिजेंट ऑटोमेशन पर पांच दिवसीय शॉर्ट टर्म कोर्स (एसटीसी) शुरू हुआ। इसमें 800 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे। वर्चुअल इवेंट का आयोजन भौतिकी विभाग की ओर से सेमीकंडक्टर सोसायटी ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।
विज्ञापन
उद्घाटन सत्र में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लिया था। प्रो. एमए शाह पांच दिवसीय आयोजन के संयोजक हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक एनआईटी श्रीनगर प्रो. डॉ. राकेश सहगल ने की। इस दौरान उन्होंने सेमीकंडक्टर फिजिक्स टू स्मार्ट डिवाइसेज टू इंटेलिजेंट ऑटोमेशन के प्रति युवाओं को शिक्षित करने के लिए इस पहल के लिए भौतिकी विभाग के संकाय की सराहना की।
विज्ञापन
इस दौरान सेमी-कंडक्टर सोसायटी के चेयरमैन प्रो. आरके शर्मा ने कहा कि अब तकनीक स्वास्थ्य देखभाल में उन्नत हो गई है, यहां तक कि एक वर्तमान महामारी में भी, एचआरसीटी स्कैन कोविड 19 की शुरुआती पहचान और जीवन को बचाने के लिए जीवन रेखा साबित हो रही है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- कोवाक्सिन की खेप पहुंची, जम्मू-कश्मीर के दो जिलों में 18 प्लस का टीकाकरण शुरू
रजिस्ट्रार एनआईटी प्रो. केसर बुखारी ने कहा कि अगर हम किसी भी प्रकार के विकास के बारे में सोचते हैं तो विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपस्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम अधिक से अधिक परिष्कृत और छोटी तकनीकों की ओर अग्रसर हैं।
प्रो. बुखारी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अर्धचालक पदार्थों की क्षमता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण शोध प्रयास किए गए हैं। हाल के वर्षों में इस तकनीक ने कम लागत, पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ प्रौद्योगिकी के रूप में काफी संभावनाएं दिखाई हैं और यह एक शोध विषय बन गया है। ।.