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आत्मा से परमात्मा के मिलन का संदेश है शिव विवाह: साध्वी
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सांबा में पांच दिवसीय शिव कथा का समापन, अंतिम दिन सुनाई शिव विवाह की महिमा
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के सीमा मार्ग पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा शुरु की गई पांच दिवसीय शिव कथा का रविवार को समापन हुआ। इस दिन कथा पंडाल संगत से खचाखच भरा हुआ था। पंडाल के बाहर भी सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर साध्वी जयंती भारती ने शिव विवाह की महिमा सुनाई। कहा कि शिव विवाह आत्मा-परमात्मा के मिलन का संदेश संजोए हुए है।
बताया कि ईश्वर उपासना के दो ढंग हैं। पहला, जिसमें व्यक्ति बाहरी तौर पर पूजा, उपासना, धार्मिक स्थानों पर जाना, तीर्थ यात्रा करना इत्यादि शामिल है। और दूसरा, शिव नेत्र के खुल जाने पर अंतर जगत में ही प्रभु का ध्यान सुमिरन करना। महापुरुषों द्वारा रचित धार्मिक शास्त्र, धार्मिक स्थान और बाहरी पूजा पद्धति यह सब भी मनुष्य को अंतर जगत में प्रभु दर्शन से प्रभु मिलन का संदेश और प्रेरणा प्रदान करते हैं। प्रत्येक धार्मिक स्थान पर प्रज्वलित ज्योति प्रभु के निराकार सनातन स्वरूप का प्रतीक है। जब एक व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा प्राप्त होती है तब अंतर जगत में वह गुरु कृपा से ब्रह्म ज्ञान दीक्षा के समय तत्क्षण ही प्रभु के ज्योतिर्मय, प्रकाश रूप का दर्शन करता है।
कहा कि ईश्वर दर्शन प्रभु मिलन की अवस्था है। निरंतर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर व्यक्ति जब ईश्वर रूप हो जाता है, यह प्रभु में मिलन की अवस्था है। ग्रंथों में वर्णित है यदि ईश्वर समंदर सदृश्य है तो संत बादल के समान है। कथा समापन पर शिव विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें सारा पंडाल शिव मय हो गया। फूलों की वर्षा के साथ नाच गाकर सभी ने शिव विवाह उत्सव मनाया। सुंदर भजनों पर सारी संगत झूमी। कार्यक्रम का समापन आरती के साथ हुआ। मौके पर स्वामी सुचेता नंद, शशि भूषण गोदरेज एग्रोवित मैनेजर, रविंद्र सिंह सरपंच कैली मंडी सांबा, महेंद्र सिंह नेकां सांबा, जंगवीर सिंह भाजपा नेता, आदि विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के सीमा मार्ग पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा शुरु की गई पांच दिवसीय शिव कथा का रविवार को समापन हुआ। इस दिन कथा पंडाल संगत से खचाखच भरा हुआ था। पंडाल के बाहर भी सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर साध्वी जयंती भारती ने शिव विवाह की महिमा सुनाई। कहा कि शिव विवाह आत्मा-परमात्मा के मिलन का संदेश संजोए हुए है।
बताया कि ईश्वर उपासना के दो ढंग हैं। पहला, जिसमें व्यक्ति बाहरी तौर पर पूजा, उपासना, धार्मिक स्थानों पर जाना, तीर्थ यात्रा करना इत्यादि शामिल है। और दूसरा, शिव नेत्र के खुल जाने पर अंतर जगत में ही प्रभु का ध्यान सुमिरन करना। महापुरुषों द्वारा रचित धार्मिक शास्त्र, धार्मिक स्थान और बाहरी पूजा पद्धति यह सब भी मनुष्य को अंतर जगत में प्रभु दर्शन से प्रभु मिलन का संदेश और प्रेरणा प्रदान करते हैं। प्रत्येक धार्मिक स्थान पर प्रज्वलित ज्योति प्रभु के निराकार सनातन स्वरूप का प्रतीक है। जब एक व्यक्ति को ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा प्राप्त होती है तब अंतर जगत में वह गुरु कृपा से ब्रह्म ज्ञान दीक्षा के समय तत्क्षण ही प्रभु के ज्योतिर्मय, प्रकाश रूप का दर्शन करता है।
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कहा कि ईश्वर दर्शन प्रभु मिलन की अवस्था है। निरंतर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर व्यक्ति जब ईश्वर रूप हो जाता है, यह प्रभु में मिलन की अवस्था है। ग्रंथों में वर्णित है यदि ईश्वर समंदर सदृश्य है तो संत बादल के समान है। कथा समापन पर शिव विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें सारा पंडाल शिव मय हो गया। फूलों की वर्षा के साथ नाच गाकर सभी ने शिव विवाह उत्सव मनाया। सुंदर भजनों पर सारी संगत झूमी। कार्यक्रम का समापन आरती के साथ हुआ। मौके पर स्वामी सुचेता नंद, शशि भूषण गोदरेज एग्रोवित मैनेजर, रविंद्र सिंह सरपंच कैली मंडी सांबा, महेंद्र सिंह नेकां सांबा, जंगवीर सिंह भाजपा नेता, आदि विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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