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Jammu News: जीवन नष्ट होने से पहले शव से शिव यात्रा पर अग्रसर हो जाओ
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सांबा के सीमा मार्ग पर जारी शिव कथा में बताया शिव शृंगार का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के सीमा मार्ग पर एक रिजॉर्ट में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में जारी पांच दिवसीय शिव कथा चौथे दिन शनिवार को भी जारी रही। आशुतोष महाराज की शिष्या कथा व्यास साध्वी जयंती भारती ने सुमधुर संगीत के साथ पवन कथा का वाचन किया।
कहा कि भगवान शिव का अद्भुत शृंगार मनुष्य को आत्मा के उत्थान का संदेश प्रदान करता है। भोलेनाथ के गले में नर मुंडों की माला यह समझाती है कि जीवन क्षण भंगुर है। जीवन के नष्ट होने से पहले शिव तत्व को जान लो और उसकी प्राप्ति के लिए प्रयासरत हो जाओ। शव से शिव तक की यात्रा पर अग्रसर हो जाओ। भोलेनाथ की जटाओं का मुकुट ध्यान लगाने की कला सिखा रहा है। मानव का मन समस्याओं का कारण है। संसार की माया उसे उलझाए रखती है। शिव तत्व का ध्यान और उनका चिंतन चिंता से मुक्ति का साधन है। ध्यान केवल नेत्र मूंदकर बैठना मात्र नहीं है। ध्यान के लिए ईश्वर दर्शन अत्यंत आवश्यक है। ईश्वर दर्शन की यह अनमोल निधि प्राप्त करने के लिए पूर्ण सतगुरु की शरणागत होना संसार का अटल अनिवार्य नियम है। भगवान शिव गुरु गीता में गुरु की महिमा और पहचान बताते हुए कहते हैं कि जो अखंड, सर्व व्यापक ईश्वर का मनुष्य के अंतः करण में दर्शन करवा दे। उसे ही पूर्ण सतगुरु कहते हैं। ऐसे महापुरुष के चरणों में नमन है। प्रभु की पावन आरती के साथ कथा कार्यक्रम को विराम दिया गया। कथा में शहर के स्वामी सुचेता नंद, स्वामी सुकर्म आनंद, जंगबीर सिंह चिक्कू, चंद्र सिंह जयदीप सिंह, अशोक सिंह, आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के सीमा मार्ग पर एक रिजॉर्ट में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में जारी पांच दिवसीय शिव कथा चौथे दिन शनिवार को भी जारी रही। आशुतोष महाराज की शिष्या कथा व्यास साध्वी जयंती भारती ने सुमधुर संगीत के साथ पवन कथा का वाचन किया।
कहा कि भगवान शिव का अद्भुत शृंगार मनुष्य को आत्मा के उत्थान का संदेश प्रदान करता है। भोलेनाथ के गले में नर मुंडों की माला यह समझाती है कि जीवन क्षण भंगुर है। जीवन के नष्ट होने से पहले शिव तत्व को जान लो और उसकी प्राप्ति के लिए प्रयासरत हो जाओ। शव से शिव तक की यात्रा पर अग्रसर हो जाओ। भोलेनाथ की जटाओं का मुकुट ध्यान लगाने की कला सिखा रहा है। मानव का मन समस्याओं का कारण है। संसार की माया उसे उलझाए रखती है। शिव तत्व का ध्यान और उनका चिंतन चिंता से मुक्ति का साधन है। ध्यान केवल नेत्र मूंदकर बैठना मात्र नहीं है। ध्यान के लिए ईश्वर दर्शन अत्यंत आवश्यक है। ईश्वर दर्शन की यह अनमोल निधि प्राप्त करने के लिए पूर्ण सतगुरु की शरणागत होना संसार का अटल अनिवार्य नियम है। भगवान शिव गुरु गीता में गुरु की महिमा और पहचान बताते हुए कहते हैं कि जो अखंड, सर्व व्यापक ईश्वर का मनुष्य के अंतः करण में दर्शन करवा दे। उसे ही पूर्ण सतगुरु कहते हैं। ऐसे महापुरुष के चरणों में नमन है। प्रभु की पावन आरती के साथ कथा कार्यक्रम को विराम दिया गया। कथा में शहर के स्वामी सुचेता नंद, स्वामी सुकर्म आनंद, जंगबीर सिंह चिक्कू, चंद्र सिंह जयदीप सिंह, अशोक सिंह, आदि मौजूद रहे।
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