JNU में लाल झंडा फहराने वाली पहली कश्मीरी शेहला राशिद
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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन चुनाव में जीत हासिल करने वाली शेहला राशिद शोरा पहली कश्मीरी छात्रा हैं। शोरा ने आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) उम्मीदवार के रूप में उपाध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया।
शेहला ने कहा कि यह उपलब्धि उनके जीवन में अहम भूमिका अदा करेगी। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वैसे तो दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू की छात्र राजनीति में काफी अंतर है, फिर भी उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में आने से कोई परहेज नहीं है।
जेएनयू में लाल झंडा (वाम स्टूडेंट यूनियन) फहराने वाली शेहला काफी समय से महिलाओं के अधिकारों और मानवाधिकार के लिए संघर्ष करती रही हैं। अव वह ज्यादा सक्रिय और प्रभावी ढंग से लोगों के हक की लड़ाई लड़ सकेंगी।
आईआईएम बंगलूरू की स्टूडेंट रही हैं शेहला
जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के चार पदों के लिए हुए चुनाव में इस साल सबसे ज्यादा 1387 वोट हासिल करने वाली कश्मीरी छात्रा को विश्वास था कि वह बड़ी कामयाबी हासिल करेगी। हालांकि आइसा के अध्यक्ष पद हार जाने का उन्हें भारी मलाल है।
शेहला ने कहा, ‘अध्यक्ष के लिए ऐसे बुरे परिणाम की उम्मीद नहीं थी। हम पिछले छह सालों से इस पद पर काबिज हैं। इस पद के उम्मीदवार की शख्सियत, बोलचाल का अंदाज काफी मायने रखता है।
हो सकता है, इसमें हम कहीं पिछड़ गए होंगे।’ शेहला ने कहा कि शिक्षा का राजनीतिकरण न हो, यह उनका मुख्य उद्देश्य होगा। जेएनयू में समाजशास्त्र की स्टूडेंट शेहला इससे पहले एनआईटी श्रीनगर और आईआईएम बंगलूरू की स्टूडेंट रही हैं। उनकी अपनी वेबसाइट है, जिसका शीर्षक ‘बोल की लब आजाद हैं तेरे’ है। जिसमें वह अक्सर अपने विचार लिखती रहती हैं।
कश्मीर यूनिवर्सिटी को जेएनयू बनाने की सोच
जेएनयू में छात्र-छात्राएं जिस खुले माहौल में पढ़ाई करती हैं, वैसा माहौल कश्मीर और देश की अन्य यूनिवर्सिटी में बनाना शेहला का सपना है। श्रीनगर की शेहला कहती हैं, ‘जेएनयू में रात के समय में भी छात्राएं बिना किसी भय के एक हास्टल से दूसरे हास्टल जाती हैं।
वहां छात्र और छात्राओं में कोई भेद नहीं है। वैसा माहौल कश्मीर यूनिवर्सिटी में भी बनना चाहिए। लेकिन वहां दबंगई वाली छात्र राजनीति चलती है।
इसके लिए छात्रों को सोच में बदलाव लाना होगा। 2012 में आइसा ने कश्मीर यूनिवर्सिटी छात्र राजनीति में कदम रखा था, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। लेकिन फिर प्रयास किए जाएंगे।