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राष्ट्रीय परियोजनाओं के काम में दिखनी चाहिए गंभीरता व समन्वय : मुख्यमंत्री

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Seriousness and coordination should be seen in the work of national projects: Chief Minister
-मुख्यमंत्री ने की राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
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-भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी में देरी पर विभागों जल्द काम करने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर के भविष्य के आर्थिक विकास के लिए मुख्य मार्ग हैं। इनका समय पर और गुणवत्तापूर्ण पूरा होना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ये बातें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रदेश में प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल विकासात्मक बल्कि रणनीतिक महत्व रखती हैं। यह सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है कि परियोजनाओं में कोई अनावश्यक देरी न हो। केंद्र भी इन परियोजनाओं की निगरानी कर रहा है। ऐसे में गंभीरता और समन्वय दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी के कारण होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त की है।
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उन्होंने संबंधित विभागों को इन प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने का निर्देश दिया। उन्होंने विशेष रूप से निष्पादन एजेंसियों और जिला प्रशासन के बीच अंतर-विभागीय तालमेल बढ़ाने का आह्वान किया। विस्थापन और संपत्ति अधिग्रहण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष और सुनियोजित पुनर्वास और पुनर्स्थापन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को समय पर और निष्पक्ष पुनर्वास दिया जाना चाहिए।
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उन्होंने कुछ हिस्सों में सुरक्षा संबंधी बाधाओं की भी समीक्षा की और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा एजेंसियों के साथ पर्याप्त समन्वय के साथ परियोजना की गतिविधियों को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करें। इस मौके पर मुख्यमंत्री को एनएचएआई, एनएचआईडीसीएल, बीआरओ और पीडब्ल्यूडी की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने समयबद्ध मंजूरी और सक्रिय प्रशासनिक सुविधा का आह्वान किया।
लोक निर्माण (आरएंडबी) के सचिव भूपिंदर कुमार ने बताया कि लगभग एक दर्जन प्रमुख राजमार्ग और एक एक्सप्रेसवे जो 1800 किलोमीटर से अधिक लंबे हैं, वर्तमान में उनका कार्य अलग-अलग चरणों में है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (जम्मू-श्रीनगर), एनएच-144ए (जम्मू-राजौरी-पुंछ) और दिल्ली-अमृतसर-कटड़ा एक्सप्रेसवे (एनई-5) जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं।

बैठक में 12 प्रमुख सुरंग परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें ज़ोजी ला सुरंग, ज़ेड-मोड़ सुरंग, पंथाल-मगरकोट सुरंग और अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से कई परियोजनाओं का निर्माण के अंतिम चरण में हैं। उद्योग और वाणिज्य आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह ने निर्माण सामग्री और खनन अनुमतियों की उपलब्धता के बारे में बैठक को जानकारी दी। सलाहकार नासिर असलम वानी ने यातायात की भीड़भाड़ वाले प्रमुख बिंदुओं को चिह्नित किया। उन्होंने इनका तोड़ ढूंढने की भी बात कही। उन्होंने राजमार्ग डिजाइन में लंबे समय तक यातायात प्रबंधन सुविधाओं को शामिल करने की बात कही।
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