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आतंकी बुरहान वानी की बरसी पर घाटी के अधिकांश बाजार खुले रहे
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श्रीनगर। आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की बरसी पर कश्मीर घाटी में अधिकतर इलाकों में बुधवार को रोज की तरह बाजार खुले। कुछ इलाकों में हालात तनावपूर्ण बने रहे लेकिन सुरक्षा बलों की सतर्कता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर रखे थे। हालात की गंभीरता के मद्देनजर 8 और 13 जुलाई को किसी भी सैन्य काफिले के चलने की अनुमति भी नहीं थी। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा था कि आतंकी इस अवसर पर अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए किसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
बुधवार को घाटी के अधिकतर इलाकों में रोज की तरह दुकानें खुलीं। कुछ इलाकों में शरारती तत्वों ने दुकानदारों को धमका कर दुकानें बंद करवाईं। इसके चलते हालात तनावपूर्ण बने रहे। दक्षिणी, उत्तरी और मध्य कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में पहले से ही सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। जगह-जगह अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। पूरे दक्षिणी कश्मीर के साथ साथ उत्तरी कश्मीर के सोपोर इलाके में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं। कहीं से किसी तरह की कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली है।
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इस बार किसी अलगाववादी संगठन ने बंद का आह्वान नहीं किया
हिजबुल का पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी वर्ष 2016 में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी मौत के बाद घाटी में हिंसा का दौरा शुरू हो गया था। इसके बाद कई महीने तक घाटी में हालात तनावपूर्ण बने रहे। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों की जानें भी गई, जबकि सैकड़ों घायल भी हुए थे। इसके बाद हर साल अलगाववादियों की तरफ से बुरहान वानी की बरसी पर बंद का आह्वान किया जाता रहा है लेकिन पिछले वर्ष पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद बदलाव सामने आया है। इस बार किसी भी अलगाववादी संगठन ने ऐसा आह्वान नहीं किया।
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फर्जी पत्र हुआ था वायरल
बुरहान की बरसी को लेकर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के नाम पर सोशल मीडिया में एक पत्र जरूर मंगलवार को वायरल हुआ था। इसमें लोगों से 8 और 13 जुलाई को बंद का समर्थन करने की अपील की गई थी लेकिन इस पर तुरंत एक्शन लेते हुए पुलिस ने इस पत्र को फर्जी बता केस दर्ज कर लिया। साथ ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई, जो सोशल मीडिया पर इसे शेयर करेंगे। इसका भी काफी असर पड़ा।
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बुधवार को घाटी के अधिकतर इलाकों में रोज की तरह दुकानें खुलीं। कुछ इलाकों में शरारती तत्वों ने दुकानदारों को धमका कर दुकानें बंद करवाईं। इसके चलते हालात तनावपूर्ण बने रहे। दक्षिणी, उत्तरी और मध्य कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में पहले से ही सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। जगह-जगह अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। पूरे दक्षिणी कश्मीर के साथ साथ उत्तरी कश्मीर के सोपोर इलाके में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं ठप रहीं। कहीं से किसी तरह की कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली है।
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इस बार किसी अलगाववादी संगठन ने बंद का आह्वान नहीं किया
हिजबुल का पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी वर्ष 2016 में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी मौत के बाद घाटी में हिंसा का दौरा शुरू हो गया था। इसके बाद कई महीने तक घाटी में हालात तनावपूर्ण बने रहे। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों की जानें भी गई, जबकि सैकड़ों घायल भी हुए थे। इसके बाद हर साल अलगाववादियों की तरफ से बुरहान वानी की बरसी पर बंद का आह्वान किया जाता रहा है लेकिन पिछले वर्ष पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद बदलाव सामने आया है। इस बार किसी भी अलगाववादी संगठन ने ऐसा आह्वान नहीं किया।
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फर्जी पत्र हुआ था वायरल
बुरहान की बरसी को लेकर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के नाम पर सोशल मीडिया में एक पत्र जरूर मंगलवार को वायरल हुआ था। इसमें लोगों से 8 और 13 जुलाई को बंद का समर्थन करने की अपील की गई थी लेकिन इस पर तुरंत एक्शन लेते हुए पुलिस ने इस पत्र को फर्जी बता केस दर्ज कर लिया। साथ ही उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई, जो सोशल मीडिया पर इसे शेयर करेंगे। इसका भी काफी असर पड़ा।