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विधानसभा सत्र का बहिष्कार करेंगे सचिवालय कर्मी
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Tue, 17 May 2016 11:26 PM IST
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा
- फोटो : File Photo
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वेतन विसंगतियों और प्रोफेशनल प्रगति मामलों पर सरकार के रुख से नाराज नागरिक सचिवालय कर्मियों ने विधानसभा सत्र के बहिष्कार का एलान किया है। सिविल सेक्रेटेरिएट इंप्लाइज कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक में कमेटी सदस्यों ने कहा कि नान गजटेड और चतुर्थ श्रेणी मुलाजिमों के मामलों को लेकर सरकार का रवैया उदासीन है।
बावजूद इसके कि वह पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद सहित वर्तमान सरकार के ओहदेदारों से इन मामलों पर चर्चा कर चुके हैं। अब उनके सामने विधानसभा सत्र के बहिष्कार का ही विकल्प बचा है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए गुलाम रसूल मीर ने कहा कि निचले मुलाजिमों की समस्याओं को लेकर सरकार ढुलमुल रवैया अपना रही है। सरकार के उच्च अधिकारियों से कई दफा आश्वासन मिले हैं लेकिन हकीकत में कोई बदलाव नहीं आ रहा है।
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हाल ही में उच्च न्यायालय को एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपकर सामान्य प्रशासन विभाग ने जो स्थिति बयान की है वह मुलाजिमों के लंबित मामलों के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाती है। जम्मू कश्मीर कैडर के आईएएस सहित केएएस और केपीएस कैडर की समीक्षा के लिए राज्यपाल ने एसएसी की बैठक का आयोजन किया था।
बाकायदा कैडर समीक्षा पर मुहर लगा दी गई, लेकिन नान गजटेड और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कैडर की समीक्षा करना सरकार ने उचित नहीं समझा। ऐसे हालात में सचिवालय कर्मचारियों को अपना संघर्ष तेज करना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार तनातनी का माहौल शांत करने के लिए कुछ उपाय करेगी।
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बावजूद इसके कि वह पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद सहित वर्तमान सरकार के ओहदेदारों से इन मामलों पर चर्चा कर चुके हैं। अब उनके सामने विधानसभा सत्र के बहिष्कार का ही विकल्प बचा है।
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बैठक की अध्यक्षता करते हुए गुलाम रसूल मीर ने कहा कि निचले मुलाजिमों की समस्याओं को लेकर सरकार ढुलमुल रवैया अपना रही है। सरकार के उच्च अधिकारियों से कई दफा आश्वासन मिले हैं लेकिन हकीकत में कोई बदलाव नहीं आ रहा है।
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हाल ही में उच्च न्यायालय को एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपकर सामान्य प्रशासन विभाग ने जो स्थिति बयान की है वह मुलाजिमों के लंबित मामलों के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाती है। जम्मू कश्मीर कैडर के आईएएस सहित केएएस और केपीएस कैडर की समीक्षा के लिए राज्यपाल ने एसएसी की बैठक का आयोजन किया था।
बाकायदा कैडर समीक्षा पर मुहर लगा दी गई, लेकिन नान गजटेड और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कैडर की समीक्षा करना सरकार ने उचित नहीं समझा। ऐसे हालात में सचिवालय कर्मचारियों को अपना संघर्ष तेज करना पड़ रहा है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार तनातनी का माहौल शांत करने के लिए कुछ उपाय करेगी।