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जम्मू नगर निगम की बैठक: अब 5वीं तक बच्चे डोगरी भाषा में कर सकेंगे पढ़ाई, छह प्रस्ताव मंजूर, आठ पर नहीं हुई बात
Wed, 28 Jun 2023 03:49 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
जम्मू नगर निगम की बैठक: अब 5वीं तक बच्चे डोगरी भाषा में कर सकेंगे पढ़ाई, छह प्रस्ताव मंजूर, आठ पर नहीं हुई बात
जम्मू नगर निगम की बैठक: अब 5वीं तक बच्चे डोगरी भाषा में कर सकेंगे पढ़ाई, छह प्रस्ताव मंजूर, आठ पर नहीं हुई बात
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jun 2023 03:49 PM IST
सार
जम्मू नगर निगम की बैठक में प्राइमरी स्कूलों में डोगरी भाषा को अनिवार्य तौर पर पढ़ाने का रहा, जिसे सर्वसहमति के साथ हरी झंडी दे दी गई। अब पांचवीं तक बच्चे डोगरी भाषा में पढ़ाई कर सकेंगे।
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Jammu Municipal Corporation
- फोटो : संजय कुमार
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विस्तार
जम्मू नगर निगम के सदन की पिछली बैठक जहां हंगामे की भेंट चढ़ गई थी, तो वहीं मंगलवार को आयोजित दूसरी बैठक में बिना कांग्रेस के छह प्रस्ताव पास हो गए। सबसे अहम प्रस्ताव प्राइमरी स्कूलों में डोगरी भाषा को अनिवार्य तौर पर पढ़ाने का रहा, जिसे सर्वसहमति के साथ हरी झंडी दे दी गई। अब पांचवीं तक बच्चे डोगरी भाषा में पढ़ाई कर सकेंगे।
पार्षद दिनेश गुप्ता के इस प्रस्ताव समेत छह चर्चा के बाद मंजूर किए गए। पहली बैठक में डेढ़ लाख रुपये खर्च होने के बाद भी परिणाम शून्य रहा तो इस बार शहर के हिस्से में कुछ मिलता नजर आया। हालांकि, विपक्ष की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया गया। आठ प्रस्तावों पर कोई बात तक नहीं की गई। मीडिया को अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसा कोविड के समय भी हुआ था, जब शारीरिक दूरी के कारण कवरेज की आज्ञा नहीं थी।
दरअसल, 24 जून को चार माह 23 दिन बाद पहली बैठक हुई, तब न प्रस्ताव, न ही प्रश्नों पर मंथन हो पाया। विपक्ष के अलावा भाजपा के भी 44 में से 10 पार्षद गायब हो गए। दोपहर तीन बजे के बाद बैठक मात्र चर्चा तक सीमित रही। दो दिन बाद हुई जनरल हाउस की बैठक का कांग्रेस पार्षदों ने फिर बहिष्कार कर दिया। प्रस्तावों को सूचीबद्ध नहीं करने पर कांग्रेस नेता सीटें छोड़ चलते बने। इसके बाद बिना कांग्रेस के सदन की प्रक्रिया चलती रही।
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विपक्षी नेता - क्याें रुके जब संपत्ति शुल्क पर मंथन नहीं होना
कार्यवाही शुरू होते ही जैसे ही उप मेयर बलदेव सिंह का प्रस्ताव आया तो विपक्ष नेता एवं कांग्रेस पार्षद द्वारका चौधरी ने कहा कि हमारे प्रस्ताव बहस से बाहर क्याें किए गए। हमारे प्रस्ताव भी लिए जाएं। जब उनकी बात नहीं सुनी तो वह बाहर आ गए। मेयर से यह भी कहा कि आपने तो कैमरों के प्रसारण पर भी भेदभाव किया है, जिसकी बात नहीं सुननी उसकी तरफ कैमरा ही नहीं। चौधरी ने संपत्ति शुल्क के संबंध में प्रस्ताव पेश किया था, जिसे नामंजूर कर दिया गया। आरोप लगाया कि पांच महीने तक मेयर ने भाजपा के दबाव में आकर बैठक नहीं होने दी। अब प्रस्ताव ही गायब कर दिया गया। फेसबुक पर कार्यवाही को लाइव दिखाया गया, जिसमें भी पक्षपात किया। अपने लोगों को ही प्राथमिकता दी गई।
... जब पूर्व मेयर के सवाल पर एकमत हुए सभी पार्षद
दोपहर 12 बजे जैसे ही नए भवन निर्माण उपनियमों पर चर्चा होने लगी तो पूर्व मेयर एवं भाजपा पार्षद चंद्र मोहन गुप्ता ने कहा कि यह कौन सा वक्त है इस पर चर्चा करने का, क्योंकि अभी पर्याप्त समय नहीं है। इस समय सबसे जरूरी बिजली-पानी का मामला है। उप नियमों पर बात करने के लिए अलग से दिन तय हो। इस पर भाजपा के बाकी पार्षद भी सहमत दिखे। पार्षदों से वोटिंग करवाई गई। बहुमत आया कि चर्चा बाद में की जाए। तय किया कि तीन जुलाई को हाउस की दोबारा बैठक होगी। इसमें सिर्फ भवन उपनियमों पर मंथन होगा। हालांकि, 24 जून की दोपहर को भी इस मसले पर चर्चा हो चुकी थी।
रेहड़ियों के लाइसेंस - मेयर साहब आज आप ही एक्ट की बात कर रहे
पार्षद अमित गुप्ता ने रेहड़ियों के लाइसेंस को लेकर प्रस्ताव लाया। मांग की कि सिर्फ जम्मू के लोगों को ही लाइसेंस दिए जाएं। मेयर राजेंद्र शर्मा ने कहा कि यह केंद्रीय एक्ट का मामला है। गुप्ता ने जवाब दिया कि जब आप पार्षद थे, तब मैंने आपसे सीखा था कि हाउस सर्वोपरि है। एक्ट की बातें आपसे सीखी थीं। आज आप ही एक्ट पर बात कर रहे हैं।
मंथन के बाद इन प्रस्तावों को हरी झंडी
उप मेयर बलदेव सिंह ने पद्मश्री, पद्मभूषण व अन्य गैलेंटरी अवॉर्ड धारकों को मूलभूत सुविधाओं में विशेषाधिकार देने का पहला प्रस्ताव प्रस्ताव रखा, जिसे पास कर दिया। इसके अलावा औपचारिकताएं पूरी होने तक पेंशन न रोकना (पार्षद सुभाष शर्मा), पेंशन की वेरिफिकेशन प्रक्रिया समाज कल्याण विभाग खुद करे (पार्षद पवन सिंह), उस्ताद मोहल्ले में जंबू सामुदायिक हाल का व्यावसायिक इस्तेमाल न हो (पार्षद सुनीत कुमार), राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज की जाए (पार्षद जीत कुमार) के प्रस्ताव पास हुए।
...और ये प्रस्ताव लटक गए
अनीता शर्मा - कर्मियों की डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी पुनर्गठित हो
पूर्णिमा शर्मा - गरीबों की मदद के लिए निगम के पास विशेष फंड की व्यवस्था हो।
अमित गुप्ता - जम्मू वासियों को रेहड़ी के लाइसेंस दिए जाएं।
भानु महाजन - विभिन्न विभागों के लटके तार के लिए जुर्माना लगाया जाए।
सुरेंद्र शर्मा - जम्मू में 3.8 किलोग्राम और कश्मीर में 11 किलो आटा क्यों दिया जा रहा।
राजेंद्र सिंह जमवाल - बेसहारा नवजात बच्चों के लिए फोस्टर केयर सेंटर बनाया जाए।
निधि मंगोत्रा - रात के समय भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोले जाएं।
सोनिका शर्मा - गरीबाें के लिए पेंशन प्रक्रिया सरल की जाए।
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पार्षद दिनेश गुप्ता के इस प्रस्ताव समेत छह चर्चा के बाद मंजूर किए गए। पहली बैठक में डेढ़ लाख रुपये खर्च होने के बाद भी परिणाम शून्य रहा तो इस बार शहर के हिस्से में कुछ मिलता नजर आया। हालांकि, विपक्ष की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया गया। आठ प्रस्तावों पर कोई बात तक नहीं की गई। मीडिया को अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसा कोविड के समय भी हुआ था, जब शारीरिक दूरी के कारण कवरेज की आज्ञा नहीं थी।
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दरअसल, 24 जून को चार माह 23 दिन बाद पहली बैठक हुई, तब न प्रस्ताव, न ही प्रश्नों पर मंथन हो पाया। विपक्ष के अलावा भाजपा के भी 44 में से 10 पार्षद गायब हो गए। दोपहर तीन बजे के बाद बैठक मात्र चर्चा तक सीमित रही। दो दिन बाद हुई जनरल हाउस की बैठक का कांग्रेस पार्षदों ने फिर बहिष्कार कर दिया। प्रस्तावों को सूचीबद्ध नहीं करने पर कांग्रेस नेता सीटें छोड़ चलते बने। इसके बाद बिना कांग्रेस के सदन की प्रक्रिया चलती रही।
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विपक्षी नेता - क्याें रुके जब संपत्ति शुल्क पर मंथन नहीं होना
कार्यवाही शुरू होते ही जैसे ही उप मेयर बलदेव सिंह का प्रस्ताव आया तो विपक्ष नेता एवं कांग्रेस पार्षद द्वारका चौधरी ने कहा कि हमारे प्रस्ताव बहस से बाहर क्याें किए गए। हमारे प्रस्ताव भी लिए जाएं। जब उनकी बात नहीं सुनी तो वह बाहर आ गए। मेयर से यह भी कहा कि आपने तो कैमरों के प्रसारण पर भी भेदभाव किया है, जिसकी बात नहीं सुननी उसकी तरफ कैमरा ही नहीं। चौधरी ने संपत्ति शुल्क के संबंध में प्रस्ताव पेश किया था, जिसे नामंजूर कर दिया गया। आरोप लगाया कि पांच महीने तक मेयर ने भाजपा के दबाव में आकर बैठक नहीं होने दी। अब प्रस्ताव ही गायब कर दिया गया। फेसबुक पर कार्यवाही को लाइव दिखाया गया, जिसमें भी पक्षपात किया। अपने लोगों को ही प्राथमिकता दी गई।
... जब पूर्व मेयर के सवाल पर एकमत हुए सभी पार्षद
दोपहर 12 बजे जैसे ही नए भवन निर्माण उपनियमों पर चर्चा होने लगी तो पूर्व मेयर एवं भाजपा पार्षद चंद्र मोहन गुप्ता ने कहा कि यह कौन सा वक्त है इस पर चर्चा करने का, क्योंकि अभी पर्याप्त समय नहीं है। इस समय सबसे जरूरी बिजली-पानी का मामला है। उप नियमों पर बात करने के लिए अलग से दिन तय हो। इस पर भाजपा के बाकी पार्षद भी सहमत दिखे। पार्षदों से वोटिंग करवाई गई। बहुमत आया कि चर्चा बाद में की जाए। तय किया कि तीन जुलाई को हाउस की दोबारा बैठक होगी। इसमें सिर्फ भवन उपनियमों पर मंथन होगा। हालांकि, 24 जून की दोपहर को भी इस मसले पर चर्चा हो चुकी थी।
रेहड़ियों के लाइसेंस - मेयर साहब आज आप ही एक्ट की बात कर रहे
पार्षद अमित गुप्ता ने रेहड़ियों के लाइसेंस को लेकर प्रस्ताव लाया। मांग की कि सिर्फ जम्मू के लोगों को ही लाइसेंस दिए जाएं। मेयर राजेंद्र शर्मा ने कहा कि यह केंद्रीय एक्ट का मामला है। गुप्ता ने जवाब दिया कि जब आप पार्षद थे, तब मैंने आपसे सीखा था कि हाउस सर्वोपरि है। एक्ट की बातें आपसे सीखी थीं। आज आप ही एक्ट पर बात कर रहे हैं।
मंथन के बाद इन प्रस्तावों को हरी झंडी
उप मेयर बलदेव सिंह ने पद्मश्री, पद्मभूषण व अन्य गैलेंटरी अवॉर्ड धारकों को मूलभूत सुविधाओं में विशेषाधिकार देने का पहला प्रस्ताव प्रस्ताव रखा, जिसे पास कर दिया। इसके अलावा औपचारिकताएं पूरी होने तक पेंशन न रोकना (पार्षद सुभाष शर्मा), पेंशन की वेरिफिकेशन प्रक्रिया समाज कल्याण विभाग खुद करे (पार्षद पवन सिंह), उस्ताद मोहल्ले में जंबू सामुदायिक हाल का व्यावसायिक इस्तेमाल न हो (पार्षद सुनीत कुमार), राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज की जाए (पार्षद जीत कुमार) के प्रस्ताव पास हुए।
...और ये प्रस्ताव लटक गए
अनीता शर्मा - कर्मियों की डिपार्टमेंट प्रमोशन कमेटी पुनर्गठित हो
पूर्णिमा शर्मा - गरीबों की मदद के लिए निगम के पास विशेष फंड की व्यवस्था हो।
अमित गुप्ता - जम्मू वासियों को रेहड़ी के लाइसेंस दिए जाएं।
भानु महाजन - विभिन्न विभागों के लटके तार के लिए जुर्माना लगाया जाए।
सुरेंद्र शर्मा - जम्मू में 3.8 किलोग्राम और कश्मीर में 11 किलो आटा क्यों दिया जा रहा।
राजेंद्र सिंह जमवाल - बेसहारा नवजात बच्चों के लिए फोस्टर केयर सेंटर बनाया जाए।
निधि मंगोत्रा - रात के समय भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोले जाएं।
सोनिका शर्मा - गरीबाें के लिए पेंशन प्रक्रिया सरल की जाए।