जम्मू-कश्मीर: एससीईआरटी ने किया तीसरी-पांचवीं और आठवीं कक्षा का मूल्यांकन सर्वेक्षण
एससीईआरटी के शैक्षणिक अधिकारी गुलाम हसन रेशी ने कहा कि विशाल कार्य बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। हमने अपने स्कूल विभाग में उपलब्ध विशेषज्ञों को चुना, जो पहले जम्मू-कश्मीर में कई अलग-अलग अध्ययनों का हिस्सा थे। इससे वैज्ञानिक स्तर पर रणनीति और कार्यप्रणाली तैयार की गई।
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स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) जेएंडके ने कक्षा तीसरी, पांचवीं और आठवीं का मूल्यांकन सर्वेक्षण किया। इसका उद्देश्य छात्रों के सीखने में अंतराल की पहचान करना था। स्कूल शिक्षा विभाग के दोनों डिवीजनों में मूल्यांकन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जोन और जिला स्तर पर अपने सभी कार्यालयों को शामिल किया गया। एससीईआरटी निदेशक प्रो. वीना पंडिता ने कहा कि कोविड-19 महामारी में लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद होने के कारण बच्चों में सीखने के अंतराल की पहचान करना महत्वपूर्ण था। इससे अंदाजा हो जाएगा कि जम्मू-कश्मीर में कोविड महामारी ने शिक्षा प्रणाली को कितना प्रभावित किया है।
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ऑनलाइन शिक्षा ने इस अंतरालों को कम करने में काफी हद तक मदद की लेकिन खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के अलावा अधिकांश हिस्सों में स्मार्ट फोन के बिना छात्रों का एक बड़ा वर्ग सीखने से वंचित रहा है। एससीईआरटी के शैक्षणिक अधिकारी गुलाम हसन रेशी ने कहा कि विशाल कार्य बहुत चुनौतीपूर्ण रहा। हमने अपने स्कूल विभाग में उपलब्ध विशेषज्ञों को चुना, जो पहले जम्मू-कश्मीर में कई अलग-अलग अध्ययनों का हिस्सा थे। इससे वैज्ञानिक स्तर पर रणनीति और कार्यप्रणाली तैयार की गई।
रेशी ने गांदरबल के एक हाई स्कूल में काम करने वाले शिक्षक हिलाल अहमद वानी को मिशन के लिए चुना। अगला कार्य छात्रों के बीच सीखने के अंतराल और सीखने के स्तर की पहचान करने के लिए आइटम तैयार करना था। तीसरी और पांचवीं कक्षा के लिए भाषा, गणित और ईवीएस में और आठवीं के लिए भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन किया गया था।