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Jammu News: सांबा अदालत ने मवेशी जब्ती मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज
Sat, 06 Dec 2025 02:40 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 06 Dec 2025 02:40 AM IST
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अभियुक्तों को मवेशियों की अंतरिम हिरासत देने का मजिस्ट्रेट का आदेश बरकरार
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा ने गो ज्ञान फाउंडेशन की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें 24 जब्त मवेशियों को अभियुक्त मोहम्मद आसिफ मीर निवासी अनंतनाग और फिरोज अहमद निवासी कुलगाम को सौंपने के मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का आदेश विधिसम्मत है और उसमें किसी न्यायिक त्रुटि का संकेत नहीं मिलता। गो ज्ञान फाउंडेशन ने आरोप लगाया था कि मवेशियों को अवैध रूप से वध के लिए ले जाया जा रहा था, दस्तावेज संदिग्ध थे, पशु क्रूरता के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ और अभियुक्तों को अंतरिम हिरासत देना कानून व न्याय के खिलाफ है। फाउंडेशन ने कई उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर दावा किया कि ऐसे मामलों में पशुओं को गोशाला की हिरासत में ही रखा जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष फाउंडेशन बेहतर दावेदार के रूप में प्रस्तुत नहीं था और मजिस्ट्रेट की ओर से लगाई गई शर्तें-जैसे मवेशियों को न बेचना, पर्याप्त स्थान व चारा सुनिश्चित करना, मान्य पशु चिकित्सकीय प्रमाणपत्र लेना तथा नियमों के अनुरूप परिवहन पूरी तरह कानून के अनुरूप हैं। अदालत ने माना कि आदेश से किसी प्रकार का न्याय का विफलता या अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं हुआ है इसलिए पुनरीक्षण याचिका खारिज की जाती है। साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड वापस भेजने के निर्देश दिए।
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा ने गो ज्ञान फाउंडेशन की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें 24 जब्त मवेशियों को अभियुक्त मोहम्मद आसिफ मीर निवासी अनंतनाग और फिरोज अहमद निवासी कुलगाम को सौंपने के मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का आदेश विधिसम्मत है और उसमें किसी न्यायिक त्रुटि का संकेत नहीं मिलता। गो ज्ञान फाउंडेशन ने आरोप लगाया था कि मवेशियों को अवैध रूप से वध के लिए ले जाया जा रहा था, दस्तावेज संदिग्ध थे, पशु क्रूरता के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ और अभियुक्तों को अंतरिम हिरासत देना कानून व न्याय के खिलाफ है। फाउंडेशन ने कई उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर दावा किया कि ऐसे मामलों में पशुओं को गोशाला की हिरासत में ही रखा जाना चाहिए।
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अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष फाउंडेशन बेहतर दावेदार के रूप में प्रस्तुत नहीं था और मजिस्ट्रेट की ओर से लगाई गई शर्तें-जैसे मवेशियों को न बेचना, पर्याप्त स्थान व चारा सुनिश्चित करना, मान्य पशु चिकित्सकीय प्रमाणपत्र लेना तथा नियमों के अनुरूप परिवहन पूरी तरह कानून के अनुरूप हैं। अदालत ने माना कि आदेश से किसी प्रकार का न्याय का विफलता या अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं हुआ है इसलिए पुनरीक्षण याचिका खारिज की जाती है। साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड वापस भेजने के निर्देश दिए।
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