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J&K: घाटी में हिंसा के मामले पर विधानसभा में हंगामें के बाद विपक्ष का वॉकआउट
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 11 Jan 2017 09:27 PM IST
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Jammu kashmir Assembly
- फोटो : Amar Ujala
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कश्मीर हिंसा पर बुधवार को विधानसभा में फिर भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने न्यायिक जांच की मांग को लेकर नारेबाजी की। नेकां-कांग्रेस सदस्य कई बार वेल में पहुंचे। वेल में धरना दिया। इसके बाद भी जब सरकार की ओर से आश्वासन नहीं मिला तो पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित पूरे विपक्ष ने वाकआउट कर दिया।
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सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस के जीएम सरूरी ने कश्मीर हिंसा की न्यायिक जांच का मुद्दा उठाया। इसका नेकां, कांग्रेस के सदस्यों सहित हकीम मोहम्मद यासीन ने भी समर्थन किया। विपक्ष ने सरकार की ओर से न्यायिक जांच की घोषणा को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
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सरूरी का कहना था कि न्यायिक जांच में सरकार को क्या दिक्कत है, यह खुलकर बताना चाहिए। नेकां के देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि सरकार न्यायिक जांच से घबरा क्यों रही है। न्यायिक जांच हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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विधानसभा में हंगामें के बाद विपक्ष का वाकआउट
Jammu kashmir Assembly
- फोटो : Amar Ujala
विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ लगातार नारेबाजी किए जाने पर स्पीकर ने कई बार हस्तक्षेप कर सदस्यों से अपनी सीट पर जाने की अपील की, लेकिन वे इसे ठुकराते हुए लगातार नारेबाजी करते रहे। सदस्य कुर्सियों पर भी चढ़ गए थे।
जब विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सरकार को इस बाबत बयान देने के लिए नहीं कहा गया तो उमर के नेतृत्व में विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए नेकां विधायक अली मोहम्मद सागर ने कहा कि विपक्ष कश्मीर हिंसा की न्यायिक जांच चाहता है।मुख्यमंत्री कहती हैं कि कश्मीर हिंसा सोची-समझी साजिश का परिणाम है तो इसके लिए न्यायिक जांच जरूरी है।
जब विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सरकार को इस बाबत बयान देने के लिए नहीं कहा गया तो उमर के नेतृत्व में विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए नेकां विधायक अली मोहम्मद सागर ने कहा कि विपक्ष कश्मीर हिंसा की न्यायिक जांच चाहता है।मुख्यमंत्री कहती हैं कि कश्मीर हिंसा सोची-समझी साजिश का परिणाम है तो इसके लिए न्यायिक जांच जरूरी है।
निर्दलीय विधायक का भी वाकआउट
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा
- फोटो : Amar Ujala
निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अपनी बात रखने के लिए समय न दिए जाने से नाराज होकर वाकआउट किया। वह धरने पर भी बैठे।
सीएपीडी मंत्री जुल्फकार अली की ओर से ध्यान आकृष्ट कराए जाने के बाद स्पीकर ने उन्हें बोलने का मौका दिया।
सीएपीडी मंत्री जुल्फकार अली की ओर से ध्यान आकृष्ट कराए जाने के बाद स्पीकर ने उन्हें बोलने का मौका दिया।