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आरएस पुरा में 12 मवेशी मरे, सैकड़ों बीमार
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आरएस पुरा। उपजिले में लंपी रोग जैसे दिखने वाली बीमारी से अब तक 12 मवेशियों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों पशु बीमार हैं। इससे पशुपालक परेशान हैं। सरपंच हरबंस लाल का कहना है कि बीते दस दिनों से कई मवेशी बीमार हैं, जिनका पशुपालन विभाग के डॉक्टर उपचार नहीं कर रहे हैं। कलोए पंचायत के सरपंच ओंकार सिंह का कहना है कि सीमावर्ती गांव वासपुर के विभाग के वेटरनरी सब सेंटर पर तैनात डॉक्टर को इस बीमारी की पहचान करवाने के लिए जम्मू से टीम बुलाने के लिए कहा गया, लेकिन अभी तक इस पर काम नहीं हुआ है। ग्रामीण विनोद कुमार की गाय बीमारी से मर गई। पुरवाना के सरपंच चौधरी दर्शन लाल ने बताया कि ज्यादातर ग्रामीण पशुओं पर निर्भर हैं। पशुपालक रोशन लाल का कहना है कि उसकी गाय बीमार होने पर निजी डॉक्टर से उपचार करवाने में हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन गाय नहीं बची।
गांव अब्दुल्लियां, विधिपुर जट्टा, रायपुर सजदा, लाइया, शामका, कलोए, फिंथड़, आगरा चक्क, सीर, मग्गोवाली में हर रोज मवेशी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीण सरदारी लाल, रमेश कुमार, अशोक कुमार, मेहर चंद, जगमोहन, अमर सिंह, मोहन लाल, रामलाल, राजपाल आदि ने बताया कि पशुओं के शरीर पर गांठे निकल रही हैं, तेज बुखार के साथ घास खाना छोड़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार इस बीमारी का उपचार कर पशुपालकों की परेशानी दूर करे। जम्मू-कश्मीर पशुपालक एसोसिएशन के प्रधान किशोर कुमार का कहना है कि सरकार को इस बीमारी की रोकथाम के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। लंपी रोग इससे पहले दक्षिण भारत के राज्यों में फैला, लेकिन अभी तक सरकार ने इसे रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए हैं।
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दुधारू पशुओं में ज्यादा फैल
रहा रोग, अभी तक टीका नहीं
रठाना पशु चिकित्सालय के डॉ. अश्वनी बसन का कहना है कि लंपी जैसे दिखने वाली बीमारी पशुओं की चमड़ी पर प्रहार कर रही है। इस गांठदार वायरस को एलएसडीवी भी कहा जाता है। फिलहाल इसके उपचार के लिए अभी वैक्सीन नहीं है। यह बीमारी दुधारू पशुओं को ज्यादा हो रही है।
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बीमार पशु को खुले में चरने न
छोड़ें, साफ सफाई का रखें ध्यान
सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक डॉ. निलेश सिंह का कहना है कि यह वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है। दूषित पानी, लार और चारे की वजह से पशुओं को यह रोग होता है। पशुओं में जब भी इस बीमारी के लक्षण दिखें तो सबसे पहले बीमार पशु को अन्य मवेशियों से अलग कर दें। पशुओं को रखने वाले स्थान पर साफ-सफाई रखें, उन्हें खुले में चरने के लिए न छोड़ें।
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गांव अब्दुल्लियां, विधिपुर जट्टा, रायपुर सजदा, लाइया, शामका, कलोए, फिंथड़, आगरा चक्क, सीर, मग्गोवाली में हर रोज मवेशी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीण सरदारी लाल, रमेश कुमार, अशोक कुमार, मेहर चंद, जगमोहन, अमर सिंह, मोहन लाल, रामलाल, राजपाल आदि ने बताया कि पशुओं के शरीर पर गांठे निकल रही हैं, तेज बुखार के साथ घास खाना छोड़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार इस बीमारी का उपचार कर पशुपालकों की परेशानी दूर करे। जम्मू-कश्मीर पशुपालक एसोसिएशन के प्रधान किशोर कुमार का कहना है कि सरकार को इस बीमारी की रोकथाम के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। लंपी रोग इससे पहले दक्षिण भारत के राज्यों में फैला, लेकिन अभी तक सरकार ने इसे रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए हैं।
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दुधारू पशुओं में ज्यादा फैल
रहा रोग, अभी तक टीका नहीं
रठाना पशु चिकित्सालय के डॉ. अश्वनी बसन का कहना है कि लंपी जैसे दिखने वाली बीमारी पशुओं की चमड़ी पर प्रहार कर रही है। इस गांठदार वायरस को एलएसडीवी भी कहा जाता है। फिलहाल इसके उपचार के लिए अभी वैक्सीन नहीं है। यह बीमारी दुधारू पशुओं को ज्यादा हो रही है।
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बीमार पशु को खुले में चरने न
छोड़ें, साफ सफाई का रखें ध्यान
सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक डॉ. निलेश सिंह का कहना है कि यह वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है। दूषित पानी, लार और चारे की वजह से पशुओं को यह रोग होता है। पशुओं में जब भी इस बीमारी के लक्षण दिखें तो सबसे पहले बीमार पशु को अन्य मवेशियों से अलग कर दें। पशुओं को रखने वाले स्थान पर साफ-सफाई रखें, उन्हें खुले में चरने के लिए न छोड़ें।