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हर महीने खाली प्लॉट मालिकों को 22 लाख रुपये किराया दे रहे थे रोहिंग्या
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नरवाल की रोहिंग्या बस्ती में वेरिफिकेशन करते अधिकारी। अमर उजाला
- फोटो : SHRINAGAR
जम्मू। शहर के नरवाल, त्रिकुटा नगर, छन्नी, बठिंडी आदि क्षेत्रों में तीन हजार से अधिक रोहिंग्या परिवार रहते हैं। खाली प्लॉट वाले मालिकों ने प्रति झुग्गी 750 रुपये महीने का किराया तय कर रखा है। ऐसे में तीन हजार झुग्गी का किराया देखा जाए तो हर महीने 22 लाख रुपये किराया खाली प्लाट मालिकों के खाते में रोहिंग्याओं का जा रहा है। इसमें रोहिंग्याओं को अधिकारिक तौर पर बिजली पानी तक मुहैया कराया जा रहा है।
रोहिंग्या बस्तियों में माहौल ऐसा है कि झुंड में खड़े होने वाले लोगों में भी इसी बात की चर्चा है कि उन लोगों को कहां ले जाया जाएगा और उनके साथ किस तरह का व्यवहार होगा। सीआईडी की ओर से इनके पास जाकर वेरिफिकेशन किया जा रहा है। सीआईडी के पास पहले से ही उनकी सूची है। वेरिफिकेशन होने पर इनके नाम सूची से मिलाए जा रहे हैं। बस्तियों के बाहर पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं, ताकि यह लोग कहीं पर जा न पाएं। मंगलवार को रोहिंग्या बस्तियों में वेरिफिकेशन की प्रक्रिया दिनभर चलती रही।
राशन हो रहा खत्म, खाने की दिक्कत
रोहिंग्या मजदूरों को पिछले चार दिनों से घरों से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। अब्दुल का कहना है कि चार दिन से उनके पास जो थोड़ा बहुत राशन है वो खत्म हो गया। अब उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं। मुश्किल से सूखी रोटी खाकर गुजारा कर रहे हैं। बच्चों को ज्यादा मुश्किल हो रही है।
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मजदूरी के पैसे फंसे
हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं में बहुत से ऐेसे हैं, जिन्होंने मजदूरी की हुई है और ठेकेदारों के पास से पैसे लेने हैं। इन लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन जगहों पर काम किया है, वहां से उनको मजदूरी का पैसा दिलाया जाए। किसी को ठेकेदार से 10 दिन की मजदूरी लेनी है तो किसी को 15 दिन की। कुछ मजदूर ऐसे भी हैं, जिन्होंने ठेके पर काम लिया है। अब्दुल शकूर ने एक इमारत के निर्माण में 20 से 25 रोहिंग्या मजदूरों से काम करवाया। इसके लिए 2 लाख रुपये की मजदूरी बन चुकी है। हमें तो बस्ती से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। ऊपर से जिन मजदूरों ने काम किया है, वो मुझसे पैसे मांग रहे हैं। मोहम्मद शाह, मोहम्मद शाह अली और सलीम की तरह सैकड़ों हजारों रोहिंग्या हैं, जिन्होंने शहर के अलग अलग जगहों पर ठेकेदारों और विभागों के पास काम किया हुआ है। लेकिन उनके पैसे फंस गए हैं।
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रोहिंग्या बस्तियों में माहौल ऐसा है कि झुंड में खड़े होने वाले लोगों में भी इसी बात की चर्चा है कि उन लोगों को कहां ले जाया जाएगा और उनके साथ किस तरह का व्यवहार होगा। सीआईडी की ओर से इनके पास जाकर वेरिफिकेशन किया जा रहा है। सीआईडी के पास पहले से ही उनकी सूची है। वेरिफिकेशन होने पर इनके नाम सूची से मिलाए जा रहे हैं। बस्तियों के बाहर पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं, ताकि यह लोग कहीं पर जा न पाएं। मंगलवार को रोहिंग्या बस्तियों में वेरिफिकेशन की प्रक्रिया दिनभर चलती रही।
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राशन हो रहा खत्म, खाने की दिक्कत
रोहिंग्या मजदूरों को पिछले चार दिनों से घरों से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। अब्दुल का कहना है कि चार दिन से उनके पास जो थोड़ा बहुत राशन है वो खत्म हो गया। अब उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं। मुश्किल से सूखी रोटी खाकर गुजारा कर रहे हैं। बच्चों को ज्यादा मुश्किल हो रही है।
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मजदूरी के पैसे फंसे
हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं में बहुत से ऐेसे हैं, जिन्होंने मजदूरी की हुई है और ठेकेदारों के पास से पैसे लेने हैं। इन लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन जगहों पर काम किया है, वहां से उनको मजदूरी का पैसा दिलाया जाए। किसी को ठेकेदार से 10 दिन की मजदूरी लेनी है तो किसी को 15 दिन की। कुछ मजदूर ऐसे भी हैं, जिन्होंने ठेके पर काम लिया है। अब्दुल शकूर ने एक इमारत के निर्माण में 20 से 25 रोहिंग्या मजदूरों से काम करवाया। इसके लिए 2 लाख रुपये की मजदूरी बन चुकी है। हमें तो बस्ती से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। ऊपर से जिन मजदूरों ने काम किया है, वो मुझसे पैसे मांग रहे हैं। मोहम्मद शाह, मोहम्मद शाह अली और सलीम की तरह सैकड़ों हजारों रोहिंग्या हैं, जिन्होंने शहर के अलग अलग जगहों पर ठेकेदारों और विभागों के पास काम किया हुआ है। लेकिन उनके पैसे फंस गए हैं।