रोहिंग्या लोगों से जम्मू की डेमोग्राफी को खतरा, VHP ने जताई साजिश की आशंका
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तेजी से बढ़ रही रोहिंग्या तथा बांग्लादेशियों की तादाद से रियासत की डेमोग्राफी को खतरा उत्पन्न हो गया है। विहिप का कहना है कि इनसे सुरक्षा को खतरा तो है ही, साथ ही इन्हें साजिश के तहत यहां बसाया जा रहा है ताकि हिंदू बहुल जम्मू का चेहरा बदल सके। कई अन्य संगठन भी आपत्ति जता चुके हैं।
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष लीलाकरण शर्मा का कहना है कि इनके बसने से जम्मू की डेमोग्राफी को खतरा उत्पन्न हो गया है। यदि ऐसे ही इनकी संख्या बढ़ती रही तो जम्मू का हिंदू बहुल चरित्र बदल सकता है। खाली प्लाटों पर इन्होंने झुग्गियां बसा ली हैं। रियासती सरकार की ओर से कभी भी इनके बारे में पड़ताल नहीं की जाती है।
यह पता लगाने की कोशिश नहीं की जाती है कि वे कब और कैसे आकर यहां बस गए। स्टेट सब्जेक्ट न होने के बाद भी इन्होंने कैसे अस्थायी रूप से ही झुग्गियां बसा लीं। इनके बारे में सरकार को विस्तृत पड़ताल करनी चाहिए। यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए वे इतनी दूर आकर कैसे बसे। इन्हें बसाने के पीछे किसका हाथ है।
फर्जी तरीके से स्टेट सब्जेक्ट और पहचान हासिल करने की आशंका
पूर्व रक्षा राज्य मंत्री प्रो. चमन लाल का कहना है कि आज जम्मू शहर के चारो ओर मुस्लिम समुदाय के लोगों का बसेरा बन गया है। अलग-अलग प्रांतों से आकर शहर के बाहरी इलाके में लोग बस गए हैं। दूसरे राज्यों से आकर लोगों ने ठौर बना लिया है।
ऐसी भी सूचना है कि कई लोगों ने फर्जी तरीके से स्टेट सब्जेक्ट हासिल कर लिया है। कई के पास आधार कार्ड हैं और कुछ ने राशन कार्ड भी बनवा लिए हैं। सरकार कभी भी इनके बाबत पूछताछ नहीं करती है। यह सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। बार्डर स्टेट होने के नाते विस्तृत छानबीन जरूरी है।
मजदूरी करके चला रहे हैं घर
ज्ञात हो कि जम्मू में 22 स्थानों पर पांच हजार से अधिक लोग रहते हैं। जाहिद हुसैन ने बताया कि वह परिवार के साथ 2009 में राजस्थान होते हुए यहां आए। यहां रहने वाले ज्यादातर लोगों के पास रिफ्यूजी कार्ड है। म्यांमार में जब बौद्धों का उत्पीड़न बढ़ गया तो वर्ष 1998 के बाद रोहिंग्या समुदाय के लोगों का पलायन ज्यादा होने लगा। वहां शादी करने के लिए भी पैसा जमा करना पड़ता है। है