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20 हजार में बिक रही बेटियां: बेहतर जिंदगी का लालच देकर जम्मू-कश्मीर लाई जा रहीं लड़कियां, मिले तस्करी के सबूत

Fri, 23 May 2025 05:03 PM IST
निकिता गुप्ता अजय मीनिया, अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 23 May 2025 05:03 PM IST
सार

म्यांमार से रोहिंग्या लड़कियों को अच्छी जिंदगी का झांसा देकर जम्मू-कश्मीर लाया जा रहा है, जहां उन्हें जबरन शादियों के लिए बेच दिया जाता है। पुलिस जांच में तस्करी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें स्थानीय और बाहरी तस्कर शामिल हैं।

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Rohingya girls are being trafficked from Myanmar and sold in Jammu and Kashmir
म्यांमार से रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी कर जम्मू-कश्मीर में बेचा जा रहा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या सिर्फ अवैध रूप से बसे ही नहीं हैं, बल्कि इनकी शादियां भी गैरकानूनी तरीके से कराई जा रही हैं। बड़े पैमाने पर म्यांमार से नाबालिग और बालिग लड़कियों की तस्करी हो रही है। बेहतर जिंदगी का लालच देकर इन्हें भारत लाया जाता है, जहां बाद में उम्र में दोगुने या अक्षम लोगों से जबरन शादी करा दी जाती है। इन लड़कियों को म्यांमार से 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक में खरीदकर जम्मू-कश्मीर में बेचा जा रहा है।

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सौदा पक्का होते ही लड़कियों को भेजा जाता है आगे
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामले रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी के सबूत हैं। सूत्रों के मुताबिक, जम्मू और श्रीनगर में यह सिलसिला जारी है। जम्मू की रोहिंग्या बस्तियां इनके लिए ट्रांजिट पॉइंट का काम करती हैं। कुछ दिन यहां रखने के बाद सौदा पक्का होते ही लड़कियों को आगे भेज दिया जाता है।

इस तस्करी में कश्मीर के कुछ लोग भी शामिल हैं, जो रोहिंग्या समुदाय के साथ मिलकर यह गतिविधि चला रहे हैं। अब तक जम्मू संभाग में 30 और कश्मीर में 110 लड़कियों की जबरन शादियां कराई जा चुकी हैं। प्रदेश की पुलिस को इसकी जानकारी है।

जम्मू के दक्षिणी इलाकों में सबसे अधिक मौजूदगी
जम्मू के बठिंडी, सुंजवां, त्रिकुटा नगर और नरवाल जैसे इलाकों में रोहिंग्याओं की बस्तियां हैं। जम्मू जिले के 70% रोहिंग्या इन्हीं क्षेत्रों में रहते हैं। ये इलाके उनके लिए ट्रांजिट जोन की तरह काम करते हैं, जहां लड़कियों या अन्य लोगों को कुछ दिन रोककर फिर अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है।

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रोहिंग्या लड़कियों की तस्करी के प्रमुख मामले
22 सितंबर 2022: नगरोटा पुलिस ने म्यांमार निवासी अब्दुल शकूर और मोहम्मद यासमीन को गिरफ़्तार किया। ये कश्मीर में लड़कियों को बेचते थे।

3 दिसंबर 2022: त्रिकुटा नगर पुलिस ने दो नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया, जिन्हें 20 से 50 हज़ार रुपये में ख़रीदकर लाया गया था।

8 नवंबर 2023: बठिंडी से जफर आलम को एनआईए ने गिरफ्तार किया। यह म्यांमार से लड़कियों को कश्मीर में बेचने के आरोप में चल रहे मामले में शामिल था।

28 नवंबर 2023: बांदीपुरा में म्यांमार निवासी मंज़ूर आलम को गिरफ्तार किया गया। वह लड़कियों को जम्मू में ठहराकर कश्मीर भेजता था।

28 मई 2024: बड़गाम में दो रोहिंग्या लड़कियों को बरामद किया गया, जिन्हें जबरन शादी के लिए लाया गया था।

12 जुलाई 2024: बारामुला के शकील अहमद से चार नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। उसने एक लड़की को 20 हजार रुपये में बेचा था। 

रोहिंग्या मजदूर भी बने तस्करी के माध्यम
मजदूरों के जरिये भी तस्करीसूत्रों के अनुसार, कश्मीर में काम करने वाले रोहिंग्या मजदूर भी इस तस्करी में शामिल हैं। ये परिवार से मिलने" के बहाने म्यांमार जाते हैं और वापसी में नाबालिगों को अपनी बेटियां बताकर ले आते हैं। 20 जनवरी 2024 को कोलकाता में रेलवे पुलिस ने बांग्लादेशी रोहिंग्या मुस्लिम अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया, जो दो नाबालिग लड़कियों के साथ कश्मीर जा रहा था।
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तस्करी का तरीका 
म्यांमार की रोहिंग्या बस्तियों में एनजीओ की आड़ लेकर तस्कर लड़कियों को चुनते हैं। कोलकाता या गुवाहाटी में नौकरी का झांसा देकर उन्हें भारत लाया जाता है। जम्मू पहुंचने पर इन्हें बस्तियों में छिपाया जाता है। पहचान छिपाने के लिए फर्ज़ी आधार कार्ड बनवाए जाते हैं।

दिसंबर 2023 में जम्मू में 61 और कश्मीर में 97 नकली आधार कार्ड बरामद हुए, जिनमें अधिकांश महिलाओं के थे। पूर्व डीजीपी एसपी वैद के अनुसार स्थानीय लोगों के साथ रोहिंग्या लड़कियों की शादियां लंबे समय से चल रही हैं।

रोहिंग्याओं की अधिकतर घुसपैठ पश्चिम बंगाल से होती है। वहां से ट्रेन या अन्य साधनों से ये जम्मू पहुंचते हैं। इन्हें पश्चिम बंगाल में ही रोकना जरूरी है। हालांकि, पुलिस इन पर नजर रखे हुए है। कई मामले दर्ज भी किए गए हैं। बस्तियों में रहने वालों की हर गतिविधि पर निगरानी है। अजय शर्मा, एसपी, जम्मू दक्षिण

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