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नए ठिकाने तलाश रहे रोहिंग्या: बठिंडी के जंगल से भी खदेड़ा, निगरानी बनी चुनौती; इन राज्यों का कर रहे रूख

Thu, 17 Sep 2026 08:40 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 17 Sep 2026 08:40 AM IST
सार

नरवाल बस्ती से हटाए जाने के बाद रोहिंग्या परिवार अब नया ठिकाना देख रहे हैं। 10 से 12 परिवार बठिंडी के ऊपरी जंगल में बसने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें प्रशासन ने पुलिस के साथ मिलकर खदेड़ दिया।

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Rohingya family removed again before they could settle in forest After being evicted from Narwal
झुग्गियां खाली करते रोहिंग्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नरवाल से हटाए जाने के बाद रोहिंग्या परिवार अब नए ठिकाने तलाश रहे हैं। करीब 10 से 12 परिवार बठिंडी के ऊपरी जंगल वाले इलाके तक पहुंच गए और वहां तंबू लगाकर बसने की कोशिश की। प्रशासन को इसकी भनक लगी तो पुलिस के साथ अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें वहां से खदेड़ा। एक ही बस्ती में रहने वाले परिवारों के अब अलग-अलग दिशाओं में जाने से सुरक्षा एजेंसियों के सामने उनकी आवाजाही पर नजर रखने की चुनौती बढ़ गई है।

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नरवाल बस्ती से कुछ परिवार जम्मू में किसी खाली सरकारी भूमि या नालों के किनारे रहने की फिराक में हैं। कुछ रोहिंग्या दूसरे राज्यों का रुख करने की बात कर रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में एक जगह रहने वाली आबादी कई हिस्सों में बंट सकती है। रोहिंग्या अपना सामान बेचकर पैसा जुटा रहे हैं ताकि जम्मू से बाहर निकल सकें।

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रोहिंग्या समुदाय के नेता अमीर हुसैन ने बताया कि नरवाल में कार्रवाई के बाद कई परिवार जम्मू में ही दूसरी जगह तलाश रहे हैं। कुछ दूसरे राज्यों का रुख भी कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा हरियाणा, हैदराबाद और बंगलुरू जा रहे हैं। हुसैन ने कहा कि लोगों के पास पैसा नहीं है इसलिए सारा सामान बेच रहे हैं ताकि कुछ किराया जुटा सकें। जम्मू में एक से दूसरे बस्ती में जाने नहीं दिया जा रहा है। हर जगह पुलिस का पहरा है।

बिखराव के बाद कौन कहां गया, पता लगाना चुनौती
पूर्व आईजी आईपी सिंह ने कहा कि एक जगह रहने पर रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी पर नजर रखना आसान था। अब अलग-अलग इलाकों और राज्यों में जाने के बाद इनकी आवाजाही पर निगरानी मुश्किल होगी।

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कौन परिवार किस जगह पहुंचा, कहां रुका और आगे कहां गया, इसकी जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा सतर्क रहना होगा। खासकर बाहरी इलाकों और जंगलों में अस्थायी ठिकाने बनाए जाने की स्थिति ने निगरानी की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में बस्ती खाली कराने के साथ अब परिवारों के नए ठिकानों और उनके संभावित रुख पर भी नजर रखनी होगी
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