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Jammu News: गांव वाला चक सड़क पर से दो माह में उखड़ी तारकोल
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संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। आरएस पुरा ब्लाॅक के गांव बाला चक में दो माह पहले मुख्य सड़क से गांव के अंदर तक डेढ़ सौ मीटर तक तारकोल डाली गई थी। गांव के लोगों की सहूलियत के लिए डाली गई तारकोल उनके लिए आफत बन गई है। तारकोल दो माह के बाद ही सड़क उखड़ गई है, और कंक्रीट बाहर निकल आई है। इसके चलते वाहन चालक आए दिन हादसे का शिकार हो रहे हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आ रही हैं।
इस मुद्दे को लेकर गांव के निवासियों में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की तरफ से तारकोल डाली गई थी, जब तारकोल डाली गई थी उस समय उनको मौसम अनुकूल होने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने लोगों की न सुनते हुए तारकोल डालने का काम शुरू कर दिया। नतीजतन दो माह के बाद ही सड़क उखड़ गई है, सड़क की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है। इसके लिए जब पीडब्ल्यूडी कार्यालय में शिकायत की गई, तो अधिकारियों ने कहा कि मार्च में मौसम अनुकूल होते ही तारकोल दोबारा डाल दी जाएगी। इससे जाहिर होता है कि पीडब्ल्यूडी काम खत्म करने की होड़ में लगा रहता है। चाहे उसके लिए फंड का दुरुपयोग ही क्यों न हो जाए।
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तारकोल अगर मार्च में डाली जाती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न न होती, और सरकार के फंड की फिजूलखर्ची बच जाती।
-मंगाराम, गांव के चौकीदार
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पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से दो माह में सड़क टूट गई है। सरकार को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
-दीवान चंद, गांव निवासी
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विभाग को लोगों की सहूलियत के लिए काम करना चाहिए, लेकिन यहां विभाग ने अनुचित समय पर तारकोल डालकर लोगों को परेशान किया है।
-कृष्ण लाल, गांव निवासी
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पीडब्ल्यूडी को उखड़ी तारकोल की सुध लेनी चाहिए। गलत समय पर तारकोल डालने से सड़क उखड़ी है या तारकोल की गुणवत्ता घटिया है।
-रवि कुमार, स्थानीय निवासी
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ठेकेदार को तारकोल डालने के लिए मना किया गया था, परंतु उसने अपनी जिम्मेदारी पर तारकोल डाली थी। तारकोल डालने के एक साल तक का रखरखाव ठेकेदार पर होता है, अगर उसके अंतर्गत तारकोल उखड़ जाती है, तो ठेकेदार दोबारा से तारकोल डाल कर देगा। इस सड़क के लिए भी ठेकेदार को तारकोल डालने के लिए कह दिया है। जब तक नए सिरे से तारकोल नहीं डलती, तब तक ठेकेदार का भुगतान नहीं किया जाएगा।
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-भूपेंद्र सिंह, एईई, पीडब्ल्यूडी
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अरनिया। आरएस पुरा ब्लाॅक के गांव बाला चक में दो माह पहले मुख्य सड़क से गांव के अंदर तक डेढ़ सौ मीटर तक तारकोल डाली गई थी। गांव के लोगों की सहूलियत के लिए डाली गई तारकोल उनके लिए आफत बन गई है। तारकोल दो माह के बाद ही सड़क उखड़ गई है, और कंक्रीट बाहर निकल आई है। इसके चलते वाहन चालक आए दिन हादसे का शिकार हो रहे हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आ रही हैं।
इस मुद्दे को लेकर गांव के निवासियों में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी की तरफ से तारकोल डाली गई थी, जब तारकोल डाली गई थी उस समय उनको मौसम अनुकूल होने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने लोगों की न सुनते हुए तारकोल डालने का काम शुरू कर दिया। नतीजतन दो माह के बाद ही सड़क उखड़ गई है, सड़क की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है। इसके लिए जब पीडब्ल्यूडी कार्यालय में शिकायत की गई, तो अधिकारियों ने कहा कि मार्च में मौसम अनुकूल होते ही तारकोल दोबारा डाल दी जाएगी। इससे जाहिर होता है कि पीडब्ल्यूडी काम खत्म करने की होड़ में लगा रहता है। चाहे उसके लिए फंड का दुरुपयोग ही क्यों न हो जाए।
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तारकोल अगर मार्च में डाली जाती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न न होती, और सरकार के फंड की फिजूलखर्ची बच जाती।
-मंगाराम, गांव के चौकीदार
पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से दो माह में सड़क टूट गई है। सरकार को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
-दीवान चंद, गांव निवासी
विभाग को लोगों की सहूलियत के लिए काम करना चाहिए, लेकिन यहां विभाग ने अनुचित समय पर तारकोल डालकर लोगों को परेशान किया है।
-कृष्ण लाल, गांव निवासी
पीडब्ल्यूडी को उखड़ी तारकोल की सुध लेनी चाहिए। गलत समय पर तारकोल डालने से सड़क उखड़ी है या तारकोल की गुणवत्ता घटिया है।
-रवि कुमार, स्थानीय निवासी
ठेकेदार को तारकोल डालने के लिए मना किया गया था, परंतु उसने अपनी जिम्मेदारी पर तारकोल डाली थी। तारकोल डालने के एक साल तक का रखरखाव ठेकेदार पर होता है, अगर उसके अंतर्गत तारकोल उखड़ जाती है, तो ठेकेदार दोबारा से तारकोल डाल कर देगा। इस सड़क के लिए भी ठेकेदार को तारकोल डालने के लिए कह दिया है। जब तक नए सिरे से तारकोल नहीं डलती, तब तक ठेकेदार का भुगतान नहीं किया जाएगा।
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-भूपेंद्र सिंह, एईई, पीडब्ल्यूडी