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Jammu News: कबूतरों की उड़ान में रियाज रहे अव्वल, सलीम द्वितीय
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श्रीनगर में कबूतरबाजी प्रतियोगिता के बाद पुरस्कृत खिलाड़ी और आयोजक। स्रोत सीआरपीएफ
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श्रीनगर। सीआरपीएफ की एफ161 बटालियन ने कमांडेंट बलिहार सिंह के नेतृत्व में श्रीनगर के डाउनटाउन में उड़ान कबूतर खेल टूर्नामेंट का आयोजन किया। प्रतियोगिता की शुरुआत 12 जुलाई को हुई थी। इसके फाइनल मुकाबले सोमवार को हुए, जिसमें रियाज अव्वल और सलीम द्वितीय स्थान पर रहे।
अधिकारियों के अनुसार फाइनल मुकाबला सोमवार को दानमार संगम पर आयोजित किया गया था। नूरबाग, पलपोरा, गोरीपोरा, शुंगलीपोरा, दानमार संगम, ऐवाकदल, वांगनपोरा की टीमों ने भाग लिया, जिसके बाद टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ कबूतर का पुरस्कार मुराद कबूतर के रियाज़ अहमद (प्रथम स्थान) और चिनार कबूतर के मोहम्मद सलीम याटू (द्वितीय स्थान) को दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार ये संरचित कार्यक्रम समुदाय के भीतर प्रतिस्पर्धात्मक भावना और समर्पण को उजागर करते हैं। इस अत्यधिक व्यसनकारी खेल की विजेता और उपविजेता टीमों को नकद पुरस्कार के साथ एक ट्रॉफी और सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के लिए एक पदक भी प्रदान किया गया।
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जीवंत विरासत है कबूतरबाजी
कश्मीर में कबूतरबाजी महज एक खेल नहीं है, यह एक जीवंत विरासत है। श्रीनगर के डाउनटाउन में सदियों पुरानी परंपरा कबूतरबाजी मात्र मनोरंजन नहीं है। कबूतर पालने और उड़ाने की इस सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए ही सीआरपीएफ की इस यूनिट ने इस प्रतियोगिता का आयोजन किया है।
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अधिकारियों के अनुसार फाइनल मुकाबला सोमवार को दानमार संगम पर आयोजित किया गया था। नूरबाग, पलपोरा, गोरीपोरा, शुंगलीपोरा, दानमार संगम, ऐवाकदल, वांगनपोरा की टीमों ने भाग लिया, जिसके बाद टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ कबूतर का पुरस्कार मुराद कबूतर के रियाज़ अहमद (प्रथम स्थान) और चिनार कबूतर के मोहम्मद सलीम याटू (द्वितीय स्थान) को दिया गया।
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अधिकारियों के अनुसार ये संरचित कार्यक्रम समुदाय के भीतर प्रतिस्पर्धात्मक भावना और समर्पण को उजागर करते हैं। इस अत्यधिक व्यसनकारी खेल की विजेता और उपविजेता टीमों को नकद पुरस्कार के साथ एक ट्रॉफी और सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के लिए एक पदक भी प्रदान किया गया।
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जीवंत विरासत है कबूतरबाजी
कश्मीर में कबूतरबाजी महज एक खेल नहीं है, यह एक जीवंत विरासत है। श्रीनगर के डाउनटाउन में सदियों पुरानी परंपरा कबूतरबाजी मात्र मनोरंजन नहीं है। कबूतर पालने और उड़ाने की इस सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए ही सीआरपीएफ की इस यूनिट ने इस प्रतियोगिता का आयोजन किया है।