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Jammu News: 400 साल पुराना पक्का डंगा महालक्ष्मी मंदिर आस्था के केंद्र
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- दर्शन के लिए 24 घंटे खुला रहता है मां का दरबार
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। पुराने शहर के पक्का डंगा क्षेत्र में स्थित महालक्ष्मी मंदिर पक्का डंगा अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है और इसका निर्माण डोगरा शासकों के समय में हुआ था। मंदिर में मां महालक्ष्मी की मूर्ति विराजमान है जहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित सुरेश शर्मा के अनुसार यह मंदिर जम्मू शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इन नौ दिनों के दौरान मंदिर में अखंड ज्योत जलाई जाती है। मंदिर दिन-रात खुला रहता है। श्रद्धालु किसी भी समय आकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। पंडित सुरेश शर्मा ने बताया कि देशभर में लक्ष्मीनारायण के कई मंदिर हैं लेकिन महालक्ष्मी के मंदिर बहुत कम हैं। इनमें से एक महालक्ष्मी मंदिर मुंबई में स्थित है जबकि दूसरा जम्मू के पक्का डंगा में है। इस मंदिर में करीब तीस साल पहले माता चंडी (मचैल) का मंदिर भी स्थापित किया गया है। पहाड़ी क्षेत्र में होने वाली मचैल यात्रा के चलते श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां मंदिर की स्थापना की गई है, ताकि श्रद्धालु यहां दर्शन कर सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। पुराने शहर के पक्का डंगा क्षेत्र में स्थित महालक्ष्मी मंदिर पक्का डंगा अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है और इसका निर्माण डोगरा शासकों के समय में हुआ था। मंदिर में मां महालक्ष्मी की मूर्ति विराजमान है जहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित सुरेश शर्मा के अनुसार यह मंदिर जम्मू शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इन नौ दिनों के दौरान मंदिर में अखंड ज्योत जलाई जाती है। मंदिर दिन-रात खुला रहता है। श्रद्धालु किसी भी समय आकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। पंडित सुरेश शर्मा ने बताया कि देशभर में लक्ष्मीनारायण के कई मंदिर हैं लेकिन महालक्ष्मी के मंदिर बहुत कम हैं। इनमें से एक महालक्ष्मी मंदिर मुंबई में स्थित है जबकि दूसरा जम्मू के पक्का डंगा में है। इस मंदिर में करीब तीस साल पहले माता चंडी (मचैल) का मंदिर भी स्थापित किया गया है। पहाड़ी क्षेत्र में होने वाली मचैल यात्रा के चलते श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां मंदिर की स्थापना की गई है, ताकि श्रद्धालु यहां दर्शन कर सकें।
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